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दक्षिण सूडान: हिंसा में आए उछाल, सहायता अभियानों को निशाना बनाए जाने पर क्षोभ

दक्षिण सूडान में एक जल गई कार मलबे और अस्थायी आश्रयों के बीच बैठी है, जो संघर्ष के बाद के परिणामों को उजागर करती है।
© UNICEF/Sebastian Rich दक्षिण सूडान के अपर नाइल प्रान्त के एक ग्रामीण इलाक़े में एक ध्वस्त वाहन. (फ़ाइल)

दक्षिण सूडान: हिंसा में आए उछाल, सहायता अभियानों को निशाना बनाए जाने पर क्षोभ

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दक्षिण सूडान में हिंसक घटनाओं में आई तेज़ी की कठोर शब्दों में निन्दा करते हुए चेतावनी दी है कि देश में आम नागरिक और राहतकर्मी, मानवीय सहायता अभियानों को निशाना बनाए जाने की एक भयावह क़ीमत चुका रहे हैं. 

यूएन के शीर्षतम अधिकारी के उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने  शनिवार को उनकी ओर से एक वक्तव्य जारी किया, जिसके अनुसार, दक्षिण सूडान में लगभग 1 करोड़ लोगों, देश की दो-तिहाई आबादी से अधिक, को जीवनरक्षक मानवीय सहायता की आवश्यकता है.

यूएन प्रमुख ने लड़ाई, हमलों, सहायता सामग्री की लूटपाट और स्वास्थ्य केन्द्रों पर हो रहे असर पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि आम नागरिकों को हिंसक संघर्ष का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है.

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“इन परिस्थितियों से मानवीय सहायता अभियान पंगु हो रहे हैं, अति-आवश्यक सेवाएँ ठप हो रही हैं, जिससे सहायताकर्मियों समेत आम नागरिकों पर गम्भीर जोखिम है.” 

स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले

दिसम्बर 2025 के अन्तिम दिनों से अब तक, जोंगलेई प्रान्त में ही कम से कम 11 स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों को निशाना बनाए जाने की ख़बरें हैं. इन हमलों में एक ऐम्बुलेंस समेत 12 वाहनों को ज़ब्त कर लिया गया है.

महासचिव ने ध्यान दिलाया कि केवल पिछले सप्ताह के दौरान, विश्व खाद्य कार्यक्रम के क़ाफ़िले पर बार-बार हमले किए गए, एक अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठन (MSF) द्वारा संचालित अस्पताल पर हवाई हमला हुआ है, ‘सेव द चिल्ड्रन’ संगठन के कार्यालय में आगज़नी हुई और उसके स्वास्थ्य केन्द्र बर्बाद कर दिया गया. 

उन्होंने कहा कि मेडिकल और मानवीय सहायता अभियानों के लिए खुली बेपरवाही, अस्वीकार्य है और इसे तुरन्त रोका जाना होगा.

हिंसा की वजह से बड़े पैमाने पर आम नागरिक विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं. इस वर्ष, अब तक 3.7 लाख लोग बेघर हुए हैं, जिनमें 2.8 लाख जोंगलेई प्रान्त से हैं. वहीं कुछ हिस्सों में हैज़ा को प्रकोप है.

यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई को तुरन्त रोके जाने का आग्रह करते हुए, सम्वाद की दिशा में लौटने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का पालन, आम नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता मार्ग की सुलभता को सुनिश्चित किया जाना होगा.

चुनौतियों की चपेट में

विश्व के सबसे युवा देश, दक्षिण सूडान ने वर्ष 2011 में सूडान से स्वाधीनता हासिल की थी, मगर उसके बाद से ही यह देश, टकराव और अस्थिरता से जूझता रहा है. वर्ष 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्य बलों और पूर्व उप राष्ट्रपति रिएक मचार के समर्थकों के बीच गृहयुद्ध भड़क उठा था. 

कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद, 2018 में नाज़ुक हालात में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई.

इस समझौते के बाद, फ़रवरी 2020 में एक संक्रमणकालीन सरकार का गठन किया गया था, लेकिन उसके बाद से ही चुनाव स्थगित होते रहे हैं और सरकार और विरोधी पक्षों के बीच टकराव भड़का है.