ग़ाज़ा - पीड़ा बयान करतीं कलाकृतियाँ
ग़ाज़ा पट्टी में फ़लस्तीनी कलाकार, विस्थापन शिविरों और ध्वस्त स्कूलों व घरों के बीच भी अपनी कला जारी रखने की कोशिश में लगे हुए हैं. ये कलाकार अपनी कलाकृतियों में, दो साल से जारी युद्ध, उससे पैदा हुए मानसिक दबाव और मानवीय हालात को दर्ज कर रहे हैं...(वीडियो)
ये कलाकार, सीमित संसाधन होने के कारण, आसपास उपलब्ध सामान्य सामग्रियों का ही उपयोग करके, कलाकृतियाँ बना रहे हैं.
मध्य ग़ाज़ा में एक स्कूल, जो अब शरणस्थली में बदल चुका है, वहाँ रहने वाली युवा कलाकार मराह ख़ालिद ने अपने अस्थाई तम्बू को एक छोटी कला प्रदर्शनी में बदल दिया है. वह ग़ाज़ा के उत्तरी हिस्से के बैत हनून से विस्थापित हुई थीं.
बुरेज शरणार्थी शिविर में दृश्य कलाकार अहमद महना, पारम्परिक कैनवस के अभाव में, खाद्य सहायता से मिले गत्ते के डिब्बों पर चित्र बना रहे हैं.
उनका कहना है कि सीमा मार्ग बन्द होने और सामग्री की कमी ने, उन्हें वैकल्पिक तरीक़े अपनाने के लिए मजबूर किया. ग़ाज़ा शहर के कुछ इलाक़ों में कलाकारों ने, तबाह इमारतों की दीवारों पर भित्ति-चित्र भी बनाए हैं. कलाकारों के अनुसार, वर्तमान हालात में कला, उनके लिए केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि इस दौर को दर्ज करने का एक माध्यम बन गई है.