अमेरिका-रूस परमाणु सन्धि की अवधि समाप्त होना, विश्व के लिए एक 'गम्भीर क्षण'
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच, परमाणु हथियारों पर केन्द्रित 'न्यू स्टार्ट' (New START) नामक सन्धि की अवधि समाप्त होना, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा के लिए एक “गम्भीर क्षण” है. उन्होंने बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अमेरिका और रूस के रणनैतिक परमाणु हथियारों पर लगी बाध्यकारी सीमाओं के समाप्त होने पर चिन्ता जताई है.
गुरूवार को जीएमटी समयानुसार मध्यरात्रि को सन्धि की अवधि समाप्त होने के बाद, महासचिव द्वारा जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि दुनिया अब एक अज्ञात और अनिश्चित दौर में प्रवेश कर रही है.
ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिका और रूस के परमाणु हथियारों पर अब कोई भी क़ानूनी रूप से बाध्यकारी सीमा शेष नहीं रह गई है. इन दोनों देशों के पास मिलकर दुनिया के अधिकांश परमाणु हथियार हैं.
उन्होंने कहा कि पिछले आधी सदी से भी अधिक समय में, पहली बार दुनिया ऐसे हालात का सामना कर रही है, जहाँ इन दोनों देशों के रणनैतिक परमाणु हथियारों पर कोई भी बाध्यकारी सीमा लागू नहीं रह गई है.
वर्ष 2010 में, 'न्यू स्टार्ट' सन्धि पर हस्ताक्षर किए गए थे, और 2011 में यह लागू हुई थी. इसका औपचारिक नाम है: रणनैतिक आक्रामक हथियारों में और अधिक कटौती तथा उनकी सीमा तय करने से सम्बन्धित सन्धि.
इस सन्धि ने, प्रत्येक पक्ष के तैनात रणनैतिक परमाणु वारहेड की संख्या 1,550 तक सीमित की थी और अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों व भारी बम गिराने वाली परिवहन प्रणालियों पर भी सीमाएँ निर्धारित की.
इस समझौते में सत्यापन उपाय भी शामिल थे, जैसे डेटा का आदान-प्रदान, सूचनाएँ और सम्बन्धित स्थलों पर निरीक्षण, ताकि अविश्वास कम हो और ग़लत आकलन से बचा जा सके.
स्थिरता क़ायम रखने का तरीक़ा
महासचिव ने कहा कि शीत युद्ध के दौर की रणनैतिक हथियार सीमांकन वार्ताओं (Strategic Arms Limitation Talks) से लेकर न्यू स्टार्ट (New START) तक, दशकों से चल रहे परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते किसी आपदा को रोकने और वैश्विक परमाणु भंडार को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं.
उन्होंने कहा, "शीत युद्ध के दौरान और उसके बाद, इन सरकारों के बीच परमाणु हथियार नियंत्रण ने आपदा को रोकने में मदद की है." ऐसे ढाँचे “स्थिरता का निर्माण करते हैं” और “विनाशकारी ग़लत आकलन को रोकते हैं.”
यूएन प्रमुख ने चेतावनी दी है कि इस नियंत्रण प्रणाली का पतन विशेष रूप से एक ख़तरनाक समय में हो रहा है, जब भूराजनैतिक तनाव बढ़ रहे हैं और परमाणु हथियार के इस्तेमाल का जोखिम दशकों में सबसे अधिक है.
नए दृष्टिकोण का अवसर...
लेकिन, महासचिव गुटेरेश ने यह भी कहा कि यह स्थिति सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव के मद्देनज़र हथियार नियंत्रण पर नए दृष्टिकोण अपनाने का अवसर भी प्रदान करती है.
उन्होंने अमेरिका और रूस के राष्ट्रपतियों के ऐसे बयान का स्वागत किया, जिन्होंने फिर सेपरमाणु हथियार दौड़ के ख़तरों को स्वीकार किया है.
महासचिव ने कहा, "दुनिया अब रूसी महासंघ और संयुक्त राज्य अमेरिका से उम्मीद करती है कि वे अपने शब्दों को कार्य में बदलें."
उन्होंने दोनों पक्षों से बिना विलम्ब वार्ता में लौटने और ऐसे उत्तराधिकारी ढाँचे पर सहमति बनाने का आह्वान किया, जो सत्यापन योग्य सीमाएँ स्थापित करे, जोखिम कम करे और वैश्विक सुरक्षा को मज़बूत करे.