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दक्षिण सूडान: WFP राहत क़ाफ़िले पर हमले व लूटपाट के बाद, सहायता प्रयास स्थगित

दक्षिण सूडान के रेन्क में स्थापित किए गए एक आवागमन केन्द्र पर सूडान से वहाँ पहुँचने वाले विस्थापित.
© UNHCR/Charlotte Hallqvist
दक्षिण सूडान के रेन्क में स्थापित किए गए एक आवागमन केन्द्र पर सूडान से वहाँ पहुँचने वाले विस्थापित.

दक्षिण सूडान: WFP राहत क़ाफ़िले पर हमले व लूटपाट के बाद, सहायता प्रयास स्थगित

शान्ति और सुरक्षा

दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बीते सप्ताहांत, अपर नाइल प्रान्त में एक नदी से होकर गुज़र रहे अपने क़ाफ़िले पर हुए हमलों की कड़ी निन्दा की है, और प्रभावित इलाक़े में अपनी सभी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है.

WFP ने स्पष्ट किया है कि उसके कर्मचारियों, साझेदारों और ठेकेदारों की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक, और लूटी गई राहत सामग्री की बरामदगी के लिए सरकार द्वारा ठोस क़दम उठाए जाने तक, संगठन अपना कामकाज बहाल नहीं करेगा. 

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खाद्य संगठन के अनुसार, 30 जनवरी से 1 फरवरी के बीच, 1,500 मीट्रिक टन से अधिक खाद्य सहायता लेकर जा रहे 12 नावों के एक क़ाफ़िले पर अनेक बार हथियारबन्द युवकों ने हमला किया.

इस क़ाफ़िले में साझेदार संगठनों के लिए भेजी जा रही गै़र-खाद्य सामग्री भी शामिल थी, जो बाद में बैलिएट काउंटी के विभिन्न इलाक़ों में स्थानीय समुदाय द्वारा लूट ली गई.

सहायताकर्मियों पर हमले 'अस्वीकार्य'

यूएन खाद्य एजेंसी ने बताया कि मानवीय सहायता की सुरक्षित आवाजाही के लिए स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा आश्वासन मिलने के बावजूद रात के समय लूट की इन घटनाओं को अंजाम दिया गया और काउंटी प्रशासन की ओर से सुरक्षा के लिए कोई क़दम नहीं उठाए गए.

WFP ने इस घटना पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि मानवीय सहायताकर्मियों पर हमले, किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं.

संगठन ने सभी युद्धरत पक्षों मानवीय कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका का सम्मान करने और राहत कार्यों से जुड़ी सुविधाओं तथा संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.

चुनौतियों से जूझ रहा देश

विश्व के सबसे युवा देश, दक्षिण सूडान ने वर्ष 2011 में सूडान से स्वाधीनता हासिल की थी, मगर उसके बाद से ही यह देश, टकराव और अस्थिरता से जूझता रहा है. वर्ष 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्य बलों और पूर्व उप राष्ट्रपति रिएक मचार के समर्थकों के बीच गृहयुद्ध भड़क उठा था. 

कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद, 2018 में नाज़ुक हालात में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई.

इस समझौते के बाद, फ़रवरी 2020 में एक संक्रमणकालीन सरकार का गठन किया गया था, लेकिन उसके बाद से ही चुनाव स्थगित होते रहे हैं और सरकार और विरोधी पक्षों के बीच टकराव भड़का है.

मानवीय राहत कार्य पर असर

इस बीच, WFP ने जोंगलेई प्रान्त में हाल के दिनों में हुई घटनाओं पर भी गम्भीर चिन्ता जताई है, जहाँ सरकारी बलों और विपक्षी समूहों के बीच सशस्त्र टकराव के कारण मानवीय सहायता प्रतिष्ठानों को भारी नुक़सान पहुँचा है. इस दौरान, अनेक क्षेत्रों में गोदाम और स्वास्थ्य केन्द्रों समेत कई महत्वपूर्ण ढाँचे बर्बाद हो गए हैं.

WFP के अनुसार, मानवीय सहायता पहुँचाने में बाधाओं और राहत क़ाफ़िलों पर हो रहे हमलों, देश में 42 लाख से अधिक सबसे अधिक कमज़ोर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों तक सहायता पहुँचाने की उसकी क्षमता को गम्भीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं. 

असुरक्षा के कारण यूएन कार्यक्रम को जोंगलेई प्रान्त में, बरसात के मौसम से पहले 12 हज़ार मीट्रिक टन खाद्य सामग्री की अग्रिम तैनाती की योजना भी रोकनी पड़ी है. दक्षिण सूडान में WFP, आपातकालीन खाद्य सहायता, पोषण कार्यक्रम, स्कूल भोजन, आजीविका समर्थन और नकद आधारित सहायता उपलब्ध कराता है.

जोंगलेई प्रान्त में बिगड़ती परिस्थितियों का असर वहाँ रह रहे उन 20 लाख लोगों पर होने की आशंका है, जिन्हें सुरक्षित आश्रय व भोजन की तलाश में विस्थापित होना पड़ सकता है.

60 प्रतिशत आबादी के पहले से ही आगामी दिनों में संकट स्तर पर भूख की चपेट में आने की आशंका है. देश की आबादी क़रीब 1 करोड़ 30 लाख है, जिनमें 93 लाख लोगों को, किसी न किसी प्रकार की मानवीय सहायता की ज़रूरत है.