वैश्विक सुरक्षा में भारतीय शान्तिरक्षकों की अहम भूमिका - यूएन अधिकारी
भारत में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर स्टेफ़ान प्रीज़नर ने कहा है कि भारतीय शान्तिरक्षक, वैश्विक शान्ति और सुरक्षा को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने यह बात अनेक देशों में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियानों में शान्तिरक्षकों की तैनाती से पहले आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही है.
नई दिल्ली स्थित संयुक्त राष्ट्र शान्ति स्थापना केन्द्र में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पूर्व-तैनाती प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को सम्बोधित करते हुए, रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर स्टेफ़ान प्रीज़नर ने संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियानों में भारत के लम्बे और उल्लेखनीय योगदान की सराहना की.
उन्होंने शान्तिरक्षा के लिए तैयार भारतीय अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि, “शान्ति स्थापना संयुक्त राष्ट्र के मूल उद्देश्य को जीवन्त बनाती है. शान्तिरक्षा अभियानों में सेवा देकर आप संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल्यों के वास्तविक संरक्षक बनते हैं. आपकी तैनाती भारत और संयुक्त राष्ट्र, दोनों के लिए गर्व की बात है.”
इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियानों में तैनाती की तैयारी कर रहे 35 भारतीय अधिकारी शामिल हुए, जिनके साथ भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लैफ़्टिनेंट जनरल विपुल सिंघल और लैफ़्टिनेंट जनरल एम पी सिंह भी मौजूद थे.
उन्होंने कहा, “पिछले सात दशकों से भी अधिक समय से, संयुक्त राष्ट्र शान्ति स्थापना अभियानों ने जीवन बचाने, हिंसा कम करने और संघर्ष से उबर रहे देशों को सहारा देने में अहम भूमिका निभाई है.”
श्रेष्ठ योगदान
स्टेफ़ान प्रीज़नर ने कहा कि भारत, संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियानों में सैनिक भेजने वाले देशों में सबसे बड़े और निरन्तर योगदान देने वाले देशों में शामिल रहा है. वर्ष 1948 से अब तक, 2.75 लाख से अधिक भारतीय कर्मियों ने संयुक्त राष्ट्र के ध्वज तले सेवा दी है.
रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर ने शान्ति की स्थापना के दौरान अपने प्राण न्योछावर करने वाले भारतीय शान्तिरक्षकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका योगदान संयुक्त राष्ट्र के लिए निरन्तर प्रेरणा का स्रोत है.
उन्होंने सचेत किया कि आज के शान्ति स्थापना अभियान पहले से कहीं अधिक जटिल हो गए हैं. इनमें सशस्त्र समूहों, आपराधिक नैटवर्क, भूराजनैतिक विभाजन, तथा ग़लत सूचना व दुष्प्रचार जैसी चुनौतियाँ शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षक, संघर्ष-प्रभावित देशों में नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता पहुँचाने, राजनैतिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने और देशों में सत्ता बहाली में लगातार अहम भूमिका निभा रहे हैं.
स्टेफ़ान प्रीज़नर के अनुसार, आधुनिक शान्ति स्थापना केवल युद्धविराम की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस समझ पर आधारित है कि शान्ति, विकास और मानवाधिकार एक-दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते.
उन्होंने शान्ति स्थापना अभियानों में महिलाओं की भागेदारी के महत्व पर भी ज़ोर देते हुए कहा कि लैंगिक रूप से विविध टुकड़ियाँ, यूएन मिशनों को अधिक प्रभावी बनाती हैं और स्थानीय समुदायों का भरोसा मज़बूत करती हैं.