ग़ाज़ा: रफ़ाह चौकी पर सीमित आवाजाही से बंधी आशा, मगर व्यापक आशंकाएँ भी
ग़ाज़ा पट्टी के दक्षिणी हिस्से में स्थित रफ़ाह चौकी, एक वर्ष बाद सोमवार को फिर से खोल दी गई है. फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन सहायता एजेंसी (UNRWA) ने बताया कि इस अवसर पर वहाँ मौजूद लोगों में उम्मीद नज़र आई लेकिन उनके मन में आशंका भी बनी हुई है.
रफ़ाह में, मिस्र की सीमा से लगी हुई यह एकमात्र चौकी है, जोकि गम्भीर रूप से बीमार हज़ारों फ़लस्तीनियों के लिए एक जीवनरेखा है. इसी रास्ते से होकर उन्हें बेहतर इलाज के लिए यहाँ से बाहर ले जाया जाता है.
मगर, रफ़ाह सीमा चौकी के खुलने से ठीक पहले, बीते सप्ताहांत, इसराइली हवाई हमलों में अनेक आम लोगों के मारे जाने की ख़बर थी, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने अपनी चिन्ता व्यक्त की है.
7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों ने आतंकी हमले किए थे, जिसके बाद इसराइल ने बड़े पैमाने पर ग़ाज़ा पट्टी में अपनी सैन्य कार्रवाई शुरू की. इसके बाद, पिछले वर्ष अक्टूबर में संयुक्त राज्य अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम के पहले चरण को लागू करने पर सहमति बनी थी.
ग़ाज़ा में UNRWA मामलों के कार्यवाहक निदेशक सैम रोज़ ने बीबीसी के साथ एक बातचीत में बताया कि एक ओर जहाँ रफ़ाह चौकी का खुलना सकारात्मक प्रगति है, वहीं बीते 24 घंटों में, युद्धविराम के दौरान हवाई हमले में 30 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं.
उन्होंने कहा कि जो अन्तरराष्ट्रीय संगठन अपना कार्य करने में सक्षम है, और जिनकी यहाँ ज़रूरत है, उन्हें बड़े अवरोधों से जूझना पड़ रहा है. इसी वजह से, ग़ाज़ा में फ़लस्तीनी बेहद आशंकित हैं.
ग़ाज़ा में भय व अनिश्चितता के इस माहौल में, यूएन एजेंसी ज़रूरतमन्द समुदायों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने में जुटी है. “पहुँच सीमित है, संरक्षण सम्बन्धी चिन्ताएँ हैं और मानवीय सहायता आवश्यकताएँ बहुत अधिक है और इस बीच, राहत अभियान के रास्ते में रोड़े हैं.”
सीमित आवाजाही
पिछले वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति ने सितम्बर में ग़ाज़ा में शान्ति स्थापना के लिए अपनी 20-सूत्री योजना को पेश किया था, जिसके कुछ समय बाद वहाँ युद्धविराम की घोषणा कर दी गई थी.
फ़िलहाल, इसराइल ने हर दिन, ग़ाज़ा से केवल 50 फ़लस्तीनियों को ही बाहर जाने और प्रवेश करने की अनुमति देने की बात कही है. अन्तरराष्ट्रीय समाचार माध्यमों के अनुसार, केवल पैदल ही इस रास्ते का इस्तेमाल किया जा सकेगा.
इस सीमा चौकी पर आवाजाही को, योरोपीय संघ की देखरेख में मिस्र के समन्वय से सम्भव बनाया जाएगा. ग़ाज़ा में वापसी केवल उन्हीं निवासियों के लिए सम्भव होगी, जो युद्ध के दौरान, इसराइली सुरक्षा बलों द्वारा अनुमति मिलने के बाद ही यहाँ से बाहर गए थे.
इस प्रक्रिया के तहत, पहले रफ़ाह चौकी पर योरोपीय संघ द्वारा द्वारा जाँच की जाएगी और फिर इसराइली सेना के नियंत्रण वाले इलाक़े में दूसरी बार शिनाख़्त व जाँच से होकर गुज़रना पड़ेगा.
यूएन मानवतावादी कार्यालय ने इस अहम सीमा चौकी को खोले जाने का स्वागत करते हुए ध्यान दिलाया कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप, आम नागरिकों को स्वैच्छिक रूप से ग़ाज़ा से बाहर जाने और लौटने की अनुमति दी जानी चाहिए.
पिछले कुछ दिनों में, संयुक्त राष्ट्र ने सड़क मार्ग की स्थिति का आकलन करने के लिए एक मिशन को पूरा किया है. यूएन विकास कार्यक्रम (UNDP) ने ग़ाज़ा में वापिस लौटने वाले लोगों के लिए बस की व्यवस्था की है, जहाँ उनके लिए भोजन, इंटरनैट, मनोसामाजिक सेवा समेत अन्य प्रकार के समर्थन की भी व्यवस्था है.
मरीज़ों के लिए बेहतर इलाज
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी चिकित्सा कारणों से मरीज़ों को बाहर भेजे जाने के प्रयासों को अपना समर्थन दिया. कुछ मरीज़ और उनके साथी, ग़ाज़ा से सीधे मिस्र तक पहुँचने में सफल रहे, जबकि अन्य को इसराइली नियंत्रण वाली केरेम शलोम सीमा चौकी से होकर गुज़रना पड़ा.
दक्षिणी ग़ाज़ा में अल अमल अस्पताल के बाहर अहाते में कई परिवार अपने बीमार मरीज़ों व उनके तिमारदारों को विदा करने के लिए एकत्र हुए.
यूएन न्यूज़ एक संवाददाता ने उन बसों को जाते हुए देखा, जिनमें लोग इस आशा के साथ जा रहे थे कि वे अब पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर ही वापिस लौटेंगे. व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले एक बच्चे, युसूफ़ अवाद ने उम्मीद जताई कि वह फिर से चलने और खेलने के लिए तैयार हो सकेगा.
युसूफ़ ने यूएन न्यूज़ को बताया कि वह उपचार के लिए यात्रा करना चाहता है और वापिस लौटने पर अन्य बच्चों की तरह चलना चाहता है.
हज़ारों, अब भी प्रतीक्षा में
लेकिन बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी हताश भी हैं, और उन्होंने अस्पताल के नज़दीक सोमवार को एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया. व्हीलचेयर में बैठे लोगों ने ग़ाज़ा से बाहर भेजे जाने वाले लोगों की दैनिक संख्या बढ़ाने की मांग की.
फ़रीद अल-क़स्सास नामक एक घायल व्यक्ति ने बताया कि, “हम युद्ध शुरू होने के बाद से ही इस चौकी के खुलने की प्रतीक्षा करते रहे हैं, और कई अन्य की तरह, हमारे भाग्य ने हमारा साथ नहीं दिया है.”
“हमें उम्मीद है कि हर कोई हमारी बात सुनेगा और जितने भी मरीज़ हैं, उन्हें बचाया जाएगा.”
रफ़ाह सीमा चौकी के ज़रिए, बेहतर इलाज के लिए अन्तिम बार किसी मरीज़ को मई 2024 में बाहर भेजा गया था. फ़िलहाल, ग़ाज़ा में 18.5 हज़ार मरीज़ हैं, जिनमें 4 हज़ार बच्चे हैं और वे बाहर उपचार की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
इस वजह से, यूएन सदस्य देशों से और अधिक संख्या में मरीज़ों को स्वीकार करने का आग्रह किया गया है, ताकि वे अपने लिए ज़रूरी उपचार को हासिल कर सकें.