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रेडियो उड़ान: उम्मीद, हौसले और सम्मान की आवाज़

© Radio Udaan
रेडियो उड़ान की शुरुआत इस सोच के साथ हुई कि विकलांगता से जूझ रहे लोगों को सही जानकारी, सहयोग और अपनी आवाज़ रखने का मंच मिल सके.

रेडियो उड़ान: उम्मीद, हौसले और सम्मान की आवाज़

अंशु शर्मा
संस्कृति और शिक्षा

आवाज़ एक ऐसा सशक्त माध्यम हैजो लोगों को जोड़ता है और बदलाव की राह दिखाता है. और इसका सबसे प्रभावी ज़रिया रेडियो है. शुक्रवार, 13 फ़रवरी, को 'विश्व रेडियो दिवस' पर बात एक ऐसे रेडियो स्टेशन की, जो मुख्यत: दृष्टिबाधित द्वारा संचालित है और जानकारी एवं आत्मविश्वास के ज़रिए विकलांगजन को सशक्त बनाने के प्रयासों में जुटा है. 

पंजाब के पठानकोट के पास एक गाँव में रहने वाले दानिश महाजन की 14 साल की उम्र में आँखों की रौशनी चली गई. इसके बाद उनके जीवन में ठहराव आ गया. अगले चार साल उन्होंने घर पर बिताए, इस जानकारी के बिना कि दृष्टिबाधित लोगों के लिए शिक्षा, पुनर्वास या रोज़गार के अवसर भी मौजूद हैं.

दानिश महाजन कहते हैं, “अगर किसी ने समय पर मुझे बताया होता कि मैं आगे क्या कर सकता हूँ, तो मेरे चार साल बच सकते थे.”

इसी अनुभव से 2014 में रेडियो उड़ान की शुरुआत हुई. 'उड़ान सशक्तिकरण ट्रस्ट' के तहत शुरू किया गया यह भारत का पहला ऑनलाइन रेडियो स्टेशन है, जिसे पूरी तरह दृष्टिबाधित रेडियो जॉकी और टीम सदस्य संचालित करते हैं.

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रेडियो उड़ान की टीम में लगभग 30 सक्रिय स्वयंसेवक हैं. इनमें ज़्यादातर विकलांगजन हैं, जबकि कुछ गैर-विकलांग सदस्य भी शामिल हैं.

समावेशी मंच

रेडियो उड़ान आज 120 देशों में सुना जाता है और इसके 1.25 लाख से अधिक मासिक श्रोता हैं. इसके कार्यक्रम, जिन्हें दृष्टिबाधित रेडियो जॉकी और स्वयंसेवक तैयार करते हैं, विकलांग अधिकारों, सरकारी योजनाओं, तकनीक, शिक्षा और रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े विषयों पर केन्द्रित होते हैं.

दानिश महाजन कहते हैं, “समस्या क्षमता की नहीं थी, बल्कि जानकारी तक पहुँच की थी. सही समय पर जानकारी न मिलने से लोग अपने जीवन के कई साल खो देते हैं.”

सर्वजन तक पहुँच 

रेडियो उड़ान ने सोच-समझकर ऑनलाइन रेडियो का रास्ता चुना. पारम्परिक सामुदायिक रेडियो की भौगोलिक पहुँच सीमित होती है, जबकि विकलांगजन अलग-अलग क्षेत्रों में फैले होते हैं. दानिश महाजन के अनुसार, इंटरनैट रेडियो ने कम संसाधनों में व्यापक पहुँच सम्भव बनाई है.

सबसे अहम बात यह है कि रेडियो पूरी तरह आवाज़ पर आधारित माध्यम है, जो दृष्टिबाधित श्रोताओं के लिए सबसे सुलभ है.

श्रोता, रेडियो उड़ान को न सिर्फ़ ऑनलाइन और यूट्यूब पर सुन सकते हैं, बल्कि कम या बिना इंटरनैट वाले इलाक़ों में फ़ोन आधारित सेवाओं के ज़रिए भी सुन सकते हैं, ताकि कम सम्पर्क वाले इलाक़ों तक भी पहुँच बनाई जा सके.

Jyoti Malik is a teacher by profession and the co-founder and radio manager of Radio Udaan.
© Radio Udaan
पेशे से अध्यापिका, ज्योति मलिक, रेडियो उड़ान की सह-संस्थापक व रेडियो मैनेजर हैं.

भरोसे की आवाज़

भारत में मुख्यधारा के मीडिया में विकलांगजन के अनुभवों को बहुत कम ही केन्द्र में रखा जाता है. रेडियो उड़ान हिन्दी में और सरल, सुलभ भाषा में कार्यक्रम तैयार कर इस कमी को पूरा करता है.

इसका सबसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक ‘बदलता दौर’ पिछले 12 वर्षों से लगातार प्रसारित हो रहा है और इसके 1,500 से अधिक एपिसोड पूरे हो चुके हैं. इस साप्ताहिक कार्यक्रम में सफलता की कहानियाँ, क़ानूनी अपडेट, सरकारी नीतियाँ और व्यावहारिक जानकारी साझा की जाती है, ख़ास तौर पर विकलांगता सम्बन्धी क़ानून से जुड़े विषयों पर.

दानिश महाजन ने क़ानून को समझाने के लिए अध्यायवार ऑडियो श्रृँखला भी तैयार की है, ताकि श्रोता ज़रूरत के अनुसार किसी भी प्रावधान की जानकारी आसानी से सुन सकें.

वे कहते हैं, “लोग तकनीकी शब्द नहीं चाहते. वे अपनी भाषा में, साफ़ और सरल जानकारी चाहते हैं.”

आत्मविश्वास और पहचान

कई लोगों के लिए रेडियो उड़ान जीवन में बदलाव लाने वाला मंच बना है.

रेडियो उड़ान की सह-संस्थापक और रेडियो मैनेजर ज्योति मलिक कहती हैं कि इस मंच ने उन्हें आत्मविश्वास, नए कौशल और एक पहचान दी. वे कहती हैं, “आज लोग मुझे मेरी आवाज़ से पहचानते हैं. यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है.”

वे एक श्रोता को याद करती हैं, जिनकी हाल ही में दृष्टि चली गई थी. ज्योति बताती हैं, “हमारे तकनीकी ट्यूटोरियल और व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम सुनकर उन्होंने कहा कि उनमें दोबारा जीने की इच्छा जगी. यह पल मेरे लिए बहुत भावुक था.”

रेडियो उड़ान की रेडियो जॉकी नमिता बताती हैं कि इस मंच से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया. वे कहती हैं, “यहाँ मैंने एडिटिंग, वॉयस-ओवर और लोगों से जुड़ना सीखा. श्रोताओं से मिला प्यार और अपनी नई पहचान मेरे लिए बहुत मायने रखती है.”

रेडियो उड़ान की निदेशक और तेलंगाना में कार्यरत सरकारी अधिकारी मीनल सिंघवी कहती हैं, “रेडियो उड़ान ने मुझे यह भरोसा दिया कि दृष्टिबाधिता मेरी सीमा नहीं है. आज मैं रेडियो उड़ान की वैबसाइट सम्भालती हूँ, 500 से अधिक तकनीकी ट्यूटोरियल बना चुकी हूँ और हज़ारों लोगों को प्रशिक्षण दे चुकी हूँ.”

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© UN India
भारत में संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में भाग लेते रेडियो उड़ान के संस्थापक दानिश महाजन.

प्रसारण से परे

रेडियो उड़ान के प्रयास, केवल रेडियो कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है. इसने हज़ारों घंटे की विकलांगजन-केन्द्रित सामग्री तैयार की है, और बड़ी संख्या में लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर सहायता भी प्रदान की गई है, जिसमें क़ानूनी मदद, परामर्श, तकनीकी प्रशिक्षण और शिक्षा से जुड़ाव शामिल है.

इसके अलावा, इस मंच के ज़रिए उड़ान आइडल, आरजे हंट, मैट्रिमोनी मीट और नेशनल क्विज़ जैसे राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों के ज़रिये प्रतिभा और आत्मसम्मान को बढ़ावा मिला है.

दानिश महाजन कहते हैं, “ये मंच केवल प्रतिभा दिखाने के लिए नहीं हैं. ये सोच बदलते हैं और रोज़गार के नए अवसर भी खोलते हैं.”

समावेशन का अर्थ 

रेडियो उड़ान में नेतृत्व विकलांगजन करते हैं, लेकिन इसमें ग़ैर-विकलांगजन भी टीम का हिस्सा हैं. दानिश महाजन बताते हैं कि यह समझ समय के साथ आई.

“अगर हमें मुख्यधारा में जगह बनानी है, तो ख़ुद को अलग नहीं रखना चाहिए. सच्चा समावेशन एक साथ मिलकर काम करने से ही आता है.”

आज रेडियो उड़ान की टीम में लगभग 30 सक्रिय स्वैच्छिक कार्यकर्ता हैं, जिनमें ज़्यादातर विकलांगजन हैं, जबकि कुछ ग़ैर-विकलांग सदस्य भी हैं, जो कार्यक्रम, तकनीक, पहुँच और प्रशिक्षण जैसे कामों में योगदान देते हैं.

Radio Director Meenal Singhvi says, “Radio Udaan gave me the confidence that visual impairment is not my limit.”
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रेडियो डायरेक्टर मीनल सिंघवी कहती हैं, “रेडियो उड़ान ने मुझे यह विश्वास दिया कि दृष्टिहीनता मेरी सीमा नहीं है.”

पहचान और प्रभाव

रेडियो उड़ान के काम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. 2024 में रेडियो उड़ान को एनएबी सरोजिनी त्रिलोक नाथ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वहीं, दानिश महाजन को भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार प्रदान किया गया.

लेकिन दानिश के लिए सफलता का मतलब कुछ और है. वे कहते हैं, “जब कोई यह बताता है कि सही जानकारी मिलने से उसके जीवन के साल बच गए, वही हमारे लिए असली पुरस्कार है.”

विश्व रेडियो दिवस पर, रेडियो उड़ान यह याद दिलाता है कि रेडियो आज भी समावेशन का एक शक्तिशाली माध्यम है. यह केवल आवाज़ नहीं पहुँचाता, बल्कि सम्मान, भरोसा और उम्मीद भी देता है.