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'अदृश्य हाईवे': समुद्री गहराइयों में विशाल केबल नैटवर्क, डिजिटल दुनिया की धड़कन

समुद्र में लाल बोया मार्करों की एक पंक्ति, दूर में एक केबल बिछाने वाले जहाज और छोटी नावों के साथ, अंतर्राष्ट्रीय पनडुब्बी केबल प्रतिरोधी शिखर सम्मेलन 2026 का प्रतिनिधित्व करती है।
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समुद्र में एक जहाज़ के ज़रिए पनडुब्बी केबल के नैटवर्क को बिछाया जा रहा है.

'अदृश्य हाईवे': समुद्री गहराइयों में विशाल केबल नैटवर्क, डिजिटल दुनिया की धड़कन

सचिन गौड़
आर्थिक विकास

हर दिन, हम अनगिनत ईमेल भेजते हैं, वीडियो कॉल के ज़रिए बातचीत, गूगल सर्च करते हैं, मनोरंजन के लिए यूट्यूब और नैटफ़्लिक्स जैसी स्ट्रीमिंग सेवाओं का सहारा लेते हैं और बैंकिंग लेनदेन भी करते हैं. इन सभी गतिविधियों में पलक झपकते ही डेटा का आदान-प्रदान हो जाता है और यह हमारे जीवन में एक सामान्य सी बात हो गई है. लेकिन हम शायद ही ठहर कर कभी उस व्यवस्था के बारे में सोचते हैं जो इसे सम्भव बनाती है: महासागरों की गहराइयों में बिछाए गए केबल का एक विशाल नैटवर्क, जिसने ख़ामोशी के साथ पूरी दुनिया को एक-दूसरे से जोड़ दिया है. 

अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के उपमहासचिव टोमास लामानुस्क्स ने इसी नैटवर्क को और सुदृढ़ बनाने के लिए पुर्तगाल में हो रही एक शिखर बैठक से पहले, यूएन न्यूज़ के साथ एक बातचीत में बताया कि आधुनिक सूचना युग में, समुद्र के भीतर बिछे केबल हमारी डिजिटल कनेक्टिविटी की एक मज़बूत बुनियाद बन गए हैं. 

वैश्विक अर्थव्यवस्था में हज़ारों अरब डॉलर का लेनदेन व सूचना की निरन्तर सुलभता, इसी के ज़रिए सम्भव है. “अन्तरराष्ट्रीय इंटरनैट ट्रैफ़िक का लगभग 99 फ़ीसदी इन्हीं पनडुब्बी केबल (submarine cables) से होकर गुज़रता है. यहाँ तक की मैं और आप जो बात कर रहे हैं, वह भी इन्हीं केबल के ज़रिए पहुँचाई जा रही है.”

“आम तौर पर, लोगों को उन सुलभता बिन्दुओं (access points) के बारे में तो पता है, जिन्हें वो देख सकते हैं, जैसेकि मोबाइल नैटवर्क, सैटेलाइट और फ़िक्स्ड इंटरनैट. लेकिन जो बुनियादी ढाँचे उन्हें आपस में एक साथ जोड़ता है, वो पनडुब्बी केबल का विशाल नैटवर्क ही है—हमारा डिजिटल हाईवे.”

दूरसंचार मामलों के लिए यूएन विशेषीकृत एजेंसी, के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जैसे-जैसे डिजिटल कनेक्टिविटी पर हमारी निर्भरता बढ़ती जा रही है, इस केबल नैटवर्क को सुदृढ़ता प्रदान करना और उसके रखरखाव के लिए सामूहिक रणनीतियों को अपनाया जाना अहम है. पुर्तगाल के पोर्तो शहर में, 2-3 फ़रवरी 2026 को, ‘पनडुब्बी केबल नैटवर्क’ को मज़बूती देने पर केन्द्रित अन्तरराष्ट्रीय शिखर बैठक में इसी अहम विषय में चर्चा होगी.

ये अदृश्य हाईवे, फ़ाइबर-ऑप्टिक तारों से मिलकर बने हैं, जिन्हें केबल बिछाने वाले जहाज़ों के ज़रिए, महासागर की सतह के सैकड़ों मीटर नीचे रखा जाता है, और अलग-अलग स्थानों पर ‘लैंडिंग प्वाइंट’ से जोड़ा जाता है.

डेटा के त्वरित आदान-प्रदान का नैटवर्क

संचार केबल नैटवर्क के ज़रिए, दुनिया के विभिन्न हिस्सों को एक दूसरे से जोड़ना कोई नई बात नहीं है. वर्ष 1850 में, इंग्लैंड और फ़्राँस को पहली बार एक पनडुब्बी टैलीग्राफ़ केबल के ज़रिए जोड़ा गया था.

उसके बाद से, टैक्नॉलॉजी में निरन्तर सुधार आय़ा है. टैलीग्राफ़ सेवाओं से टैलीफ़ोन नैटवर्क से होता हुआ यह सफ़र अब फ़ाइबर ऑप्टिक केबल की मदद से ‘हाईस्पीड इंटरनैट’ तक पहुँच गया है. सैकड़ों टैराबिट्स (terabits) डेटा, एक सेकेंड में इन केबल के ज़रिए पहुँचाया जा सकता है.

विश्व भर में, फ़िलहाल 500 कमर्शियल पनडुब्बी केबल हैं, जो महाद्वीपों, देशों, अर्थव्यवस्थाओं, बाज़ारों और घर-परिवारों को आपस में जोड़ते हैं. अपेक्षाकृत पतले और बाग़ों में पानी देने के लिए पानी के पाइप (garden hose) के आकार वाले ये केबल, 17 लाख किलोमीटर तक फैले हुए हैं. ये इतनी लम्बाई है कि इससे पृथ्वी को कई बार लपेटा जा सकता है.

इन्हें बिछाने के लिए, पहले समुद्री तल का सर्वेक्षण किया जाता है, सबसे कम जोखिम वाले और पर्यावरण को कम प्रभावित करने वाले मार्ग का पता लगाया जाता है. इसके बाद, विशेष जहाज़ों के ज़रिए विशाल पैमाने पर फ़ाइबर ऑप्टिक केबल को डाला जाता है. 

एक पनडुब्बी केबल को एक बड़े औद्योगिक रील पर लपेटा जाने का एक नज़दीकी दृश्य, जो इसके तैनाती में इस्तेमाल की जाने वाली केबल और मशीनरी के जटिल विवरणों को उजागर करता है।
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पनडुब्बी केबल को समुद्री तल पर बिछाने से पहले एक औद्योगिक रील पर लपेटा जा रहा है.

दुर्घटनाओं, आपदाओं के कारण व्यवधान

ये इंटरनैट केबल हमारी वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते जा रहे हैं. और इसलिए, डेटा के प्रवाह में यदि किसी भी प्रकार का व्यवधान होता है तो जल्द ही इसके असर दिखाई देने लगते हैं.

आर्थिक गतिविधियाँ व लेनेदेन, आपात व टैक्नॉलॉजी सेवाएँ, सुरक्षा प्रणाली, अरबों लोगों के लिए इंटरनैट कनेक्टिविटी प्रभावित होती है. हर वर्ष, विश्व भर में, आम तौर पर ऐसे व्यवधान की 150 से 200 घटनाएँ दर्ज की जाती हैं, यानि प्रति सप्ताह 3 से 4 मामले. 

ITU उपमहासचिव टोमास लामानुस्क्स ने ध्यान दिलाया कि हाल के वर्षों में, लाल सागर जल क्षेत्र से लेकर पश्चिम व पूर्व अफ़्रीका में कई बड़े व्यवधान दर्ज किए गए हैं. वर्ष 2024 में, लाल सागर में पनडुब्बी केबल को क्षति पहुँचने से योरोप व एशिया के बीच लगभग 25 फ़ीसदी डेटा ट्रैफ़िक प्रभावित हुआ था.

भूकम्प, समुद्री की सतह के नीचे भूस्खलन, और ज्वालामुखी विस्फोट केबल नैटवर्क के पूर्ण या आंशिक रूप से ठप होने की वजह हो सकते हैं. हालांकि, आँकड़े दर्शाते हैं कि 80 प्रतिशत मामलों के पीछे, मानवीय गतिविधियाँ ही ज़िम्मेदार हैं. जहाज़ों द्वारा ग़लत ढंग से लंगर डालने या मछली पकड़ने के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले बड़े जहाज़ों से नुक़सान. 

टोमास लामानुस्क्स ने द्वीपीय देश टोंगा का उदाहरण दिया, जहाँ भूकम्प, ज्वालामुखी विस्फोट और ग़लत ढंग से लंगर डाले जाने की वजह से, 2019 के बाद से अब तक तीन बड़े व्यवधान दर्ज किए जा चुके हैं. इन दूरदराज़ वाले क्षेत्रों में केबल नैटवर्क में विविधता नहीं है और इसलिए जब किसी एक केबल को नुक़सान पहुँचता है तो एक बड़े क्षेत्र में इंटरनैट कनेक्टिविटी पर असर होता है.

“कल्पना कीजिए कि आप और आपका पूरा समुदाय एक सप्ताह तक ऑफ़लाइन हो जाएं, अतिआवश्यक सेवाएँ, जैसेकि डिजिटल स्वास्थ्य देखभाल, सूचना की सुलभता और शिक्षा को हासिल कर पाने में आप असमर्थ हों.”

“ज़रा कल्पना कीजिए, न्यूयॉर्क में स्टॉक ट्रेडर पर होने वाले असर की. यदि केबल में जाम या कोई हादसा होने की वजह से 1 मिलीसेकेंड की भी देरी हो जाए. हर एक क्षण मायने रखता है.”

अदृश्य हाईवे की मरम्मत 

रगड़ और समय के साथ स्वाभाविक रूप से कमज़ोर व छिन्न भिन्न होने के अलावा, इस केबल नैटवर्क के एक बड़े हिस्से को वर्ष 2000 के इर्दगिर्द, ‘डॉटकॉम बूम’ के दौरान बिछाया गया था, और इनकी औसत आयु क़रीब 25 वर्ष होती है. 

उपमहासचिव लामानुस्क्स ने बताया कि किसी हादसे के दौरान, इंजीनियर आम तौर पर तेज़ी से प्रभावित इलाक़े के बारे में सटीक सूचना पता लगाने में सक्षम होते हैं. “असल में मरम्मत कार्य सबसे जटिल हिस्सा भी नहीं है. अक्सर पेश आने वाली कठिनाई सभी ज़रूरी परमिट और लाइसेंस को जुटाना होता है, विशेष रूप से जब मामला अनेक या एक दूसरे से गुंथे हुए न्याय अधिकार क्षेत्र से हो.”

घटनास्थल और क्षति के दायरे को ध्यान में रखते हुए, केबल की मरम्मत के लिए जहाज़ों को रवाना किया जाता है और इस कार्य में दिनों, हफ़्तों व महीनों का समय लग सकता है. 

व्यस्त मार्गों पर ये जहाज़ नजदीक होने की वजह से जल्दी पहुँच सकते हैं, लेकिन दूरदराज़ के इलाक़ों में उनका पहुँच पाना समय ले सकता है. अनेक देशों में, ऐसे मामलों के लिए कोई स्पष्ट सम्पर्क बिन्दु नहीं है और इसलिए ऐसे प्रयासों का समय पर प्रबन्धन, चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

उच्च दृश्यता वाले जैकेट और हार्ड हैट में एक कार्यकर्ता पोर्टो, पुर्तगाल में एक बंदरगाह पर एक जहाज से एक बड़ी पनडुब्बी केबल की तैनाती का निर्देश देता है, अंतर्राष्ट्रीय पनडुब्बी केबल प्रतिरोधी शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान।
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एक जहाज़ पर मौजूद कर्मचारी पनडुब्बी केबल को बिछाने की प्रक्रिया में जुटे हैं.

लम्बी, ख़र्चीली प्रक्रिया

ITU के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मरम्मत से इतर किसी नए केबल को बिछाया जाना कई वर्षों तक चलने वाली एक परियोजना होती है, जिसमें लम्बा समय लग जाता है. 

“इसके लिए विस्तृत योजनाएँ बनाई जाती हैं, और यह महंगा ख़र्चीला भी है. जहाँ छोटे केबल की क़ीमत लाखों डॉलर में होती है, वहीं लम्बे केबल की लागत करोड़ों डॉलर तक पहुँच सकती है.”

इसके अलावा, यह प्रक्रिया विशेषीकृत सेवाओं पर भी निर्भर करती है, जैसेकि केबल बिछाने वाले जहाज़, और उनकी संख्या बहुत अधिक नहीं है. इसी तरह से, केबल प्रणाली को प्रदान करने वाले भी कम ही हैं, और इसलिए यह स्वाभाविक है कि सम्बन्धित सेवाओं को मुहैया कराने वाले व्यवसायों की कम संख्या ही है.

“हमारे पास यह क्षमता तो है, और इससे विश्व भर में निरन्तर विस्तार हो रहा है, लेकिन कोई ऐसा तौर-तरीक़ा नहीं है जिसे जल्दी और सरलता से लागू किया जा सके.”

अतीत में, अनेक सदस्य देशों और नियामन एजेंसियों ने अपने-अपने देशों के राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे पर ध्यान केन्द्रित किया है. लेकिन, जैसे-जैसे दुनिया आपस में जुड़ती जा रही है, उनकी ओर से अब वैश्विक ढाँचे से जुड़ने को भी प्राथमिकता दी जा रही है.

ITU की क्या भूमिका है?

डिजिटल टैक्नॉलॉजी के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी होने के तौर पर ITU, विश्व भर में पनडुब्बी केबल प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए निरन्तर प्रयासरत है. पारस्परिक सहयोग को प्रोत्साहन, मानकों की स्थापना, तकनीकी दिशानिर्देश के ज़रिए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है.

यूएन एजेंसी की प्राथमिकताओं में केबल नैटवर्क को मज़बूती देने वाले उपायों को विकसित करना, उनके रखरखाव व मरम्मत में सरलता लाना, और अधिक टिकाऊ तौर-तरीक़ों को अपनाना है. 

ITU के वरिष्ठ अधिकारी ने ध्यान दिलाया कि यदि हम 10-20 वर्ष पहले, इंटरनैट सेवा के इस्तेमाल के अपने अनुभव की तुलना, आज की स्थिति से करें तो यह समझा जा सकेगा कि तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. और इसकी वजह है टैक्नॉलॉजी के क्षेत्र में प्रगति.

“पिछले 40 वर्षों के दौरान, इन ऑप्टिकल केबल की क्षमता, हर वर्ष लगभग 40 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. यह बहुत तेज़ गति से हुई प्रगति है, जिससे इंटरनैट की क्षमता में वृद्धि को भी शक्ति मिल रही है.”

पनडुब्बी केबल पर अपने अन्तरराष्ट्रीय सलाहकार निकाय (International Advisory Body on Submarine Cable Resilience), के ज़रिए ITU, देशों की सरकारों, उद्योग जगत, और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाता है, ताकि सर्वोत्तम उपायों को विकसित किया जाए, केबल नैटवर्क के रखरखाव पर ध्यान केन्द्रित हो, नुक़सान पहुँचने की आशंका को कम किया जाए, और क्षति होने पर उसे जल्द बहाल किया जाए. इन प्रयासों को अन्तरराष्ट्रीय केबल संरक्षण समिति (ICPC) के सहयोग से संचालित किया जाता है.

एक वक्ता ने पुर्तगाल में आईटीयू द्वारा आयोजित पनडुब्बी केबल शिखर सम्मेलन में दर्शकों को संबोधित किया, मंच पर आईटीयू और एएनएसीओएम के लोगो प्रदर्शित किए गए।
© ITU/ M. Jacobson-Gonzalez

सुदृढ़ता शिखर बैठक 2026

वर्ष 2025 में, नाइजीरिया की राजधानी अबूजा में इस विषय पर पहली शिखर बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें देशों की सरकारों और विशेषज्ञों ने इस केबल नैटवर्क को, अति-महत्वपूर्ण वैश्विक डिजिटल बुनियादी ढाँचे के रूप में मान्यता दी, और इसके लिए पारस्परिक सहयोग को मज़बूती देने पर सहमति जताई.

पुर्तगाल के पोर्तो शहर में 2-3 फ़रवरी को आयोजित हो रही शिखर बैठक में उन सिफ़ारिशों पर चर्चा होगी, जिन्हें अबूजा बैठक के दौरान स्थापित कार्यसमूहों ने तैयार किया है. 

ये अनुशन्साएँ, मुख्य रूप से केबल की समय पर तैनाती, मरम्मत, जोखिम की शिनाख़्त व उसमें कमी लाने जैसे विषयों पर केन्द्रित हैं. साथ ही, नैटवर्क की सुदृढ़ता व कनेक्टिविटी को बढ़ाने और उसके भौगोलिक विस्तार को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा.

उपमहासचिव टोमास लामानुस्क्स ने कहा कि ITU का दायित्व स्वंय केबल की मरम्मत करना नहीं है. उसके बजाय, यूएन एजेंसी एक ऐसा अनुकूल माहौल तैयार करने में जुटी है, जिससे परमिट मिलने की अवधि कम हो जाए, स्पष्ट सम्पर्क बिन्दुओं को स्थापित किया जाए, हादसों या अनजाने में क्षति पहुँचने की घटनाओं में कमी लाई जाए और फिर जल्द मरम्मत का कार्य पूरा हो सके.

विश्व भर में, जैसे-जैसे कनेक्टिविटी और डेटा की मांग में अभूतपूर्व गति से उछाल आ रहा है, साझा प्रगति को ठोस आधार प्रदान करने और वैश्विक डिजिटल व्यवस्था को आकार देने में ये प्रयास अहम भूमिका निभाएंगे.