दक्षिण सूडान: ‘यूएन मिशन, चुनौतियों से घिरी आबादी के लिए, आशा की अन्तिम लौ’
दुनिया के सबसे युवा देश, दक्षिण सूडान में शान्ति समझौते पर मंडराते ख़तरे के बीच हिंसक टकराव फिर से भड़कने की आशंका बनी हुई है, वहीं स्थानीय समुदाय एक गहरे मानवीय संकट, बुनियादी ढाँचे की कमी और अभूतपूर्व बाढ़ जैसी चुनौतियो से भी जूझ रहे हैं. दक्षिण सूडान में यूएन शान्तिरक्षा मिशन (UNMISS) के फ़ोर्स कमांडर लैफ़्टिनेंट जनरल मोहन सुब्रमण्यन ने यूएन न्यूज़ हिन्दी के साथ एक बातचीत में बताया कि इन परिस्थितियों में यूएन मिशन वहाँ आम लोगों के लिए आशा के एक पुंज की तरह है,
लैफ़्टिनेंट जनरल सुब्रमण्यन जल्द ही दक्षिण सूडान में अपना कार्यकाल समाप्त कर रहे हैं.
उन्होंने न्यूयॉर्क में यूएन न्यूज़ के साथ एक विशेष बातचीत में बताया कि देश में यूएन शान्तिरक्षकों ने पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान, 1 लाख 60 हज़ार लोगों की जान बचाई है, केवल शारीरिक हिंसा से नहीं बल्कि अभूतपूर्व बाढ़ से भी.
उन्होंने कहा कि हिंसा से अपनी जान बचाने या फिर किसी अन्य कठिनाई में घिरे लोग, यूएन मिशन से सुरक्षा और समर्थन की आस रखते हैं.
देश की आबादी क़रीब 1 करोड़ 30 लाख है, जिनमें 93 लाख लोगों को, किसी न किसी प्रकार की मानवीय सहायता की ज़रूरत है. सहायता के अभाव में 20 लाख लोगों के जीवन पर संकट है.
ग़ौरतलब है कि दक्षिण सूडान ने वर्ष 2011 में सूडान से स्वाधीनता हासिल की थी, मगर उसके बाद से ही यह देश, टकराव और अस्थिरता से जूझता रहा है. वर्ष 2013 में राष्ट्रपति सल्वा कीर के वफ़ादार सैन्य बलों और पूर्व उप राष्ट्रपति रिएक मचार के समर्थकों के बीच गृहयुद्ध भड़क उठा था.
कई वर्षों तक जातीय हिंसा, सामूहिक अत्याचार और मानवीय संकट जारी रहने के बाद, 2018 में नाज़ुक हालात में एक शान्ति समझौते पर सहमति हुई. मगर, परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच बढ़ती झड़पों और आम नागरिकों पर हमलों के बीच, पिछले एक वर्ष से अधिक समय से देश में फिर से गृहयुद्ध छिड़ने की आशंका है.
सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच हिंसक टकराव के कारण, सीमा पार करके दक्षिण सूडान में वापिस लौटने वाले लोगों से स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हुई है.