सीरिया: हिंसक झड़पों से, संक्रमण काल में प्रगति पर जोखिम
सीरिया के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सरकारी सुरक्षा बलों और कुर्द नेतृत्व वाले मिलिशिया के बीच टकराव से तनाव उपजा है और यह टकराव व्यापक अस्थिरता की वजह बनने की आशंकाएँ व्यक्त की गई हैं. संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने, गृहयुद्ध की छाया से उबरने की कोशिश कर रहे सीरिया में मौजूदा चुनौतियों के बारे में, गुरूवार को सुरक्षा परिषद की एक बैठक में, सदस्य देशों को अवगत कराया है
यूएन अधिकारियों ने कहा कि देश में नए सिरे से लड़ाई भड़कने से रोकने के लिए यह ज़रूरी है कि हाल ही में हुए समझौतों को तेज़ी से लागू किया जाए, आम नागरिकों की रक्षा हो और संक्रमण के दौर में हुई प्रगति को सहेजा जाए.
एक दशक से अधिक समय तक जारी रहे गृहयुद्ध के बाद, दिसम्बर 2024 में, देश में तत्कालीन राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन का अन्त हो गया था.
उसके एक वर्ष के भीतर, अब तक लगभग 30 लाख सीरियाई शरणार्थी व देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित हुए लोग अपने घरों को वापिस लौट चुके हैं.
मगर, यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने आगाह किया कि देश अब भी नाज़ुक स्थिति से गुज़र रहा है.
आतंकवादी गुट ‘आइसिल’ (दाएश) अब भी एक ख़तरा बना हुआ है. सम्प्रदाय व जातीय तनाव नहीं सुलझ पाए हैं और विदेशी लड़ाकों की मौजूदगी व हिरासत केन्द्रों की पुख़्ता सुरक्षा न होने की वजह से गम्भीर चिन्ता है.
वहीं, मानवीय सहायता आवश्यकताएँ अब भी विशाल स्तर पर हैं. सर्दी के मौसम में जितनी सहायता धनराशि जुटाने की अपील की गई थी, फ़िलहाल उसका लगभग 25 फ़ीसदी हिस्सा ही मिल पाया है, जिससे लाखों लोगों को पर्याप्त स्तर पर समर्थन नहीं मिल पा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र ने क्षेत्रीय स्तर पर गतिविधियों के प्रति भी आगाह करते हुए कहा कि यदि इसराइल ने दक्षिणी सीरिया में बार-बार किए जा रहे अपने हमले जारी रखे, तो इससे देश की सम्प्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता कमज़ोर होगी और अस्थिरता गहराएगी.
इस पृष्ठभूमि में, पिछले कुछ दिनों में सीरिया के उत्तरी व पूर्वोत्तर इलाक़े में हालात तेज़ी से बिगड़े हैं.
वार्ता में अवरोध, लड़ाई भड़की
सीरियाई सरकार के सुरक्षा बलों और कुर्द मिलिशिया, सीरियाई डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ (SDF) के बीच सम्वाद व मध्यस्थता के लिए बार-बार कोशिशों के बावजूद, नए सिरे से भड़की लड़ाई को नहीं रोका जा सका है.
राजनैतिक मामलों व शान्तिनिर्माण के लिए यूएन सहायक महासचिव ख़ालेद ख़िएरी ने प्रतिनिधियों को बताया कि जनवरी में एक और दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन उससे, मार्च 2025 में हुए समझौते को लागू करने में मदद नहीं मिली, जिसका उद्देश्य SDF बलों को सरकारी संस्थाओं में शामिल करना है.
सीरियाई बलों और कुर्द मिलिशिया के बीच अलेप्पो शहर में भड़की लड़ाई की वजह से, हज़ारों लोग अपने घर छोड़कर जाने के लिए मजबूर हुए हैं. बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं, और बहुत से लोग लापता बताए गए हैं.
यूएन सहायक महासचिव ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य साझीदारों की मदद से, 18 जनवरी को युद्धविराम और एकीकरण समझौते की घोषणा की गई थी, लेकिन यह लागू नहीं हो पाया.
लड़ाई जल्द ही फिर भड़क गई और अल-हसकेह गवर्नरेट समेत अन्य इलाक़ों से झड़पों की जानकारी है.
ख़ालेद ख़िएरी ने दोनों पक्षों से युद्धविराम समझौते का तत्काल पालन किए जाने का आग्रह किया है और आगाह किया है कि यदि हिंसा जारी रही तो एक मानवीय व संरक्षण संकट भड़कने की आशंका प्रबल है.
उनके अनुसार, सीरियाई सरकार के हालिया आदेश में कुर्द समुदाय के भाषाई, सांस्कृतिक और नागरिकता अधिकारों को मान्यता दिया जाना उत्साहजनक पहल है, लेकिन समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया के ज़रिए भरोसा क़ायम किया जाना ज़रूरी है.
विशाल आवश्यकताएँ
यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) में निदेशक ऐडेम वोसोर्नू ने अपने सम्बोधन में कहा कि सीरिया में हाल के दिनों में लड़ाई दर्शाती है कि युद्ध भड़कने के 14 वर्ष बाद भी स्थिति कितनी नाज़ुक है.
इन झड़पों की वजह से अलेप्पो शहर से हज़ारों लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.
OCHA में निदेशक वोसोर्नू ने कहा कि लड़ाई की वजह से आम लोगों के लिए स्वच्छ जल की आपूर्ति ठप हो गई, कुछ अस्पतालों को बन्द करना पड़ा है, और अनेक बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं.
ड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, कुछ इलाक़ों में बिना फटे हुए विस्फोटक बिखरे हुए हैं और ठंड के मौसम में तूफ़ान की वजह से सहायता प्रयासों में कठिनाई पेश आ रही है.
लोगों को कठोर सर्दी में आश्रय, भोजन, तापन व्यवस्था की ज़रूरत है. भारी बर्फ़बारी की वजह से शिविरों में रहने वाले एक लाख 60 हज़ार लोग प्रभावित हुए हैं. दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई है.
इन चुनौतियों के बीच, संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसियाँ अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर, ज़रूरतमन्दों तक आवश्यक सामान व सेवाएँ पहुँचाने में जुटी है.
स्थापित परिवारों की मदद के लिए आपात धनराशि भी आवंटित की गई है और कुछ इलाक़ों में सहायता केन्द्र स्थापित किए गए हैं.