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अफगानिस्तान के लोगर प्रांत के पुल-ए-अलाम जिले के होनी सैदान गांव में एक सूक्ष्म ग्रीनहाउस विधवाओं को भोजन उगाने और खेती के माध्यम से आय अर्जित करने में मदद करता है। महिलाओं को खीर और मीठा कैप्सिकम जैसी फसलों की खेती के लिए बीज और प्रशिक्षण प्राप्त हुआ।

अफ़ग़ानिस्तान: ग्रीनहाउस खेती के ज़रिए, विधवाओं का भविष्य संवारने की मुहिम

© STFA/Mohammad Omar Kamal
अफ़ग़ानिस्तान के लोगर प्रान्त के पुल-ए-आलम ज़िले के होनी सैदान गाँव में स्थित एक लघु ग्रीनहाउस.

अफ़ग़ानिस्तान: ग्रीनहाउस खेती के ज़रिए, विधवाओं का भविष्य संवारने की मुहिम

महिलाएँ

अफ़ग़ानिस्तान के लोगर प्रान्त के एक छोटे से गाँव में, जलवायु-अनुकूल ग्रीनहाउस, महिलाओं का आर्थिक सहारा बन रहे हैं. ये उन्हें परिवारों का पालन-पोषण करनेआय अर्जित करने और आत्मविश्वास फिर से पाने में मदद कर रहे हैं.

लाभान्वितों में अनेक विधवाएँ भी हैं.

पुल-ए-आलम ज़िले के होनी सैदान गाँव में महिलाओं के एक समूह ने, घर से भोजन उगाने के ज़रिये अपने परिवारों को सहारा देने का नया तरीक़ा अपनाया है. प्रत्येक महिला को बीजों का पैकेट और बुआई, सिंचाई तथा फ़सल प्रबन्धन का प्रशिक्षण मिला. इसके बाद उन्होंने लघु ग्रीनहाउस में खीरा और शिमला मिर्च उगाना शुरू किया.

बाद में, अधिकांश महिलाओं ने स्थानीय बाज़ारों से अतिरिक्त बीज ख़रीदकर अपनी खेती का दायरा बढ़ाया. यह उपज उनके परिवारों के भोजन में काम आती है, जबकि अतिरिक्त सब्ज़ियाँ बेचकर वे एक स्थिर आय भी अर्जित कर रही हैं.

यह सहयोग ख़ासतौर पर महिला-प्रधान परिवारों के लिए अहम साबित हुआ है.

इस पहल में शामिल आमिना कहती हैं, “पहले हम सिर्फ़ सिलाई करके गुज़ारा करते थे. अब ग्रीनहाउस की मदद से हम भोजन भी उगा सकते हैं, बेहतर खा सकते हैं और बची हुई उपज बेच भी सकते हैं.”

कम लागत और जलवायु-अनुकूल सामग्री से बने ये लघु ग्रीनहाउस, छोटे भूखंडों के लिए बनाए गए हैं और कठोर मौसम को सहन कर सकते हैं. इनमें लगी ड्रिप सिंचाई प्रणाली पानी की खपत कम करती है और उत्पादन को अधिक प्रभावी बनाती है. यह पानी की कमी वाले इलाक़ों में बेहद अहम है, जहाँ हर बून्द मायने रखती है.

यह पहल समुदाय के सहयोग को भी मज़बूत करती है. इसके तहत गाँव स्तर पर ‘साझा हित समूह’ बनाए गए हैं. इन समूहों में महिलाएँ एक-दूसरे के घरों में बैठकें करती हैं. वे अपनी प्रगति पर चर्चा करती हैं, समस्याएँ साझा करती हैं और ग्रीनहाउस चलाने से जुड़ा व्यावहारिक ज्ञान एक-दूसरे से सीखती हैं. ये नियमित बैठकें आपसी सहयोग और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत बनाती हैं.

अफगानिस्तान में एक ग्रीनहाउस में एक पुरुष और एक महिला, भोजन उगाने और आय अर्जित करने के लिए कृषि में विधवा महिलाओं का समर्थन करते हुए।
© STFA/Mohammad Omar Kamal
लोगर प्रान्त के पुल-ए-आलम ज़िले में एक लघु ग्रीनहाउस के भीतर FAO के कर्मचारी.

इस कार्यक्रम से जुड़ी ज़हरा (नाम बदला हुआ) अब एक प्रदर्शन ग्रीनहाउस का संचालन कर रही हैं. यह ग्रीनहाउस गाँव की अन्य महिलाओं के लिए एक उदाहरण बन गया है. उनका काम अन्य महिलाओं को भी घर से भोजन उगाने को आत्मनिर्भरता के रास्ते के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में, सार्वजनिक जीवन के कई क्षेत्रों में महिलाओं पर बढ़ती पाबन्दियों के बावजूद, कृषि आज भी महिलाओं के लिए आजीविका के कुछ गिने-चुने विकल्पों में से एक है. 

ऐसी पहलें केवल भोजन और आय तक सीमित नहीं हैं. ये महिलाओं को आर्थिक भागेदारी, जलवायु सहनसक्षमता और नया आत्मविश्वास भी देती हैं.

ज़हरा कहती हैं, “इससे हमें उम्मीद मिली है. यह ऐसा काम है, जिसे हम अपने हाथों से, यहीं अपने घर पर कर सकते हैं.”

यह पहल संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में एक संयुक्त कार्यक्रम के तहत लागू की जा रही है. यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र की 'एकजुट होकर कार्य करने' (Delivering as One) की पहल का हिस्सा है.

इस संयुक्त कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र की 11 सहभागी संस्थाएँ शामिल हैं - खाद्य और कृषि संगठन (FAO), अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM), यूएन व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD), यूएन विकास कार्यक्रम (UNDP), यूनेस्को, यूएन जनसंख्या कोष (UNFPA), यूएन पर्यावास कार्यक्रम (UN HABITAT), यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR), यूएन ड्रग्स व अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC), यूएन परियोजना सेवा कार्यालय (UNOPS) और यूएन औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO).

यह कार्यक्रम, समुदाय-आधारित और एकीकृत तरीक़े से काम करते हुए, और संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाओं की साझा क्षमताओं का उपयोग करके, ऐसे ठोस नतीजे दे रहा है जो अलग-अलग और बिखरी हुई पहलों से सम्भव नहीं होते.