'दरारों, असमानताओं व संघर्षों के दौर में, पारस्परिक सहयोग को प्राथमिकता दें'
संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने अपने कार्यकाल के अन्तिम वर्ष में अपनी प्राथमिकताओं को प्रस्तुत करते हुए संकल्प जताया है कि 2026 के दौरान, यूएन चार्टर का पूर्णतया पालन सुनिश्चित करने, शान्ति को बढ़ावा देने व आपसी एकजुटता के लिए हरसम्भव प्रयास किए जाएंगे. उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र, साझा चुनौतियों के समाधान एक साथ मिलकर तलाश करने के लिए किया गया एक जीवित वादा है, जिसे हर हाल में बचाना होगा.
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने गुरूवार को यूएन महासभा को सम्बोधित करते हुआ चिन्ता जताई कि दुनिया एक उथलपुथल भरे दौर से गुज़र रही है और संघर्षों, असमानताओं व अनिश्चितताओं की चपेट में है, जहाँ भूराजनैतिक दरारें हैं, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन है और विकास व मानवतावादी सहायता में कटौतियाँ की जा रही हैं.
“इन शक्तियों और अन्य कारणों से वैश्विक सहयोग की नींव हिल रही है और अपने आप में बहुपक्षवाद की सहनसक्षमता की परीक्षा हो रही है.”
महासचिव के अनुसार, यह हमारे दौर का एक विरोधाभास है कि जब अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की सबसे अधिक ज़रूरत है, उसका उपयोग व उसमें निवेश करने की इच्छा सबसे कम है.
यूएन प्रमुख ने कहा कि कुछ पक्ष, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को निर्जीव होते देखना चाहते हैं, लेकिन “मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ: हम हिम्मत नहीं हारेंगे.”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ग़ाज़ा, यूक्रेन, सूडान और उससे परे तक, वह शान्ति के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं और समर्थन की प्रतीक्षा कर रहे लोगों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने के प्रयास जारी रहेंगे.
“और आइए, हम ये मानें कि इन हलचलों के बीच भी, हमने संयुक्त राष्ट्र के लिए वहाँ जगह बनाई है, जहाँ उसे जगह नहीं दी गई थी.”
यूएन की अहम भूमिका
इस क्रम में, यूएन प्रमुख ने कृत्रिम बुद्धिमता पर वैश्विक चर्चा को आकार देने, विकास के लिए निष्पक्ष रूप से वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करने, सुधारों की पैरवी करने, और किसी को भी पीछे नहीं छूटने देने के लिए नई व्यवस्थाओं का उल्लेख किया.
उन्होंने बताया कि वह जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता पर मुखर रहे हैं और इसके लिए सरकारों, व्यवसायों व नागरिक समाज से महत्वाकाँक्षी कार्रवाई की मांग की गई है. इन सभी क्षेत्रों में प्रयास जारी रखे जाएंगे.
महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय क़ानून पर की जा रही चोट पर चिन्ता जताते हुए कहा कि यह गुपचुप नहीं किया जा रहा है, बल्कि पूरी दुनिया की आँखों के सामने घटित हो रहा है, हमारी स्क्रीन पर.
उन्होंने आम नागरिकों व मानवीय सहायताकर्मियों पर हुए हमलों, सरकार को असंवैधानिक रूप से बदले जाने, असहमति के स्वरों को दबाए जाने, मानवाधिकारों को कुचले जाने और संसाधनों की लूट-खसोट पर गहरा क्षोभ प्रकट किया.
यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि सम्पदा और शक्ति कुछ ही हाथों में सीमित होती जा रही है और विश्व में सबसे धनी 1 प्रतिशत वर्ग के पास, 43 फ़ीसदी वैश्विक वित्तीय सम्पत्तियाँ हैं. “इस स्तर पर सघनता का नैतिक तौर पर बचाव नहीं किया जा सकता है.”
तीन अहम सिद्धान्त
यूएन प्रमुख ने कहा कि वह एक बेहतर विश्व की दिशा में अपने प्रयास जारी रखने और 2026 के दौरान हर एक दिन का, पूर्ण रूप से उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इस क्रम में, उन्होंने तीन सिद्धान्तों का उल्लेख किया:
प्रथम, यूएन चार्टर का पूर्ण रूप से, बिना किसी लागलपेट के पालन. उन्होंने इसे एक ऐसा समझौता बताया जोकि हम सभी को जोड़ता है और जिसे मनमुताबिक़ नहीं चुना जा सकता है.
“यह चार्टर अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों की नींव है – शान्ति, सतत विकास और मानवाधिकारों की आधारशिला.”
दूसरा, न्याय के साथ शान्ति के लिए अथक प्रयास. देशों के बीच शान्ति व प्रकृति के साथ शान्ति.
उन्होंने कहा कि शान्ति स्थापना, संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के केन्द्र में है. शान्ति, केवल युद्ध की अनुपस्थिति ही नहीं है. इसके लिए, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व मानवाधिकारों की नींव पर शान्ति निर्माण करना होगा, अन्यथा किसी भी समाधान में जोखिम हैं.
तीसरा, दरारों भरे इस दौर में एकता को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करने होंगे.
उन्होंने आगाह किया कि नस्लवाद, विदेशियों के प्रति नापसन्दगी व डर, धर्मान्धता की वजह से समाज दरक रहे हैं और समुदायों के तानेबाने में ज़हर घुल रहा है, जिससे विभाजन पैदा होता है और अविश्वास बढ़ता है.
यूएन प्रमुख ने कहा कि हमें समावेशन या अलग थलग होने, नए सिरे से खड़े होने या फिर पतन का शिकार होने के बीच में विकल्प चुनना होगा. “संयुक्त राष्ट्रों की एक दुनिया में, हमें संयुक्त समाजों का निर्माण करना होगा.”