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भारत: असम में विकास, कौशल और सेवाओं पर विश्व बैंक का नया निवेश

भारत के असम में एक चाय बागान में काम करने वाली महिला श्रमिक चाय की पत्तियों से भरी अपनी टोकरियों के साथ छतरियों के नीचे आराम कर रही हैं।
© UNWOMEN असम के चाय बागानों में सक्रिय कार्यबल का आधा हिस्सा महिलाएँ हैं. विश्व बैंक, असम में विकास के लिए अनेक परियोजनाएँ चला रहा है.

भारत: असम में विकास, कौशल और सेवाओं पर विश्व बैंक का नया निवेश

आर्थिक विकास

विश्व बैंक ने भारत के पूर्वोत्तर प्रदेश असम में तीन नई परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है जिनका उद्देश्य, जलवायु सहनसक्षमता बढ़ाना, प्रशासन और सेवाओं में सुधार करनाऔर लाखों युवाओं को रोज़गार के लिए ज़रूरी कौशल विकसित करना है. 

भारत के पूर्वोत्तर में स्थित असम, दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक प्रवेश द्वार है और क्षेत्रीय व्यापार व एकीकरण में इसकी अहम भूमिका है. हालाँकि, असम को जलवायु जोखिम, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे और बहुआयामी ग़रीबी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे समावेशी विकास की गति धीमी हुई है.

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इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल इन परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है जिनका उद्देश्य बाज़ारों, रोज़गार और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच को बेहतर बनाना है, साथ ही चरम मौसम की घटनाओं के प्रति असम की संवेदनशीलता को कम करना है. 

इनसे संयुक्त रूप से 40 लाख से अधिक छात्रों को लाभ मिलने और ग्रामीण तथा आदिवासी समुदायों के लिए सम्पर्क बेहतर होने की उम्मीद है.

भारत में विश्व बैंक के कार्यवाहक देश निदेशक पॉल प्रोसी कहते हैं, “कौशलयुक्त विकास चरम मौसम की घटनाओं के प्रति समुदायों की सहनशीलता को मज़बूत करता है. अच्छी सड़कें और स्कूल, शिक्षा को बाधित होने से बचाते हैं और लोगों को बाज़ारों तक पहुँचने तथा आय बढ़ाने में मदद करते हैं.”

सम्पर्क और रोज़गार तक बेहतर पहुँच

असम आपदा प्रतिरोधी पहाड़ी सड़क विकास परियोजना के तहत पहाड़ी इलाक़ों में जलवायु-सहनसक्षम सड़कों का निर्माण किया जाएगा. 

इस परियोजना की लागत 35 करोड़ डॉलर है. इसके पूरा होने से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 1 लाख 90 हज़ार लोगों के लिए यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है.

परियोजना के तहत प्रदेश के पूर्वोत्तर हिस्से में परिवहन और ढाँचागत सुविधाओं को भी बेहतर किया जाएगा. 

इनमें ट्रकों और इसी तरह के भारी वाहनों के लिए स्थान, टैक्सी और बस स्टैंड, और इलैक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग बिन्दु शामिल होंगे. इससे लोगों की आवाजाही आसान होगी और बाज़ारों तक पहुँच सुधरेगी.

परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों - टेसफामाइकल मितिकु, इगुनिवारी एकेउ-वेई और विजेता बेज़म के अनुसार, असम में हर मौसम में प्रयोग योग्य सड़कों की कमी, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बाज़ारों और तकनीक से जोड़ने में बाधा बनती रही है. 

यह परियोजना बेहतर सड़कों और सेवाओं के ज़रिये, 50 हज़ार से अधिक युवाओं के लिए रोज़गार के अवसरों तक पहुँच आसान बनाएगी.

शिक्षा एवं कौशल-निर्माण 

असम: स्कूल शिक्षा और किशोर कल्याण परियोजना के तहत, पूरे प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया जाएगा. 

इस परियोजना के लिए 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता दी गई है. इसके ज़रिए, प्राथमिक विद्यालय के 20 लाख से अधिक छात्रों के सीखने के नतीजों में सुधार का लक्ष्य रखा गया है.

परियोजना के तहत 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 20 लाख किशोरों को जीवन कौशल प्रशिक्षण और उन्नत पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाएँगे. इसमें बहुभाषी कक्षाएँ भी शामिल होंगी, ताकि युवजन बेहतर रूप से रोज़गार के लिए तैयार हो सकें.

परियोजना के प्रभारी अधिकारियों - मेघना शर्मा और प्रवेश कुमार के अनुसार, शिक्षा के हर चरण में सेवाओं की निरन्तरता बुनियादी कौशल को मज़बूत करती है और युवाओं को रोज़गार व आजीविका के लिए तैयार करती है.

यह परियोजना, जलवायु-सहनसक्षम स्कूलों के निर्माण और सुधार का भी समर्थन करेगी. इससे छात्रों के लिए अन्तिम छोर तक पहुँच सुनिश्चित हो सके और उन्हें कार्यबल में प्रवेश के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जा सके.

शासन और सेवा वितरण को मज़बूती 

तीसरी पहल, असम शासन और सेवा वितरण कार्यक्रम के लिए 8 करोड़ डॉलर की सहायता मंज़ूर की गई है. यह कार्यक्रम सार्वजनिक वित्त प्रबन्धन को सुदृढ़ करने, सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर आवंटन और व्यय पर ध्यान देगा, और नागरिकों तथा व्यवसायों को मिलने वाली प्रशासनिक सेवाओं में सुधार करेगा.

इस पहल के तहत असम के डेटा पारिस्थितिकी तंत्र को भी मज़बूत किया जाएगा, ताकि नीति-निर्माण और सेवा वितरण अधिक प्रभावी हो सके.

कार्यक्रम की टास्क टीम प्रभारी तान्या गुप्ता और श्रेया दत्त मिश्रा के अनुसार, यह कार्यक्रम असम में पहले से लागू विश्व बैंक-समर्थित शासन परियोजनाओं पर आधारित है और इसका लक्ष्य टिकाऊ सार्वजनिक वित्त के माध्यम से सेवा वितरण में सुधार लाना है.

उन्होंने कहा कि मज़बूत डेटा प्रणालियाँ, नीति-निर्माताओं को तेज़ और अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद करेंगी.