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ईरान: इंटरनैट सेवा की बहाली और प्रदर्शनकारियों पर हिंसा रोकने की अपील

ईरान की राजधानी तेहरान के एक इलाक़े का दृश्य. ईरान अनेक वर्षों से, संयुक्त राज्य अमेरिका की, आतंकवाद समर्थक देशों की सूची में रहा है.
© Unsplash/Arman Taherian
ईरान की राजधानी तेहरान के एक इलाक़े का दृश्य. ईरान अनेक वर्षों से, संयुक्त राज्य अमेरिका की, आतंकवाद समर्थक देशों की सूची में रहा है.

ईरान: इंटरनैट सेवा की बहाली और प्रदर्शनकारियों पर हिंसा रोकने की अपील

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र द्वारा ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति की जाँच के लिए नियुक्त स्वतंत्र तथ्य-खोजी मिशन ने, देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच. देश की सरकार से इंटरनैट सेवाएँ तुरन्त बहाल करने और प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई को रोके जाने की अपील की है.

मिशन ने शनिवार को कहा कि देशभर में जारी प्रदर्शनों के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ, सुरक्षा बलों को बिना किसी संयम के ‘निर्णायक’ दमन कार्रवाई करने के आदेश दिए जाने की विश्वसनीय ख़बरों से, वह गम्भीर रूप से चिन्तित है.

ख़बरों के मुताबिक़, 8 जनवरी की शाम को इंटरनैट और मोबाइल सम्पर्क बन्द कर दिए गए, जिससे सूचना व जानकारी तक लोगों की पहुँच गम्भीर रूप से सीमित हो गई.

ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसम्बर को, ईरान की राष्ट्रीय मुद्रा के अचानक गिरने के बाद शुरू हुए थे, और तब से देश के कम से कम 46 शहरों तक फैल चुके हैं.

7 जनवरी तक मिली जानकारी के अनुसार, ईरान के क़ोम, यासूज, केरमानशाह, ईलाम और लोरेस्तान समेत अनेक प्रान्तों में, कम से कम 40 लोगों की मौतें होने की ख़बरें सामने आई हैं, जिनमें कम से कम 5 बच्चे भी शामिल हैं.

वहीं, ईरान की संसद ने सुरक्षा बलों के कुछ सदस्यों की मौत होने की भी पुष्टि की है.

मूल अधिकारों का पूरा सम्मान हो

तथ्य-खोजी मिशन ने साथ ही यह भी दोहराया है कि ईरान की महिलाएँ, पुरुष और बच्चे, सुरक्षा और गरिमा के साथ जीवन जीने के हक़दार हैं, और उनके मूल अधिकारों का पूरा सम्मान होना चाहिए, जिनमें शान्तिपूर्ण तरीके़ से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार भी शामिल है.

मिशन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान सरकार द्वारा, इन प्रदर्शनकारी लोगों पर किसी भी तरह की दमनकारी हिंसा, धमकी या उत्पीड़न स्वीकार्य नहीं है.

साथ ही, मिशन ने इस बात का भी ज़िक्र किया कि किसी तीसरे देश द्वारा एकतरफ़ा सैन्य हस्तक्षेप की धमकियाँ या ऐसे किसी भी प्रकार के क़दम अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के विरुद्ध हैं.

तथ्य-खोजी मिशन ने, ईरानी अधिकारियों से अपील की है कि वे शान्तिपूर्ण सभा करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का सम्मान करें. 

मिशन ने साथ ही, उन सभी लोगों को बिना शर्त रिहा किए जाने का आहवान भी किया है, जिन्हें अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने के कारण मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है.

ईरान की राजधानी तेहरान का एक दृश्य.
© Unsplash/Hosein Charbaghi
ईरान की राजधानी तेहरान का एक दृश्य.

वहीं, मिशन ने यह भी बताया कि वह उन वीडियो फुटेज और तस्वीरों की समीक्षा कर रहा है, जिनमें सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाते हुए देखा गया है.

वीडियो में कुछ व्यक्ति को सार्वजनिक सड़कों पर भवनों और वाहनों में आग लगाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं.

मिशन ने, नस्लीय अल्पसंख्यक क्षेत्रों में बल प्रयोग किए जाने पर भी चिन्ता जताई, जहाँ ख़बरों के अनुसार प्रतिक्रिया विशेष रूप से क्रूर रही है.

एक घटना में, सुरक्षा बलों पर आरोप है कि उन्होंने ईलाम के एक अस्पताल पर छापा मारा, आँसू गैस का प्रयोग किया और मरीज़ो व चिकित्सा कर्मचारियों को पीटा.

मिशन के अनुसार, मौजूदा दमन की कार्रवाई 2022 में हुई ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ विरोध प्रदर्शनों की प्रवृत्ति को दोहराती है. 

वह प्रदर्शन तब भड़के थे, जब  22 वर्षीय कुर्द महिला महसा अमीनी को अनिवार्य हिजाब क़ानूनों के कथित उल्लंघन के लिए गिरफ़्तार किया गया था. इस दौरान महिला की मौत हो गई थी.

ग़ौरतलब है कि उन प्रदर्शनों के दौरान गम्भीर मानवाधिकार उल्लंघनों और प्रणालीगत जवाबदेही की कमी के आरोप लगाए गए थे.

तथ्य-खोजी मिशन का कार्य

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने, 2022 में स्थापित हुए तथ्य-खोजी मिशन को, ईरान में सितम्बर 2022 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के सम्बन्ध में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जाँच करने का कार्य सौंपा था, विशेष रूप से उन मामलों की जिनमें महिलाएँ और बच्चे प्रभावित हुए हैं.

इस मिशन के कार्यकाल को, अप्रैल 2025 में एक वर्ष के लिए और बढ़ाया गया, ताकि हाल के समय में हुए गम्भीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों की जाँच की जा सके.