वेनेज़ुएला संकट: सुरक्षा परिषद में नज़र आए मतभेद, अन्तरराष्ट्रीय नियमों की परीक्षा
वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मदूरो को हिरासत में लिए जाने के बाद, सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक एक बदले हुए कूटनैतिक माहौल में हुई, जिसमें देशों के बीच व्यापक मतभेद नज़र आए.
यह क्यों महत्वपूर्ण है: सुरक्षा परिषद के सदस्य इस बात पर बँटे हुए हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका की कार्रवाई जवाबदेही को मज़बूत करती है या अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था के एक बुनियादी सिद्धान्त को कमज़ोर करती है.
कुछ प्रतिनिधिमंडलों का कहना है कि यह क़दम असाधारण परिस्थितियों में उचित था. वहीं, अन्य देशों ने चेतावनी दी है कि इससे एकतरफ़ा बल प्रयोग को सामान्य बनाया जा सकता है और राष्ट्रों की सम्प्रभुता को नुक़सान पहुँच सकता है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बहस की दिशा तय करते हुए कहा कि अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि सभी सदस्य देश संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करें.
उनके शब्दों ने न्यूयॉर्क स्थित सुरक्षा परिषद कक्ष में ऐसी बहस की नींव रखी, जो गहरे और स्थाई मतभेदों को उजागर कर सकती है. इसी दौरान, वेनेज़ुएला के निवर्तमान राष्ट्रपति निकोलस मदूरो को कुछ ही मील दूर एक संघीय अदालत में पेश किया गया.
अमेरिका का दावा: युद्ध नहीं, क़ानून-प्रवर्तन की कार्रवाई
संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी कार्रवाई को सैन्य आक्रमण बताने के आरोपों को ख़ारिज किया है. अमेरिका के अनुसार, यह कार्रवाई सेना की मदद से की गई एक सीमित क़ानून-प्रवर्तन कार्रवाई थी, जिसका मक़सद अभियोग का सामना कर रहे व्यक्ति को गिरफ़्तार करना था.
अमेरिकी राजदूत माइकल वॉल्ट्ज ने कहा कि 2024 के विवादित चुनावों के बाद निकोलस मदूरो एक वैध राष्ट्राध्यक्ष नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि शनिवार की कार्रवाई मादक पदार्थों की तस्करी और अन्तरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए ज़रूरी थी, जो अमेरिका और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा करते हैं.
उनके अनुसार, 1989 में पनामा के पूर्व नेता मैनुअल नोरीएगा की गिरफ़्तारी इस तरह की कार्रवाइयों का एक उदाहरण है.
उन्होंने कहा. “यह वेनेज़ुएला या उसके लोगों के ख़िलाफ़ कोई युद्ध नहीं है. हम किसी देश पर क़ब्ज़ा नहीं कर रहे हैं. यह पहले से मौजूद वैध अभियोगों के तहत की गई एक क़ानून-प्रवर्तन कार्रवाई है.”
वेनेज़ुएला: सम्प्रभुता का उल्लंघन, ख़तरनाक मिसाल
वेनेज़ुएला के राजदूत सैमुअल मोंकाडा ने कहा कि उनका देश बिना किसी क़ानूनी आधार के एक अवैध सशस्त्र हमले का शिकार बना है. उन्होंने अमेरिका पर, वेनेज़ुएला की ज़मीन पर बमबारी करने, नागरिकों और सैनिकों की मौत और राष्ट्रपति निकोलस मदूरो तथा प्रथम महिला सिलिया फ़्लोरेस के “अपहरण” का आरोप लगाया.
वेनेज़ुएला के राजदूत ने कहा, “हम अमेरिकी आक्रामकता के इस अहम पहलू को नज़रअन्दाज़ नहीं कर सकते. वेनेज़ुएला को उसके प्राकृतिक संसाधनों के कारण निशाना बनाया गया है.”
राजदूत मोंकाडा ने सुरक्षा परिषद से संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत कार्रवाई करने की अपील की.
उन्होंने कहा कि अमेरिका को राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की प्रतिरक्षा का सम्मान किया जाना चाहिए और उनकी तत्काल रिहाई तथा सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए.
उन्होंने वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ बल प्रयोग की स्पष्ट और बिना शर्त निन्दा किए जाने की मांग करते हुए, बल के ज़रिए किसी क्षेत्र या संसाधन के अधिग्रहण के सिद्धान्त की फिर से पुष्टि करने को कहा.
इसके साथ ही, उन्होंने तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा एवं अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के सम्मान को बहाल करने के लिए क़दम उठाने की मांग की.
यूएन चार्टर का अनुच्छेद – 2
यूएन चार्टर का अनुच्छेद -2 ऐसे आधारभूत सिद्धान्त पेश करता है जो ये दिखाते हैं कि देश, संयुक्त राष्ट्र के तहत किस तरह साथ मिलकर काम करें. इसका अर्थ इस प्रकार है –
- सभी देशों की समानता: हर सदस्य देश, बड़ा या छोटा, सभी के साथ बराबरी की जाए.
- वादों का पालन: देश संयुक्त राष्ट्र में शामिल होते समय किए गए वादों को पूरा करें.
- शान्तिपूर्ण समस्या-समाधान: शान्ति व न्याय के संरक्षण की ख़ातिर, विवादों का निपटारा, हिंसा के बिना किया जाए.
- बल प्रयोग या धमकियाँ नहीं: देश, अन्य देशों की स्वतंत्रता या क्षेत्र को ख़तरे में नहीं डालें और ना ही बल प्रयोग करें.
- यूएन कार्रवाइयों का समर्थन करें: संयुक्त राष्ट्र जब शान्ति क़ायम रखने के लिए कार्रवाई करे तो सदस्य देश उसकी मदद करें और इन कार्रवाइयों का विरोध करने वालों की कभी भी मदद नहीं करें.
- सदस्यता से आगे भी प्रभाव: जब शान्ति व सुरक्षा दाँव पर लगे हों तो, जो देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य नहीं हैं, वो भी इन सिद्धान्तों का पालन करें.
- देशों के घरेलू मामलों से दूरी: संयुक्त राष्ट्र, किसी देश के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता. ऐसा केवल यूएन चार्टर के अध्याय VII को लागू करने के दौरान ही किया जा सकता है, जिसमें अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा को क़ायम रखने के लिए कार्रवाइयों का विवरण है.
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.
बल प्रयोग पर चिन्ता
कई सुरक्षा परिषद सदस्यों और आमंत्रित सदस्य देशों ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर गहरी चिन्ता प्रकट की और कहा कि उनका रुख़ संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धान्तों पर आधारित है.
कोलम्बिया, ब्राज़ील, मैक्सिको, चिले और पनामा ने अपने क्षेत्र को शान्ति क्षेत्र घोषित करने की अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने चेतावनी दी कि एकतरफ़ा सैन्य कार्रवाई पश्चिमी गोलार्द्ध को अस्थिर कर सकती है और विस्थापन बढ़ा सकती है.
- कोलम्बिया ने किसी भी एकतरफ़ा बल प्रयोग को ख़ारिज करते हुए कहा कि इसकी सबसे बड़ी क़ीमत आम नागरिक चुकाते हैं.
- ब्राज़ील ने कहा कि किसी राष्ट्राध्यक्ष पर बमबारी और उसकी गिरफ़्तारी सीमा का एक अस्वीकार्य उल्लंघन है.
- मैक्सिको ने ज़ोर दिया कि राजनैतिक मतभेदों के बावजूद, बाहर से थोपा गया सत्ता परिवर्तन अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है.
कई देशों ने वेनेज़ुएला में मानवाधिकार स्थिति और नागरिकों की पीड़ा पर भी चिन्ता जताई.
- ब्रिटेन ने वेनेज़ुएला में वर्षों से जारी ग़रीबी, दमन और बड़े पैमाने पर विस्थापन का उल्लेख किया. लेकिन साथ ही, वैश्विक शान्ति के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और क़ानून के शासन के सम्मान पर बल दिया.
डेनमार्क और फ़्रांस ने संगठित अपराध से निपटने की आवश्यकता स्वीकार की, लेकिन कहा कि ऐसे प्रयास वैध और बहुपक्षीय तरीक़ों से किए जाने चाहिए.
अमेरिकी कार्रवाई के समर्थन में क्षेत्रीय आवाज़ें
कुछ देशों ने अलग रुख़ अपनाया.
- अर्जेंटीना ने अमेरिकी कार्रवाई को मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के ख़िलाफ़ निर्णायक क़दम बताते हुए कहा कि इस कार्रवाई से वेनेज़ुएला में लोकतंत्र, क़ानून के शासन व मानवाधिकारों की बहाली का रास्ता खुल सकता है.
- पैरागुए ने निकोलस मदूरो की बर्ख़ास्तगी का स्वागत किया, साथ ही राजनैतिक क़ैदियों की रिहाई और लोकतांत्रिक बदलाव की अपील की.
चार्टर की विश्वसनीयता का मुद्दा
रूस और चीन ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए, इसे सशस्त्र आक्रमण बताया और एकतरफ़ा बल प्रयोग को सामान्य बनाए जाने के ख़िलाफ़ चेतावनी दी.
दक्षिण अफ़्रीका, पाकिस्तान, ईरान और युगांडा सहित कई देशों ने कहा कि जब अन्तरराष्ट्रीय क़ानून सब पर समान रूप से लागू नहीं होता, तो इससे पूरी वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था कमज़ोर पड़ती है.
रूस और चीन के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति निकोलस मदूरो की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि राष्ट्राध्यक्ष की प्रतिरक्षा अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत सुरक्षित होती है.
उनके अनुसार, यह मामला इस बात की परीक्षा है कि क्या संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धान्त सभी देशों पर समान रूप से लागू किए जाते हैं.