सूडान: कोर्दोफ़ान व उत्तर दारफ़ूर में हिंसा प्रभावित आबादी की व्यथा पर चिन्ता
संयुक्त राष्ट्र के मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने, परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच हिंसक टकराव की आँच में झुलस रहे सूडान में, आम नागरिकों के लिए विकट स्थिति पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है, विशेष रूप से कोर्दोफ़ान क्षेत्र और उत्तर दारफ़ूर प्रान्त में.
आपात राहत मामलों के लिए यूएन कार्यालय के अनुसार, दक्षिण कोर्दोफ़ान प्रान्त के डिलिंग व कडूग्ली नगर घेराबन्दी का शिकार है और वहाँ हालात बद से बदतर से हो रहे हैं. दोनों नगरों से सम्पर्क और ज़रूरी सामान की आपूर्ति बाधित हैं और भोजन समेत अन्य अति-आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतें उछाल पर हैं.
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) का कहना है कि इन नगरों से सुरक्षा की तलाश में किसी तरह से कुछ आम नागरिकों को बाहर निकल आने में कुछ सफलता मिली है.
इसके बाद, उन्होंने कोर्दोफ़ान क्षेत्र व व्हाईट नाइल प्रान्त के अन्य इलाक़ों में शरण ली है.
यूएन एजेंसी ने नॉर्थ कोर्दोफ़ान प्रान्त में भी आम नागरिकों के विस्थापित होने की पुष्टि की है. उधर, उत्तरी दारफ़ूर के पश्चिमी हिस्से में हिंसक टकराव व असुरक्षा व्याप्त है, जिससे पड़ोसी देश चाड से लगी सीमा वाले इलाक़े में निरन्तर विस्थापन के मामले सामने आ रहे हैं.
सूडान की सशस्त्र सेना और अतीत में उसके सहयोगी रहे अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में, देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था.
इस वर्ष 26 अक्टूबर को, RSF ने उत्तरी दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अलफ़शर पर, 1.5 साल की घेराबन्दी के बाद, अपना क़ब्ज़ा किया, जहाँ बड़े पैमाने पर विस्थापन और अत्याचार को अंजाम दिए जाने के आरोप सामने आए.
इसके बाद लड़ाई अब कोर्दोफ़ान क्षेत्र में केन्द्रित हो गई है.
निरन्तर सहायता पर बल
सूडान के विभिन्न क्षेत्रों में पसरी असुरक्षा के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर ज़रूरतमन्द आबादी तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाने में जुटा है, हालाँकि मानवीय सहायता मार्ग में कठिनाइयों और धनराशि की कमी से यह कार्य चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है.
इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने सूडान व चाड के बीच आद्रे सीमा पर मानवीय सहायता आपूर्ति के लिए आवाजाही को मार्च महीने के अन्त तक बढ़ाने की पुष्टि की है.
सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में मानवीय सहायता आपूर्ति को पहुँचाने व राहतकर्मियों को रवाना करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रवेश बिन्दु है, जिसकी निरन्तर उपलब्धता अहम है.
आपात राहत मामलों के लिए यूएन समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने इस ख़बर का स्वागत किया है और इस सीमा चौकी को खुला रखने के लिए सूडान व चाड के प्रशासन की सराहना की है.
उन्होंने कहा कि सहायता मार्ग के खुले रहने से ज़िन्दगियों की रक्षा करने में मदद मिलेगी.