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17 संकटग्रस्त देशों के लिए 2 अरब डॉलर की मानवीय सहायता पर अहम समझौता

कांगो के लोकतांत्रिक गणराज्य के उवीरा क्षेत्र के संगे में एक महिला ने विस्थापित परिवारों के लिए आपातकालीन खाद्य सहायता प्राप्त करने के बाद अपने सिर पर डब्ल्यूएफपी के हाई एनर्जी बिस्किट का एक बॉक्स रखा है।
© WFP/Musa Abema

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के साउथ कीवू प्रान्त में विस्थापित परिवारों को पौष्टिक बिस्किट प्रदान किए जा रहे हैं.

17 संकटग्रस्त देशों के लिए 2 अरब डॉलर की मानवीय सहायता पर अहम समझौता

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राज्य अमेरिका ने सोमवार को औपचारिक रूप से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत विश्व भर में मानवीय राहत कार्यक्रमों के लिए 2 अरब डॉलर की धनराशि उपलब्ध कराए जाने का संकल्प लिया गया है. इसके तहत, संकटों से जूझ रहे 17 देशों को सहायता धनराशि मुहैया कराए जाने पर सहमति हुई है.

आपात राहत मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने कहा है कि दुनिया में मानवीय सहायता आवश्यकताओं में आए उछाल को ध्यान में रखते हुए, यह सहमति ज़िन्दगियों की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है. 

अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने जिनीवा में इस समझौते पर हस्ताक्षर के लिए आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए, विकट परिस्थितियों में सेवारत मानवीय सहायताकर्मियों के प्रति आभार प्रकट किया.

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उन्होंने ध्यान दिलाया कि वर्ष 2025, मानवीय सहायता प्रयासों में जुटे हर एक व्यक्ति के लिए एक अत्यंत कठिन वर्ष साबित हुआ है.

मगर, इन चुनौतियों के बावजूद, उनके अनुसार सोमवार को हस्ताक्षरित सहमति-पत्र, आशावान बने रहने का आधार मुहैया कराता है. 

उन्होंने कहा कि इस धनराशि से लाखों-करोड़ों लोगों को वो समर्थन मिल सकेगा, जिसकी उन्हें सख़्त आवश्यकता है, और 2026 में करोड़ों ज़िन्दगियों की रक्षा करने में भी मदद मिलेगी. 

इस समझौते के अन्तर्गत, संकट प्रभावित 17 देशों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है: ग्वाटेमाला, अल सल्वाडोर, यूक्रेन, हेती, नाइजीरिया, इथियोपिया, दक्षिण सूडान, मोज़ाम्बीक़, म्याँमार, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, सूडान, बांग्लादेश, सीरिया, युगांडा, केनया, चाड. 

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के केन्द्रीय आपात प्रतिक्रिया कोष (CERF) को भी समर्थन प्रदान किया जाएगा.

जीवन रक्षा के लिए अहम

अवर महासचिव ने बताया कि इस महत्वपूर्ण समझौते का वास्तविक असर ज़मीन पर दिखाई जाएगा, लाखों-करोड़ों ज़िन्दगियों की रक्षा सुनिश्चित करने में और यह मायने रखता है. 

उन्होंने ध्यान दिलाया कि वर्ष 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र की योजना 8.7 करोड़ लोगों तक आपात सहायता पहुँचाने की है, और इस रक़म से उन प्रयासों को समर्थन मिलेगा.

यूएन की वार्षिक योजना को तैयार करने में प्राथमिकताएँ तय की गई हैं, ताकि दोहराव से बचा जा सके, लालफ़ीताशाही पर अंकुश लगाया जाए और मानवतावादी प्रणाली में दक्षता को बढ़ाया जाए.

अमेरिका के साथ हुआ यह समझौता, मानवतावादी प्रणाली को नए सिरे से तैयार करने जैसा है, जिसकी घोषणा पिछले वर्ष मार्च में की गई थी – मानवीय सहायता को तेज़ी से, स्मार्ट ढंग से, सर्वाधिक ज़रूरतमन्दों तक पहुँचाना.

जवाबदेही पर बल

अवर महासचिव ने अपने सम्बोधन में मानवतावादी प्रयासों में सुधार और जवाबदेही पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया. 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दानदाता परिणाम देखना चाहते हैं और हर एक डॉलर किस तरह से ख़र्च किया जाता है, उसकी जवाबदेही आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे वाक़ई में जीवन रक्षा की जा रही है.

टॉम फ़्लैचर ने कहा कि इस समझौते का यह अर्थ नहीं है कि हर एक मुद्दे पर समान विचार हैं, लेकिन जीवन रक्षा प्राथमिकताओं पर यह साझा ध्यान को परिलक्षित करती है.

उन्होंने बताया कि मानवीय सहायता प्रयासों और कूटनीति के बीच अहम सम्बन्ध है, और इसलिए 2026 को कूटनीति व शान्ति निर्माण का वर्ष बनाना होगा. हिंसक टकरावों का अन्त करना, मानवीय सहायता आवश्यकताओं में कमी लाने का एक कारगर उपाय है.