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सूडान: हिंसक टकराव की भयावहता, आम नागरिकों के लिए 'अपार, अकल्पनीय पीड़ा'

सूडान के दारफूर के तविला में एक विशाल शरणार्थी शिविर, जहां लगभग 89,000 विस्थापित लोग एल फाशर से भाग गए हैं। संयुक्त राष्ट्र और गैर सरकारी संगठन भोजन, पानी, स्वास्थ्य देखभाल और मनोसामाजिक सहायता सहित सहायता प्रदान करते हैं। कई विस्थापित महिलाएं हैं जिन्होंने यौन हिंसा का अनुभव किया है।
© UNOCHA/ Mohamed Galal सूडान में 3 करोड़ से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत है.

सूडान: हिंसक टकराव की भयावहता, आम नागरिकों के लिए 'अपार, अकल्पनीय पीड़ा'

शान्ति और सुरक्षा

विशाल स्तर पर हिंसा व विध्वंस से बेहाल सूडान में आम नागरिक अपार, अकल्पनीय पीड़ा से जूझ रहे हैं और इसका फ़िलहाल कोई अन्त नज़र नहीं आ रहा है. संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को सुरक्षा परिषद की बैठक में आगाह किया कि अंधाधुंध ड्रोन हमलों और हथियारों के प्रवाह से सूडान में स्थिति निरन्तर बिगड़ रही है और इसलिए इसके ज़िम्मेदार पक्षों को स्पष्ट सन्देश दिए जाने की ज़रूरत है.

राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों पर मध्य पूर्व, एशिया व प्रशान्त क्षेत्र के लिए सहायक महासचिव ख़ालेद ख़िएरी ने बताया कि अर्द्धसैनिक बल (RSF) ने पिछले कुछ सप्ताह में कोर्दोफ़ान क्षेत्र में कई स्थानों पर अपना दबदबा बढ़ाया है.

1 दिसम्बर को, RSF ने वैस्ट कोर्दोफ़ान में बाबानूसा को अपने क़ब्ज़े में लिया और फिर 8 दिसम्बर को साउथ कोर्दोफ़ान में हेगलिग पर नियंत्रण कर लिया, जहाँ दक्षिण सूडान में कच्चे तेल के निर्यात के लिए केन्द्र स्थित है. इसके बाद साउथ कोर्दोफ़ान में कडूग्ली और डिलिंग की घेराबन्दी की जा रही है. 

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सूडान की सशस्त्र सेना और अतीत में उसके सहयोगी रहे अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में, देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था.

इस वर्ष 26 अक्टूबर को, RSF ने नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर पर, 1.5 साल की घेराबन्दी के बाद, अपना क़ब्ज़ा किया, जहाँ बड़े पैमाने पर विस्थापन और अत्याचार को अंजाम दिए जाने के आरोप सामने आए. इसके बाद लड़ाई अब कोर्दोफ़ान क्षेत्र में केन्द्रित हो गई है.

सहायक महासचिव ने सूडान में हिंसक टकराव के गहन होने पर चिन्ता व्यक्त की. “यह उन आशंकाओं की पुष्टि करता है कि शुष्क मौसम में लड़ाई बढ़ेगी और आम नागरिकों पर नए सिरे से हमले होंगे.”

टकराव की जटिलताएँ

“हर दिन बीतने के साथ व्यापक पैमाने पर हिंसा व विध्वंस हो रहा है.” ख़बरों के अनुसार, सूडान की सेना ने कुछ इलाक़ों से पीछे हटते हुए दक्षिण सूडान में प्रवेश किया है और जबकि दक्षिण सूडान के सैन्य बल हेगलिग में तेल प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए सूडान में पहुँचे हैं.

उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम इस हिंसक टकराव की जटिल स्थिति और उसके क्षेत्रीय विस्तार को दर्शाता है और यदि स्थिति से नहीं निपटा गया तो सूडान के पड़ोसी देश एक वृहद युद्ध का हिस्सा बन सकते हैं.

ख़ालेद ख़िएरी ने कहा कि सूडान युद्ध में हथियारों की निरन्तर हो रही आपूर्ति इस संघर्ष की एक बड़ी वजह है, और इसलिए युद्धरत पक्षों के समर्थकों को अपने प्रभाव का इस्तेमाल इस संहार पर विराम लगाने में करना होगा.

सूडान में दोनों पक्षों द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने पर भी गहरी चिन्ता जताई गई है. 4 दिसम्बर को साउथ कोर्दोफ़ान के कलोगी में एक किंडरगार्टन पर हमला हुआ और उसके बाद एक अस्पताल को निशाना बनाया गया जहाँ घायलों का उपचार किया जा रहा था.

“इस जघन्य हमले में 63 बच्चों समेत 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई.” 

ड्रोन हमलों में यूएन शान्तिरक्षकों को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है. 13 दिसम्बर को, कडूग्ली में संयुक्त राष्ट्र के एक लॉजिस्टिक हब पर हमला किया गया, जिसमें आबिये में यूएन शान्तिरक्षा मिशन (UNISFA) में सेवारत 6 बांग्लादेश शान्तिरक्षकों की मौत हो गई और 9 अन्य घायल हुए. 

एक माँ अपने बीमार बेटे को एक UNSffaonfa गांव, पश्‍चिम ओम्मामैन में ले लेती है. दृश्य क्षेत्र में भयंकर स्वास्थ्य स्थिति को विशिष्ट करता है, जिसमें चिकित्सा सेवा और सुविधाओं के लिए सीमित पहुँच है.
© UNICEF/Ahmed Mohamdeen Elfatih सूडान के कोर्दोफ़ान क्षेत्र में आम नागरिक गहरी खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं, उनकी आय के स्रोत ख़त्म हो गए हैं और ज़रूरी सेवाएँ सीमित हैं.

कोर्दोफ़ान, नया केन्द्र

आपात राहत मामलों के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) में निदेशक ऐडेम वोसोर्नू ने बताया कि अनेक मोर्चों पर आम नागरिक पीड़ा का सामना कर रहे हैं और कोर्दोफ़ान क्षेत्र, मानवीय सहायता आवश्यकताओं के नए केन्द्र के रूप में उभर रहा है.

यहाँ आम नागरिकों, सहायताकर्मियों व क़ाफ़िलों को निशाना बनाया गया है और असुरक्षा की वजह से यूएन एजेंसियों व ग़ैर-सरकारी संगठनों को अन्य स्थानों पर हस्तांतरित किया गया है.

इस बीच, दारफ़ूर क्षेत्र में भी भयावह हालात हैं, जहाँ अल फ़शर पर RSF के क़ब्ज़े के बाद बड़े पैमाने पर हत्याओं व यौन हिंसा के मामले सामने आए थे.

निदेशक वोसोर्नू ने कहा कि सूडान में हिंसक टकराव के 1,000 दिन पूरे होने जा रहे हैं और इसलिए आम नागरिकों की रक्षा के लिए सुरक्षा परिषद को निर्णायक क़दम उठाने होंगे, मानवीय सहायता मार्ग सुनिश्चित करना होगा और टकराव पर विराम लगाना होगा.

उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद को एक मज़बूत, सुस्पष्ट सन्देश देना होगा कि आम नागरिकों के विरुद्ध हमलों और अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के उल्लंघन को सहन नहीं किया जाएगा.