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दक्षिण सूडान में तैनात भारतीय सेना की एक महिला शांति सैनिक, स्वती एस, यूएनएमआईएसएस चिह्न और भारतीय ध्वज पैच के साथ अपने छलावरण वर्दी में आत्मविश्वास से खड़ी है।

UNMISS: मलाकल में महिलाओं का दिल जीतने में सक्रिय मेजर स्वाति

UNMISS भारत की एक शान्तिरक्षक मेजर स्वाति शान्ताकुमार, दक्षिण सूडान में UNMISS के साथ में सेवारत.

UNMISS: मलाकल में महिलाओं का दिल जीतने में सक्रिय मेजर स्वाति

यूएन मामले

दक्षिण सूडान में यूएन सहायता मिशन में सेवारत भारत की शान्तिरक्षक मेजर स्वाति शान्ताकुमार के लिए ये शुरुआत आसान नहीं थी. मगर उनकी लगन और मुश्किलों पर पार पाने की जद्दोजहद ने, अनेक बाधाओं के बावजूद, स्थानीय समुदायों व महिलाओं के दिल जीतने में मदद की है.

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मेजर स्वाति ने जब दक्षिण सूडान के मलाकल में यूएन शान्तिरक्षा मिशन में अपनी ज़िम्मेदारी संभाली तो, स्थानीय समुदायों के साथ सम्पर्क व सम्वाद शुरू करने में उन्हें अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

मेजर स्वाति याद करते हुए बताती हैं, “विशेष रूप में महिलाएँ बातचीत करने के लिए अनिच्छुक होती हैं. हम ऐसी प्रथम महिला सम्पर्क टीम हैं, जिसे भारत ने तैनात किया है इसलिए स्थानीय महिलाओं को वर्दी में महिलाओं को देखने की आदत नहीं थीं.”

अतीत में, महिला शान्तिरक्षकों को, अपने सैन्य क़ाफ़िलों में अक्सर सिविल गतिविधियों तक सीमित रखे जाते हुए देखा गया है, जिसमें वो चिकित्सा सहायता मुहैया कराती रही हैं या शान्तिरक्षा मुख्यालय के भीतर ही संचालन में सहायता करती रही हैं.

मेजर स्वाति और उनकी टीम का कार्य, UNMISS परिसर की हदों से बाहर आरम्भ होता है. ज़मीन से लेकर हवा में यहाँ, तक कि नदियों में भी गश्त लगाना, जिसमें वो स्थानीय समुदायों के साथ सम्पर्क साधने और उनके साथ सम्वाद क़ायम करने के लिए, हर सम्भव साधन व उपाय का सहारा ले रहे हैं.

अपने कामकाज के साथ भारी लगाव रखने वाली लैंगिक पैरोकार मेजर स्वाति बताती हैं, “हमारे इस काम के आरम्भ में कुछ चुनौतियाँ पेश आने के बावजूद, हमने अपना काम जारी रखा और अहम स्वास्थ्य किटें वितरित कीं, और धीरे-धीरे, स्थानीय समुदायों में महिलाओं ने हम पर अधिक भरोसा करना शुरू कर दिया.”

मेजर स्वाति याद करती हैं, “हमारी पहली गश्त के दौरान, महिलाएँ हमसे बिल्कुल भी बात नहीं कर रही थीं. अब वो स्वयं ही अपनी आपबीतियाँ और अपनी कहानियाँ हमारे साथ साझा करने के लिए, हमसे सम्पर्क कर रही हैं. और स्पष्ट देखा जा सकता है कि वो अपनी चिन्ताओं के बारे में हमारे साथ बात करने के बाद, कितनी राहत महसूस करती हैं.” 

मगर चुनौतियाँ बरक़रार

मेजर स्वाति बताती हैं कि सबसे बड़ा मुद्दा, भाषा की बाधा का है. जब हमारे साथ कोई भाषा सहायक नहीं होते हैं, तो हम कभी-कभी तो लाभार्थियों के साथ बिल्कुल भी सम्पर्क क़ायम नहीं कर पाते हैं. मगर हमे सदैव अपनी पूरी कोशिश करते हैं.

इसमें कभी-कभी टीम, इंटरव्यू या बातचीत करने से पहले, अपने सवालों का अनुवाद करने के लिए ऐप्स का भी सहारा लेते हैं.

कुछ कठिनाइयों व्यक्तिगत क़िस्म की हैं क्योंकि इसमें लम्बे-लम्बे दौर के लिए, घर से दूर भी रहना पड़ता है. मगर इस चुनौती का सामना भी, कुछ विशेष सोच के साथ किया जाता है.

31 वर्षीय मेजर स्वाति कहती हैं, “जब चीज़ें बहुत कठिन हो जाती हैं, तो मैं अपने परिवार के बारे में सोचती हूँ. मेरी बहन, हमेशा मेरा हौसला बढ़ाती हैं कि वो भी, लैंगिक बाधाओं पर पार पाने में, मुझसे किस तरह प्रेरित महसूस करती हैं.”

नीली बैरेट और छलावरण वर्दी पहने संयुक्त राष्ट्र की एक महिला शांति सैनिक एक नीली प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठे दक्षिण सूडानी नागरिक के साथ बातचीत कर रही है, जबकि अन्य संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी पास में देख रहे हैं।
UNMISS भारत की एक शान्तिरक्षक मेजर स्वाति शान्ताकुमार, दक्षिण सूडान में UNMISS के मिशन के दौरान, समुदायों के साथ बातचीत करते हुए.

बड़ी तस्वीर देखें तो मेजर स्वाति अन्ततः कुछ विशेष कर दिखाने के लिए इस ज़िम्मेदारी में आई हैं और इसी प्रेरणा की ख़ातिर उन्होंने एक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर से अपनी राह बदलकर, 8 वर्ष पहले भारतीय सेना में अपनी जगह बनाई थी.

मेजर स्वाति, दक्षिण सूडान के समुदायों, विशेष रूप में महिलाओं की सहनशीलता को बहुत निकट से देखा है और वो उनके हौसले की प्रशंसा भी करती हैं. मेजर स्वाति मानती हैं कि वो ना केवल सही रास्ते पर हैं, बल्कि सही स्थान पर भी हैं.

मेजर स्वाति कहती हैं, “मेरा ख़याल है कि दक्षिण सूडान में महिलाएँ मज़बूत हैं और अपने समुदायों का नेतृत्व करने में समर्थ  हैं. अगर वो अपनी चुनौतियों का सामना कर सकती हैं, तो वो शान्ति प्राप्ति की दिशा में एक प्रबल शक्ति बनेंगी.”