सूडान: कोर्दोफ़ान के अल-ओबेद पर हमले की आशंका, नए सिरे से विस्थापन का जोखिम
सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच कोर्दोफ़ान क्षेत्र में लड़ाई में तेज़ी आ रही है, जिससे आम नागरिक डरे हुए हैं और अपने घर छोड़कर भाग रहे हैं. अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने शुक्रवार को बताया कि अक्टूबर से अब तक केवल कोर्दोफ़ान में ही 50 हज़ार से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं. नॉर्थ कोर्दोफ़ान प्रान्त की राजधानी अल-ओबेद के जल्द ही हमले की चपेट में आने की आशंका है, जिसका असर वहाँ लाखों लोगों पर होने की आशंका है.
सूडान में यूएन प्रवासन एजेंसी के मिशन प्रमुख मोहम्मद रेफ़ात ने बताया कि आम लोग अपने घर छोड़कर जाने का विकल्प अपनी इच्छा से नहीं चुन रहे हैं, बल्कि वे सुरक्षा की तलाश में भाग रहे हैं.
उन्होंने पोर्ट सूडान से जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी देते हुए सदस्य देशों से आग्रह किया कि सूडान के लोगों के लिए समर्थन सुनिश्चित किया जाना होगा ताकि उनकी रक्षा की जा सके.
नवीनतम जानकारी के अनुसार, युद्ध से बदहाल सूडान में अर्द्धसैनिक बल (RSF) ने एक अन्य ‘लिबरेशन मूवमेंट’ नामक गुट (SPLM-N) के साथ मिलकर पिछले 48 घंटों में साउथ कोर्दोफ़ान के डिलिंग में रिहायशी इमारतों पर गोलाबारी की है.
सूडान की सशस्त्र सेना और अतीत में उसके सहयोगी रहे अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में, देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था.
26 अक्टूबर को, RSF ने नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर पर, 1.5 साल की घेराबन्दी के बाद, अपना क़ब्ज़ा किया, जिसके बाद वहाँ बड़े पैमाने पर विस्थापन और अत्याचार को अंजाम दिए जाने के आरोप सामने आए.
शहर में फँसे लोग बेहद कठिन परिस्थितियों में गुज़र-बसर कर रहे हैं और मूंगफली के छिलके और मवेशियों के चारे को खाने के लिए मजबूर हैं.
‘भयभीत लोग’
IOM मिशन प्रमुख ने कहा कि कोर्दोफ़ान से हुए विस्थापन छिटपुट ढंग से नहीं हो रहे हैं, बल्कि लोगों के भयभीत होने की वजह से ऐसा हो रहा है. उन्होंने बताया कि बाबानूसा, कडूग्ली और अल-ओबेद नामक शहरों से उनके भागने की ख़बरें हैं.
विस्थापित व्यक्तियों की स्थिति के प्रति गहरी चिन्ता व्यक्त की गई है. मोहम्मद रेफ़ात ने कहा कि केवल महिलाएँ व बच्चे ही व्हाईट नाइल और गेदारफ़ में पहुँच रहे हैं.
सूडान में गहरी असुरक्षा और हिंसा व्याप्त है और आम नागरिकों की जान पर जोखिम मंडरा रहा है, लेकिन उन तक सुरक्षित ढंग से मदद पहुँचाने के मार्ग में अवरोध हैं.
साउथ कोर्दोफ़ान की राजधानी कडूग्ली में विशेष रूप से हालात बिगड़ने के प्रति चिन्ता है, जहाँ कुछ ही दिन पहले एक ड्रोन हमले में छह बांग्लादेशी यूएन शान्तिरक्षकों की मौत हो गई थी.
सूडान और दक्षिण सूडान की सीमा पर स्थित विवादित क्षेत्र, आबिये में यूएन मिशन (UNISFA) के अन्तर्गत सेवारत ये शान्तिरक्षक, कडूग्ली में संयुक्त राष्ट्र के एक लॉजिस्टिक शिविर में तैनात थे.
लाखों ज़िन्दगियों पर जोखिम
IOM के वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद रेफ़ात के अनुसार, कडूग्ली में 90 हजा़र से अधिक लोग मौजूद हैं और यदि लड़ाई जारी रही तो वे विस्थापित होने के लिए मजबूर होंगे, और यदि उन्हें शहर से बाहर निकलने का रास्ता मिलता है.
वहीं, नॉर्थ कोर्दोफ़ान प्रान्त की राजधानी अल-ओबेद के जल्द ही हमले की चपेट में आने की आशंका है और वहाँ इसका असर 5 लाख से अधिक लोगों पर होगा.
उन्होंने अल फ़शर में संकट का उल्लेख करते हुए बताया कि वहाँ से अब तक एक लाख से अधिक लोग शहर छोड़कर भाग चुके हैं. इनमें बहुत से लोग अब भी पड़ोस के गाँवों में फँसे हुए हैं और सुरक्षा हालात व अन्य कारणों से वहाँ से कहीं और जा पाने में असमर्थ हैं.
यूएन मानवतावादी टीम ने पहले ही चेतावनी जारी की है कि गुज़र-बसर के लिए अति-आवश्यक सामान की भीषण क़िल्लत है.
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के मानवीय सहायता अभियान पर धनराशि कटौती का गहरा असर हुआ है और केवल इसी वर्ष 8.3 करोड़ डॉलर के संसाधन ख़त्म हो गए हैं, जिसका असर राहत प्रयासों के दायरे पर हुआ है.
उन्होंने बताया कि इन कटौतियों की वजह से, यह चुनना पड़ रहा है कि किसके जीवन को बचाया और किस समर्थन को रोका जाए. इसलिए, हम उन स्थानों पर जाएंगे, जहाँ लोग बुरी तरह से ज़रूरतमन्द हैं, लेकिन हम सभी की सहायता करने में असमर्थ होंगे, चूँकि हमें उन्हें बचाना है, जिनकी जान जा रही है.