श्रीलंका: चक्रवात ‘दित्वाह’ से बेघर हुए लोगों की सहायता के लिए, IOM की अपील
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने श्रीलंका में चक्रवाती तूफ़ान ‘दित्वाह’ से प्रभावित 1 लाख से अधिक लोगों तक सहायता पहुँचाने के इरादे से 73 लाख डॉलर की अपील जारी की है. यूएन प्रवासन एजेंसी ने कहा है कि निरन्तर विस्थापन, ध्वस्त घरों और आवश्यक सेवाओं व सामान की क़िल्लत से जूझ रहे परिवारों के लिए जोखिम है और उन्हें जल्द से जल्द समर्थन मुहैया कराया जाना होगा.
चक्रवाती तूफ़ान ‘दित्वाह’ 28 नवम्बर को श्रीलंका के तटीय इलाक़ों से टकराया था. इस दौरान तेज़ हवाओं, भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाएँ हुईं और देश को पिछले दो दशकों में सबसे गम्भीर बाढ़ से जूझना पड़ा.
यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) के अनुसार, इस आपदा में 600 से अधिक लोगों की जान गई, 2.80 लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए और हज़ारों घर बर्बाद हो गए.
तूफ़ान से सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य केन्द्रों को भारी नुक़सान हुआ है और देश के 25 ज़िलों में 22 लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में आए हैं.
बहुत से विस्थापित परिवार अपने रिश्तेदारों या अन्य परिवारों के साथ रह रहे हैं, वहीं अन्य ने घर क्षतिग्रस्त होने, सीमित सेवाओं या सुरक्षा चिन्ताओं की वजह से आश्रय स्थलों पर शरण ली है.
श्रीलंका में IOM की मिशन प्रमुख क्रिस्टीन पार्को ने बताया कि हर एक संख्या के पीछे एक व्यक्ति है, जिसकी सुरक्षा, गरिमा व अधिकारों को ध्यान में रखते हुए हमें कार्रवाई करनी होगी.
“एक ऐसे क्षण में, लोगों को सुरक्षा, समर्थन व फिर से स्थिरता पाने का एहसास कराने की ज़रूरत है.”
स्थानीय समुदायों पर असर
पहले से ही जलवायु सम्बन्धी समस्याओं की वजह से सम्वेदनशील परिस्थितियों में जीवन गुज़ार रहे समुदायों के लिए ‘दित्वाह’ तूफ़ान के कारण जटिल चुनौतियाँ उपजी हैं. खेती, मछली पकड़ने, दैनिक मज़दूरी और लघु व्यवसाय समेत अन्य समुदायों की आजीविका के साधनों को नुक़सान हुआ है, और घर-परिवार की गुज़र-बसर की क्षमता पर असर हुआ है.
तूफ़ान व भूस्खलन के कारण फ़सलों, मवेशियों, मछली पकड़ने के उपकरणों और अन्य सामान को नुक़सान पहुँचा है, जिससे निर्धन तबका अधिक प्रभावित हुआ है.
IOM की वरिष्ठ अधिकारी क्रिस्टीन पार्को ने बताया कि बुधवार को जारी की गई इस अपील में तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, साथ ही, श्रीलंका सरकार के नेतृत्व में समुदायों को इस आपदा से उबरने और जीवन को फिर से पटरी पर लाने में मदद दी जाएगी.
यूएन प्रवासन एजेंसी की योजना, इस आपदा के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए संरक्षण, स्वास्थ्य देखभाल व मनोसामाजिक समर्थन, जल, साफ़-सफ़ाई तक राहत पहुँचाने की है. मानवीय सहायता समर्थन के साथ ही, जल्द पुनर्बहाली के लिए ज़मीन भी तैयार की जाएगी.
आपदा से उबारने के लिए समर्थन
इस अपील के ज़रिए, IOM का उद्देश्य 78 हज़ार लोगों के लिए आपात आश्रय सहायता की व्यवस्था और दैनिक गुज़र-बसर के लिए ज़रूरी सामान का प्रबन्ध करना है. इसके अलावा, सरकार द्वारा संचालित आश्रय केन्द्रों को भी मदद दी जाएगी और बेघर होने वाले लोगों को लक्षित ढंग से नक़दी समर्थन भी दिया जाएगा.
स्वास्थ्य केन्द्रों के क्षतिग्रस्त हो जाने की वजह से, IOM ने मोबाइल क्लीनिक के ज़रिए 10 हज़ार लोगों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है, और 20 हज़ार लोगों के लिए आपात जल आपूर्ति, साफ़-सफ़ाई व्यवस्था का ध्यान रखा जाएगा.
यूएन प्रवासन एजेंसी ने लिंग-आधारित हिंसा, विकलांगजन की ज़रूरतों और बाल संरक्षण चिन्ताओं के मद्देनज़र संरक्षण सेवाओं पर भी बल दिया है.
यूएन एजेंसी के अनुसार, तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करके, पुनर्बहाली के लिए समर्थन के ज़रिए समुदायों को फिर से अपनी आजीविका स्रोत को खड़ा करने, जीवन शुरू करने और समुदायों को सहनसक्षम बनाने के लिए समय पर निवेश किया जाना अहम है.