ग़ाज़ा: भीषण सर्दी व सहायता अवरोधों के बीच नाज़ुक युद्धविराम ने बढ़ाई मुश्किलें
ग़ाज़ा में नाज़ुक परिस्थितियों में लागू युद्धविराम के बीच निरन्तर हमले हो रहे हैं और ज़रूरतमन्द फ़लस्तीनी आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए अवरोधों से जूझना पड़ रहा है. मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद की बैठक में इसराइल और हमास से युद्धविराम व अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का पूर्ण रूप से पालन करने और अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया है.
यूएन के वरिष्ठ अधिकारी ने सदस्य देशों को वर्तमान हालात से अवगत कराते हुए कहा कि ग़ाज़ा को मौजूदा स्थिति से उबारने और वहाँ पुनर्निर्माण के लिए यह ज़रूरी है कि युद्धविराम को ठोस बनाया जाए.
“संयुक्त राष्ट्र इन प्रयासों को समर्थन देने के लिए तैयार है.”
विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने कहा कि ग़ाज़ा में सहायता आपूर्ति का स्तर बढ़ा है और बाज़ारों में भी खाद्य सामग्री की स्थिति अब बेहतर हुई है, लेकिन अधिकाँश आबादी के लिए प्रोटीन के स्रोत अब भी पहुँच से दूर हैं.
वहीं, स्वच्छ जल, मेडिकल देखभाल और आश्रय व्यवस्था की भी गम्भीर कमी है.
7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों के हमलों के बाद, इसराइली बलों ने बड़े पैमाने पर ग़ाज़ा में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी और हिंसक टकराव में विशाल स्तर पर जान-माल की हानि हुई है.
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के आधार पर अक्टूबर में लड़ाई पर विराम लग गया. मध्यस्थता प्रयासों में क़तर, तुर्कीये और मिस्र ने अहम भूमिका निभाई.
विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने येरूशलम से सम्बोधित करते हुए इसराइल व हमास से आग्रह किया कि युद्धविराम को पूर्ण रूप से लागू करना होगा, अधिकतम संयम बरतना होगा और यूएन के प्रासंगिक प्रस्तावों समेत अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का पालन किया जाना चाहिए.
सर्दी से एक शिशु की मौत
ग़ाज़ा में सर्दी के मौसम में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ फ़लस्तीनी आबादी में टैंट, कम्बल और अन्य आवश्यक सामान की आपूर्ति करने में जुटी हैं. मगर, स्थिति अब भी गम्भीर है और ठंड की चपेट में आने का जोखिम बढ़ रहा है.
रमीज़ अलकबरोव ने कहा कि यह त्रासदीपूर्ण है कि हाइपोथर्मिया सम्बन्धी कारणों से पहली मौत, ख़ान युनिस में 2 सप्ताह के एक नवजात शिशु की हुई है.
उनके अनुसार, ग़ाज़ा में संयुक्त राष्ट्र व उसके साझेदार संगठनों की संचालन व्यवस्था को बनाए रखना, उसका विस्तार करना बहुत अहम है. और साथ ही, ग़ाज़ा में ग़ैर-सरकारी संगठनों के पंजीकरण को नवीनीकृत करना होगा.
विशेष उप समन्वयक ने कहा कि ग़ाज़ा पट्टी में खाद्य सुरक्षा की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन मानवीय सहायता मार्ग में लॉजिस्टिक व सुरक्षा सम्बन्धी चुनौतियाँ बरक़रार हैं.
इसके मद्देनज़र, उन्होंने सभी पक्षों से मानवीय सहायता के लिए बेरोकटोक रास्ता मुहैया कराए जाने की अपील की है.
गम्भीर मानवीय हालात
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि भीषण बारिश से आम फ़लस्तीनियों के लिए चुनौती और गहरी हुई है.
“हमारे साझेदारों ने बताया है कि तूफ़ान, बीती रात और आज भी जारी रहा जिससे आपात शरण स्थलों के रूप में चिन्हित 40 केन्द्रों में गम्भीर जलभराव की स्थिति है. इनमें अधिकाँश ख़ान युनिस और ग़ाज़ा सिटी में हैं.”
एक अनुमान के अनुसार, बाढ़ या अन्य वजहों से 700 टैंट क्षतिग्रस्त हुए हैं और इसका असर हज़ारों लोगों पर पड़ा है. विस्थापन केन्द्रों पर मौजूद टीमें अवरुद्ध नालियों को साफ़ करने और बाढ़ के पानी को हटाने में जुटी हैं.
उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने कहा कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर आम लोगों तक सहायता पहुँचाने में जुटा है.
सोमवार को, इसराइली प्रशासन के समन्वय से सहायता सामग्री की 9 खेप रवाना की गईं. फ़रहान हक़ ने कहा कि इन मिशन से केरेम शलोम और ज़िकिम सीमा चौकियों पर महत्वपूर्ण आपूर्ति की व्यवस्था में मदद मिली है. इनमें भोजन, कम्बल, ईंधन, टैंट और सर्दी के कपड़े हैं.