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एआई की सम्भावनाओं, चुनौतियों और सुलभता पर, यूएन मुख्यालय में चर्चा

संयुक्त राष्ट्र में भारत और फ़्रांस के मिशनों ने, 19-20 February 2026 को नई दिल्ली में होने वाली एआई शिखर बैठक के सिलसिले में, एक कार्यक्रम मंगलवार, 16 दिसम्बर (2025) को, यूएन मुख्यालय में आयोजित किया.
Permanent Mission of India to the UN
संयुक्त राष्ट्र में भारत और फ़्रांस के मिशनों ने, 19-20 February 2026 को नई दिल्ली में होने वाली एआई शिखर बैठक के सिलसिले में, एक कार्यक्रम मंगलवार, 16 दिसम्बर (2025) को, यूएन मुख्यालय में आयोजित किया.

एआई की सम्भावनाओं, चुनौतियों और सुलभता पर, यूएन मुख्यालय में चर्चा

एसडीजी

कृत्रिम बुद्धिमता (AI) अपने भीतर ऐसी अपार सम्भावनाएँ समेटे हुए हैजिनमें नवाचारसामाजिक विकाससमावेशी प्रगति को बढ़ावा देने के साथ, मानव जीवन के हर एक पहलू की कायापलट कर देने की क्षमता है. इस टैक्नॉलॉजी का लाभ हर किसी तक पहुँचाने के उपायों पर चर्चा की श्रृंखला में, 19-20 फ़रवरी 2026 को, भारत की राजधानी नई दिल्ली में ‘India-AI Impact’ शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इस सम्मेलन की तैयारियों के सिलसिले मेंयूएन में भारत और फ़्रांस के स्थाई मिशनों ने एक कार्यक्रम - 'From Action to Impact', मंगलवार को न्यूयॉर्क मुख्यालय में आयोजित किया. इस कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग यहाँ देखी जा सकती है.

एआई को अब केवल एक तकनीकी नवाचार के रूप में नहीं, बल्कि समावेशी विकास को सक्षम करने और उन अवसरों तक पहुँच बढ़ाने वाले रणनीतिक उपकरण के रूप में देखा जा रहा है.

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हालाँकि, समाज में एआई के तेज़ी से होते प्रसार से, अनेक गम्भीर चुनौतियाँ भी उपजी हैं.

इनमें पारम्परिक रोज़गार संरचनाओं में बदलाव, मौजूदा सामाजिक और तकनीकी पक्षपात का और गहराना शामिल है. इन चुनौतियों पर तत्काल और सामूहिक ध्यान देने की आवश्यकता है.

'India - AI Impact Summit 2026' का उद्देश्य इस बात पर वैश्विक सहमति बनाना है कि एआई से होने वाला प्रभाव सभी तक न्यायसंगत और समान रूप से पहुँचे.

यह शिखर सम्मेलन केवल सम्वाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एआई के वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर केन्द्रित होगा.

साझा कार्रवाई अनिवार्य

प्रौद्योगिकी मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के दूत अमनदीप सिंह गिल ने मंगलवार के कार्यक्रम में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से मिलने वाले लाभ जितने परिवर्तनकारी हैं, उसके जोखिम भी उतने ही दूरगामी हैं, इसलिए अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को टालना अब सम्भव नहीं है.

अमनदीप सिंह गिल के अनुसार, एआई का प्रभाव वैश्विक स्तर पर इतना तेज़ और व्यापक है कि इसकी संचालन व्यवस्था और दिशा को लेकर, साझा कार्रवाई अनिवार्य हो गई है.

उन्होंने याद दिलाया कि महासचिव द्वारा 2020 में प्रस्तुत डिजिटल सहयोग रोडमैप में, यह स्पष्ट किया गया है कि वैश्विक डिजिटल और एआई मंचों पर, प्रतिनिधित्व की भारी कमी है.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने, डिजिटल कॉम्पैक्ट के तहत किए गए वादों को आगे बढ़ाते हुए, अगस्त 2025 में सर्वसम्मति से एक स्वतंत्र वैज्ञानिक पैनल और एआई संचालन व्यवस्था पर वैश्विक सम्वाद मंच की स्थापना की है.

यह क़दम एआई के सुरक्षित, ज़िम्मेदार और समावेशी प्रयोग की दिशा में, एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

अमनदीप सिंह गिल ने कहा, “एआई जितनी तेज़ी से आगे बढ़ी है, उतनी ही तेज़ी से बहुपक्षीय सहयोग भी आगे बढ़ा है.”

उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में फ़रवरी 2026 में होने वाला AI शिखर सम्मेलन, एक ‘इम्पैक्ट समिट’ होगा, जो केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ठोस परिणामों पर केन्द्रित होगा.

“यह शिखर सम्मेलन ‘लोग, ग्रह और प्रगति’ के विषय पर आधारित होगा, जहाँ एआई को मानव कल्याण, सतत विकास और वैश्विक प्रगति के साधन के रूप में देखने पर बल दिया जाएगा.”

नैतिक, समावेशी और ज़िम्मेदार प्रयोग

भारत के इलैक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि अब एआई पर होने वाली वैश्विक चर्चा, केवल विचारों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब इसका केन्द्र “कार्रवाई और प्रभाव” बन चुका है.

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, इस बात पर व्यापक सहमति बनी है कि एआई पहले से ही अर्थव्यवस्थाओं, श्रम बाज़ारों और यहाँ तक कि नागरिकों व देशों के बीच सम्बन्धों को भी आकार दे रही है.

भारतीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि साथ ही यह साझा समझ भी उभरी है कि एआई के लाभों का लोकतांत्रिकरण अपने आप नहीं होगा. इसके लिए सोची-समझी नीतिगत पहल, ठोस और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है. एआई शिखर सम्मेलनों की यात्रा इसी विकास को दर्शाती है.

उन्होंने कहा कि पेरिस में आयोजित हुए एआई  शिखर सम्मेलन ने, एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि सिर्फ़ सिद्धान्त तय किया जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उन्हें धरातल पर कैसे लागू किया जाए.

इस शिखर सम्मेलन में प्रक्रियाओं और ठोस परिणामों पर बल दिया गया.

उन्होंने कहा कि एआई की विशिष्ट प्रकृति को ध्यान में रखते हुए चर्चाओं का निष्कर्ष यह रहा कि ज़िम्मेदार एआई का रूप मानव-केन्द्रित, समावेशी और विकास को केन्द्र में रखने वाला होना चाहिए.

आम लोगों के लिए एआई के मायने!

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत पी हरीश के अनुसार, एआई को देखने के कई नज़रिए हैं. अभी तक तीन शिखर सम्मेलन हो चुके हैं और चौथा सम्मेलन भारत में फ़रवरी 2026 में होने वाला है.

बात यही है कि आख़िर इन सम्मेलनों से हमारी क्या अपेक्षाएँ हैं. “हमें ये देखना होगा कि आम लोगों के लिए इस सबका क्या मतलब निकलता है. विकास के लिए इसका क्या अर्थ है, और एआई किस तरह आम लोगों के दैनिक जीवन को आसान बना सकती है.”

संयुक्त राष्ट्र में भारत और फ़्रांस के मिशनों ने, 19-20 February 2026 को नई दिल्ली में होने वाली एआई शिखर बैठक के सिलसिले में, एक कार्यक्रम मंगलवार, 16 दिसम्बर (2025) को, यूएन मुख्यालय में आयोजित किया.
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राजदूत पी हरीश ने कहा कि हम एआई को, लोगों के जीवन में व्यापक सुधार लाने वाला एक उपकरण या साधन मानते हैं. मगर इसमें एक महत्वपूर्ण पहलू ये है कि लोगों को इंटरनैट और डेटा तक कितनी आसान पहुँच मिलती है.

उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में मोबाइल फ़ोन आधारित इंटरनैट की व्यापक और किफ़ायती उपलब्धता ने, आम नागरिकों के लिए अवसरों के नए दरवाज़े खोले हैं और लोगों के दैनिक जीवन को बहुत आसान बनाया है, जिनमें कारोबार का संचालन और शिक्षा प्राप्ति व लोगों के बीच सम्पर्क आसान होना भी शामिल हैं.

उन्होंने साथ ही एक सवाल ये भी उठाया कि प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने में एक चुनौती ये है कि टैक्नॉलॉजी को उन लोगों के लिए कैसे आसान बनाया जाए, जो या तो कम पढ़े-लिखे हैं या बिल्कुल निरक्षर हैं.

उन्होंने बताया कि भारत में यह लक्ष्य, कारोबारी लेन-देन को आम लोगों तक पहुँचाकर और आसान बनाकर, हासिल किया गया जिसमें Digital Public Infrastructure (DPI) - डिजिटल सार्वजनिक ढाँचा ने, लोगों के बीच सम्पर्क आसान बनाने, शिक्षा, स्वास्थ्य और कारोबारी लेन-देन को बहुत आसान बना दिया. यह सम्भव हो सका है, DPI में समाहित भाषा के प्रयोग में आसानी से.

राजदूत पी हरीश ने कहा कि जब ये ढाँचागत ज़रूरतें पूरी हो जाएँ, तो एआई, लोगों के जीवन में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाली है.