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क़ाबिज़ पश्चिमी तट: नूर शम्स शिविर में ध्वस्तीकरण कार्रवाई के आदेश पर क्षोभ

पश्चिमी तट के नूर शम्स कैम्प में आम फ़लस्तीनी एक ध्वस्त इलाक़े से गुज़र रहे हैं. (फ़ाइल)
© UNRWA
पश्चिमी तट के नूर शम्स कैम्प में आम फ़लस्तीनी एक ध्वस्त इलाक़े से गुज़र रहे हैं. (फ़ाइल)

क़ाबिज़ पश्चिमी तट: नूर शम्स शिविर में ध्वस्तीकरण कार्रवाई के आदेश पर क्षोभ

शान्ति और सुरक्षा

इसराइल ने क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में स्थित नूर शम्स शिविर में इमारतों को ध्वस्त करने की कार्रवाई के लिए नए आदेश जारी किए हैं, जोकि सप्ताह से लागू होंगे. फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNRWA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे क्षेत्र के लिए व्यथित कर देने वाली ख़बर बताया है. 

क़ाबिज़ पश्चिमी तट में UNRWA से जुड़े मामलों के निदेशक रॉलैंड फ़्रेडरिष के अनुसार, 18 दिसम्बर से लगभग 25 इमारतों को ध्वस्त किए जाने की शुरुआत की आशंका है, जिससे जबरन विस्थापन का शिकार हुए सैकड़ों फ़लस्तीनियों पर असर होगा.

सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरें दर्शाती हैं कि नूर शम्स शिविर में स्थित 48 फ़ीसदी इमारतें इस आदेश से पहले ही या तो क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं या फिर ध्वस्त हो चुकी हैं.

UNRWA के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ध्वस्तीकरण कार्रवाई का यह नया आदेश, उसी रुझान का एक हिस्सा है, जिसे हम अक्सर पहले देख चुके हैं.

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उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पश्चिमी तट के उत्तरी हिस्से में शिविरों में अपने दीर्घकालिक नियंत्रण में लाने के लिए घरों को तबाह करना है, ताकि इस इलाक़े की तस्वीर स्थाई तौर पर बदल जाए.

रॉलैंड फ़्रेडरिष ने कहा कि ध्वस्तीकरण घटनाओं को सैन्य आवश्यकता के ज़रिए न्यायसंगत ठहराया जाता है लेकिन इससे कोई भी सुरक्षित नहीं होता है.

इस वर्ष जनवरी में, इसराइली सैन्य बलों ने पश्चिमी तट के उत्तरी हिस्से में बड़े पैमाने पर एक अभियान की शुरुआत की थी, जिससे हज़ारों फ़लस्तीनी शरणार्थी विस्थापित हुए.

इस कार्रवाई के तहत शुरुआती चरण में जिनीन शरणार्थी शिविर को निशाना बनाया गया था, लेकिन फिर उसका दायरा बढ़ाकर तुलकर्म, नूर शम्स और अल फ़रआ कैम्प तक कर दिया गया.

वापसी की धुंधली आशा

UNRWA निदेशक ने ज़ोर देकर कहा कि पश्चिमी तट के उत्तरी हिस्से में 32 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी शरणार्थियों का जबरन विस्थापन को स्थाई नहीं बनने देना होगा.

“स्थानीय निवासियों ने अपने घर लौटने के लिए बेचैनी के साथ 11 महीनों तक प्रतीक्षा की है. बुलडोज़र की हर एक चोट से, यह आशा अब और धुंधली बन रही है.”

UNRWA एजेंसी द्वारा मध्य पूर्व में 5 स्थानों पर 60 लाख फ़लस्तीनी शरणार्थियों को सहायता प्रदान की जाती है, जिनमें क़ाबिज़ पश्चिमी तट में स्थित 11 शिविर भी हैं.

13 हज़ार से अधिक लोगों को 2023 में नूर शम्स कैम्प में पंजीकृत किया गया था, जहाँ UNRWA के दो स्कूलों में 1,571 छात्रों की पढ़ाई होती है.

इसके साथ-साथ, फ़लस्तीनी शरणार्थियों को स्वास्थ्य देखभाल भी मुहैया कराई जाती है, जिनमें प्रजनन स्वास्थ्य, नवजात शिशु व बाल देखभाल, प्रतिरक्षण, मेडिकल जाँच समेत अन्य प्रकार की व्यवस्था है.

विस्थापन और विध्वंस

इस बीच, मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने सचेत किया है कि पश्चिमी तट में बढ़ती हिंसा व तनाव, गहरी  चिन्ता का विषय है.

उन्होंने मंगलवार को न्यूयॉर्क में सुरक्षा परिषद की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट के उत्तरी हिस्से में इसराइली सैन्य कार्रवाई से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, आबादी विस्थापन का शिकार हुई है और बड़े पैमाने पर विध्वंस हुआ है, विशेष रूप से शरणार्थी शिविरों में.

उन्होंने वीडियो लिन्क के ज़रिए जानकारी देते हुए कहा कि इन शिविरों में इसराइल की मौजदूगी, उन दायित्वों का उल्लंघन है, जो अवैध क़ब्ज़े का अन्त करने पर केन्द्रित हैं.

विशेष उप समन्वयक ने इसराइली बस्तियों के अनवरत विस्तार की निन्दा करते हुआ आगाह किया कि इससे तनाव बढ़ रहा है, फ़लस्तीनियों के लिए अपनी भूमि तक पहुँच पाना कठिन है और इसराइल के साथ लगे, सम्प्रभु फ़लस्तीनी राष्ट्र की सम्भावनाओं को चोट पहुँच रही है.

उन्होंने बताया कि यह ऐसे समय में हो रहा है जब इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा किए जाने वाले हमलों में उछाल आया है और क़ब्ज़ा और गहरा होता जा रहा है. यह अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और फ़लस्तीनी आत्म-निर्णय के अधिकार को कमज़ोर बनाता है.

यूएन के वरिष्ठ अधिकारी ने क़ाबिज़ पश्चिमी तट में ज़ैतून की कटाई के मौसम में हिंसक घटनाओं में हुई बढ़ोत्तरी की कठोर निन्दा की है.

रमीज़ अलकबरोव के अनुसार, बस्तियाँ बसाए जाने से जुड़ी गतिविधियाँ, इस वर्ष अपने चरम पर पहुँच गई हैं, और क़रीब एक दशक पहले यूएन की निगरानी शुरू होने के बाद से पहली बार ऐसा हुआ है.