दक्षिण सूडान: भारतीय शान्तिरक्षकों द्वारा 'मवेशी मदद' से सँवर रहे जीवन
दक्षिण सूडान में भारतीय शान्तिरक्षकों की एक पहल, मवेशी पालन की सदियों पुरानी परम्परा को जीवित रखने में अहम भूमिका निभा रही है.
दक्षिण सूडान के जोंगलेई और पड़ोसी ग्रेटर पीबोर प्रशासनिक क्षेत्र के मवेशी शिविरों में, जीवन आज भी एक प्राचीन लय में चलता है.
यहाँ मवेशी केवल जानवर नहीं हैं, वे समुदायों की पहचान हैं, सम्पत्ति हैं, सुरक्षा स्रोत हैं और पीढ़ियों से परिवारों व समुदायों को जोड़ने वाली एक डोर हैं.
मवेशियों का चौतरफ़ा महत्व
माना जाता है कि यहाँ एक किशोर लड़के की शिक्षा, मवेशी शिविर से शुरू हो जाती है, जहाँ वह दूध दुहना सीखता है, मवेशियों के झुंड की देखभाल और उनका पालन करना सीखता है.
विवाह की परम्परा में भी मवेशियों की केन्द्रीय भूमिका होती है. मवेशी, विवाह में दुल्हन के परिवार को दी जाने वाली पारम्परिक ‘सम्पदा’ है, जिसका विशेष सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है.
लेकिन यह सम्पदा एक ख़तरे को भी जन्म देता है. युवजन, मवेशियों की चोरी को रोकने के लिए, मैदानों में हथियार लेकर गश्त लगाते हैं, क्योंकि आधुनिक हथियारबन्द लुटेरे अब और भी घातक साबित हो रहे हैं.
फिर भी, मवेशियों से उपजा यह संघर्ष समस्या को सुलझाने में भी मदद करता है.
परम्परागत न्यायालय, मवेशियों का प्रयोग केवल मुआवज़े के लिए नहीं करते, बल्कि समुदायों के बीच शान्ति बहाल करने और हिंसा के चक्र को रोकने के लिए भी इनका प्रयोग किया जाता है.
हज़ारों मवेशियों का इलाज
दक्षिण सूडान में यूएन सहायता मिशन - UNMISS में तैनात भारतीय पशु चिकित्सकों का शान्तिरक्षक दल, स्थानीय समुदायों को उनके पालतू मवेशियों का स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद कर रहा है.
भारतीय शान्तिरक्षकों का उद्देश्य केवल झगड़ों को रोकना ही नहीं है, बल्कि मेल-जोल और शान्ति स्थापना को प्रोत्साहित करना तथा आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करना भी है.
उनकी नवीन पहल में, एक सचल पशु चिकित्सा शिविर का आयोजन शामिल है, जो अनेक इलाक़ों में मवेशी बस्तियों के बीच घूमकर सेवाएँ प्रदान कर रहा है.
इस दौरान, लगभग 3 हज़ार मवेशियों की जाँच की गई, उनकी बीमारियों का इलाज किया गया और उन्हें कीड़ों से बचाने के लिए मदद दी गई.
इसके अलावा, पशुपालकों को नि:शुल्क दवाइयाँ और पोषण सम्बन्धी सामग्री भी मुहैया कराई गई.
बेहतर होता जीवन
वहाँ मौजूद समुदायों के अनुसार, UNMISS के भारतीय पशु चिकित्सक शान्ति दल ने समुदाय की ज़िन्दगी में बदलाव लाने का काम किया है.
UNMISS द्वारा दवाइयों की सहायता और देखभाल से मवेशी स्वस्थ और मज़बूत हुए हैं, जोकि समुदायों की आजीविका, भोजन और शिक्षा के लिए अहम हैं.
साथ ही, यह समर्थन केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाएँ भी अब पशुपालन में सक्रिय हैं.
इस आयोजन का नेतृत्व लैफ़्टिनेंट कर्नल हरमनजीत सिंह गोराया कर रहे हैं. वे कठिन भौगोलिक इलाक़ों में, दूरदराज़ के समुदायों तक सहायता पहुँचा रहे हैं.
कर्नल हरमनजीत सिंह गोराया कहते हैं कि “दक्षिण सूडान में पशु चिकित्सा सेवाएँ बहुत सीमित हैं. यहाँ कई मवेशी पाँव और मुँह की बीमारी, ईस्ट कोस्ट बुख़ार, अनेक तरह के संक्रमण, परजीवी और त्वचा रोगों से प्रभावित हैं.”
भारतीय पशु चिकित्सक, पशुओं का इलाज़ करने के अलावा, समुदाय के सदस्यों को पशु रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबन्धन के तरीक़ों से जुड़ा प्रशिक्षण भी देते हैं.