सूडान: संकटग्रस्त अल फ़शर में मानवीय सहायता पहुँचाने पर 'सैद्धान्तिक सहमति'
सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में भीषण हिंसा की चपेट में आए अल फ़शर में अब भी हज़ारों लोगों के फँसे होने के प्रति गहरी चिन्ता व्याप्त है. इस बीच, यूएन मानवतावादी एजेंसियों ने हिंसाग्रस्त शहर में पहुँचने के लिए मानवीय सहायता मार्ग जल्द ही उपलब्ध होने का भरोसा जताया है.
सूडान पर नियंत्रण के लिए देश की सशस्त्र सेना और पहले कभी उसकी सहयोगी रहे अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में हिंसक टकराव भड़क उठा था, जिससे देश में जान-माल की भारी हानि हुई है और एक गम्भीर मानवीय संकट उपजा है.
नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त का अल फ़शर इस टकराव का एक केन्द्र रहा है, जहाँ क़रीब 1.5 साल की घेराबन्दी के बाद RSF लड़ाकों इस वर्ष अक्टूबर महीने के अन्त पर क़ब्ज़ा कर लिया था.
इसके बाद, वहाँ बदतरीन अत्याचारों को अंजाम दिए जाने के आरोप लगे और गुज़र-बसर के लिए ज़रूरी सामान पूर्ण रूप से बर्बाद हो गया. बड़ी संख्या में लोगों ने सुरक्षित आश्रय की तलाश में अन्य नज़दीकी इलाक़ों में शरण ली है, जबकि हज़ारों के अब भी वहाँ फँसे होने की आशंका है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) में आपात हालात की तैयारी व प्रतिक्रिया के लिए निदेशक रॉस स्मिथ ने बताया कि अल फ़शर में वर्तमान स्थिति के बारे में बहुत कम ही जानकारी है और यह भयावह है.
“हम जानते हैं कि वहाँ लगभग 70 हज़ार से एक लाख लोग अब भी शहर के भीतर फँसे हुए हैं.”
इससे पहले, यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने आगाह किया था कि संकट से घिरे लोग मूँगफली के छिलके, पशुओं का चारा खाकर दिन गुज़ारने के लिए मजबूर हैं. वहीं, सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों में जातीयता के आधार पर की गई आम नागरिकों की सामूहिक हत्याओं की वजह से ख़ून के धब्बे भी देखे गए थे.
राहत मार्ग पर समझौता
यूएन मानवीय सहायता एजेंसियों ने राहत पहुँचाने के लिए सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करना एक अहम प्राथमिकता बताई है. बताया गया है नैटवर्क ठप कर दिए जाने से अल फ़शर में मौजूद लोगों के साथ सम्पर्क नहीं हो पा रहा है.
जीवित बचे लोगों ने अपनी व्यथा को बयाँ करते हुए बताया कि अल फ़शर शहर एक अपराध स्थल है, जहाँ सामूहिक हत्याओं को अंजाम दिया गया, जले हुए शव हैं और बाज़ारों में सन्नाटा पसरा हुआ है.
WFP अधिकारी ने कहा कि उन्होंने अल फ़शर के लिए बेरोकटोक सहायता मार्ग मुहैया कराने का आग्रह किया है, ताकि शहर में फँसे लोगों तक मदद पहुँचाई जा सके.
उन्होंने बताया कि इस विषय में RSF के साथ सैद्धान्तिक रूप से समझौता हो चुका है, जिसमें शहर में प्रवेश के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं. इसलिए यह भरोसा है कि जल्द ही ऐसा किया जा सकेगा ताकि हालात की आरम्भिक समीक्षा की जा सके.
विशाल विस्थापन शिविर
WFP के वरिष्ठ अधिकारी रॉस स्मिथ ने कहा कि अल फ़शर से किसी तरह भाग निकलने में सफल होने वाले लोगों ने बेहद जोखिम भरे हालात में अपना सफ़र तय किया. सड़कों पर बारूदी सुरंगें और बिना फटी हुई विस्फोटक सामग्री बिखरी हुई है.
बड़ी संख्या में लोगों ने तवीला में शरण ली है, जो कुछ समय पहले तक एक छोटा सा रेगिस्तानी शहर था, जहाँ अब विशाल, दूर तक फैला हुआ विस्थापन शिविर आकार ले चुका है. यहाँ 6.50 लाख से अधिक लोगों ने आश्रय लिया है.
अन्य लोगों ने नॉर्दर्न स्टेट के अद दब्बाह में शरण ली है. बहुत से परिवारों ने पिछले कई महीनों से अकाल जैसे हालात और क्रूर अत्याचारों का सामना किया है और अब वे भीड़भाड़ वाले शिविरों में सीमित समर्थन के साथ रह रहे हैं.
WFP के समर्थन से सहायता क़ाफ़िलों को तवीला के लिए रवाना किया गया है, जिसमें अगले एक महीने के लिए 7 लाख लोगों के लिए आवश्यक सामान की व्यवस्था है.
1.2 करोड़ विस्थापित
सूडान, विश्व में सबसे बड़ा विस्थापन संकट वाला देश है, जहाँ 1.2 करोड़ से अधिक लोग देश की सीमाओं के भीतर और अन्य पड़ोसी देशों में विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं.
इस बीच, यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के एक अपडेट के अनुसार, 1 दिसम्बर के बाद से कोर्दोफ़ान क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति निरन्तर बिगड़ रही है.
एक सप्ताह की भीषण लड़ाई के बाद, RSF ने सूडानी सशस्त्र बलों के नियंत्रण वाले बाबनूसा में एक शिविर को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है, जोकि वैस्ट कोर्दोफ़ान में स्थित है.
वहीं, साउथ कोर्दोफ़ान में आम नागरिक काडुग्ली और डिलिंग जैसे शहरों में फँसे हुए हैं और महिलाएँ, बच्चे व बुज़ुर्ग किसी तरह से वहाँ निकलने के रास्ते ढूंढ रहे हैं, जबकि पुरुषों और युवाओं के सामने हथियारबन्द गुटों के चंगुल में फँसने का जोखिम है.