वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

ग़ाज़ा में जच्चा-बच्चा के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग पूरी तरह ‘ध्वस्त’

एक फिलिस्तीनी मां और उसके पांच बच्चे बारिश और हवा की एक रात के बाद गाजा शहर में एक टूटे हुए तम्बू के सामने खड़े हैं। वे सब कुछ खो चुके हैं और छह बच्चों के लिए केवल दो गद्दे और कंबल के साथ भयानक परिस्थितियों में रह रहे हैं।
© UNICEF/Mohammed Nateel ग़ाज़ा में भारी संख्या में महिलाएँ विस्थापित हैं और गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त चिकित्सा देखभाल नहीं मिल रही है.

ग़ाज़ा में जच्चा-बच्चा के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग पूरी तरह ‘ध्वस्त’

महिलाएँ

यूएन एजेंसियों का कहना है कि ग़ाज़ा में लगातार हो रहे हमलों में, जच्चा-बच्चा के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं. इसराइली हमले लगभग सारे अस्पतालों को तबाह कर रहे हैं, चिकित्सा सामान की आपूर्ति को काट रहे हैं, और प्रसव सम्बन्धी मौतों, गर्भपात होने और नवजात शिशुओं की मौतों के मामले बढ़ रहे हैं.

एजेंसियों ने गुरूवार को कहा है कि इसराइली हमलों में के कारण, बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हो रहा है और बहुत से लोग भूखे पेट रहने को मजबूर हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय – OHCHR ने बताया है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद युद्ध दौरान 70 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी लोग मारे गए हैं.

ग़ौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास सहित अनेक फ़लस्तीनी संगठनों ने, इसराइल के दक्षिणी इलाक़े में आतंकी हमला किया था जिसके बाद, इसराइल ने ग़ाज़ा पट्टी में पूर्ण स्तर का युद्ध शुरू कर दिया था.

मानवाधिकार कार्यालय का कहना है कि ग़ाज़ा में इसराइली हमलों में 94 प्रतिशत से अधिक अस्पताल पूरी तरह से या आंशिक रूप में तबाह हो चुके हैं जिनमें गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को ज़रूरी चिकित्सा देखभाल नहीं मिल पा रही है.

OHCHR के अनुसार, इसराइली नाकाबन्दी ने, लोगों के जीवित रहने के लिए ज़रूरी चीज़ों को, ग़ाज़ा में दाख़िल होने से रोका हुआ है, जिनमें चिकित्सा सामग्री और महिलाओं के गर्भाधान को बनाए रखे व बच्चों को सुरक्षित तरीक़े से जन्म देने के लिए ज़रूरी सामान शामिल है.

गाज़ा के अलीली अस्पताल में, एक हमले के बाद चिकित्सा उपकरण और मलबा को नष्ट कर दिया गया ।
United Nations

जच्चा-बच्चा बन रहे हैं निशाना

इसराइल के हमलों में जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों को निशाना बनाया जा रहा है. 

दिसम्बर 2023 में, ग़ाज़ा के सबसे बड़े गर्भ क्लीनिक पर गोलाबारी ने, 4,000 से अधिक भ्रूणों, 1,000 शुक्राणुओं और गर्भ अंडों के नमूनों को नष्ट कर दिया था.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने कहा है कि चिकित्सा कर्मियों को भी निशाना बनाया गया है. कार्यालय ने फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया है कि सितम्बर 2025 तक, 1,722 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो चुकी थी.

ग़ाज़ा में सेवाएँ देने वाली एक प्रसूति विशेषज्ञ डॉक्टर अम्बरीन सलीमी ने OHCHR को बताया, “हम जब चिकित्सा जाँच के लिए दौरा लगाते थे तो आसपास ही बमों से हमले हो रहे थे... कभी-कभी तो मानवरहित उड़ान मशीनें या ड्रोन आते हैं और नर्सों पर गोलियाँ चलाते हैं, कभी तो अस्पताल के गलियारे में भी उनका पीछा करते हैं.”

डॉक्टर अम्बरीन सलीमी ने बताया कि कुछ गर्भवती महिलाएँ तो बन्दूकों की गोलियों को ज़ख़्मों के साथ अस्पतालों में पहुँचीं और इनमें उनके पेट में भी गोलियाँ लगी थीं.

“कुछ महिलाएँ तो इतनी गम्भीर घायल थीं कि जीवित नहीं रह सकीं. अगर उनके ज़ख़्मों ने उनकी जान नहीं ली तो संक्रमणों ने उन्हें मौत के मुँह में धकेल दिया, क्योंकि उनका उपचार करने के लिए पर्याप्त चिकित्सा सामान व दवाएँ नहीं थे.”

ख़ाली पेट रहने की विवशता

इसराइली नाकाबन्दी ने, खाद्य पदार्थों और शिशु आहार की भारी क़िल्लत कर दी है.

ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि अक्टूबर 2025 तक, 463 फ़लस्तीनियों की मृत्यु, कुपोषण के कारण हो चुकी है, जिनमें 157 बच्चे थे.

गाजा में एक शरणार्थी शिविर में बच्चे कीचड़ भरे, बाढ़ग्रस्त इलाके में खड़े होकर चल रहे हैं।
UN News

यूनीसेफ़ के एक पदाधिकारी जोनाथन क्रिक्स ने ग़ाज़ा से यूएन न्यूज़ को बताया कि बच्चे और परिवार, अस्थाई तम्बुओं में ही, सर्दीले तूफ़ानों का सामना करने को विवश हैं. “सबकुछ गीला हो जाता है... गद्दे गीले हैं, बच्चों के कपड़े गीले हैं. इन हालात में जीवित रहना, बेहद कठिन है.”

पश्चिमी तट में नई निगरानी चौकी और सड़क

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने, पश्चिमी तट के जॉर्डन घाटी इलाक़े में, इसराइल द्वारा एक नई निगरानी चौकी और सड़के निर्माण पर चिन्ता व्यक्त की है.

क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र के लिए OHCHR के प्रमुख अजिथ सुंघाय ने कहा है कि इस बाधा से, फ़लस्तीनी समुदाय एक दूसरे से अलग हो जाएंगे और तूबास में रहने वाले किसान, अपनी ज़मीन से दूर हो जाएंगे.

उन्होंने आगाह किया कि यह बाधा व सड़क, पश्चिमी तट में बढ़ रहे विघटन की तरफ़ एक अन्य क़दम होगा, जिसका अन्ततः परिणाम, इलाक़े को हथियाने के रूप में होगा.

अजिथ सुंघाय ने कहा कि फ़लस्तीनियों के शरणार्थी दर्जे के अधिकर, एकतरफ़ा तौर पर उत्पीड़न भरे उपायों के ज़रिए ना तो छीने जा सकते हैं और ना ही उनमें फेरबदल किया जा सकता है.