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एक भारतीय सहित, 5 जलवायु कार्यकर्ताओं को यूएन का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान

एक ग्रीनहाउस में पौधों की देखभाल करते हुए सुप्रिया साहू मुस्कुरा रही हैं।
© UNEP/Florian Fussstetter भारत की सुप्रिया साहू को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने जलवायु दूरदर्शी के रूप में सम्मानित किया है.

एक भारतीय सहित, 5 जलवायु कार्यकर्ताओं को यूएन का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने, सतत जलवायु कार्रवाई के लिए, दुनिया भर से पाँच लोगों को सम्मानित किया है, इनमें एक नाम भारत की सुप्रिया साहू का भी है. इन सभी विजेताओं ने जलवायु न्याय से लेकर वन रक्षा और सतत शीतलन से जुड़े मुद्दों पर काम किया है, जिससे लोगों और पृथ्वी की स्थिति में वास्तविक बदलाव आए हैं.

इन पाँचों जलवायु कार्यकर्ताओं को, वर्ष 2025 के ‘Champions of the Earth’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. इसे संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान माना जाता है.

UNEP की कार्यकारी निदेशक इन्गेर ऐंडरसन ने कहा है कि जलवायु संकट के वैश्विक प्रभाव में वृद्धि के इस दौर में, समाज के हर क्षेत्र में नवाचार और नेतृत्व पहले से कहीं और ज़्यादा ज़रूरी हो गए हैं.

सुप्रिया साहू - भारत

पर्यावरणविद सुप्रिया साहू अत्यधिक गर्मी से निपटने के तरीक़ों को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं. इन तरीक़ों में शहरों को ठंडा रखने के लिए प्रकृति की पुनर्बहाली से लेकर, जलवायु परिवर्तन को मद्देनज़र रखते हुए, ढाँचा विकास को बढ़ावा देना शामिल है.

सुप्रिया साहू, तमिलनाडु सरकार में सहायक मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें  ‘प्रेरणा और कार्रवाई’ के लिए सम्मानित किया गया है.

उन्होंने कहा कि “तमिलनाडु जैसे प्रदेश के लिए, भविष्य के प्रति तैयार रहना बेहद ज़रूरी है, ताकि हम जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, उनके प्रभावों को कम करने व अनुकूलन के लिए सक्षम बन सकें. इस समय हम इन्हीं चुनौतियाँ का सामना कर रहे हैं.”

सुप्रिया साहू ने, इस चुनौती से निपटने के लिए स्कूलों में ‘ठंडी छत’ परियोजना की शुरुआत की, जिसके तहत छतों पर सौर परावर्तक रंग से पुताई की जाती है. इससे तापमान 5 से 8 डिग्री तक घट जाता है. 

उन्होंने कहा कि “आप कल्पना कर सकते हैं कि गर्मियों में कक्षा-कमरों का तापमान अक्सर 40 डिग्री से ऊपर पहुँच जाता है. ऐसे में तापमान में 5–8 डिग्री की कमी भी, छात्रों के लिए बड़ी राहत साबित होती है.”

सुप्रिया साहू, हरित तमिलनाडु मिशन का नेतृत्व कर रहीं हैं. इस मिशन के तहत, शीतलन प्रयासों में ‘ठंडी छत’ पहल और बड़े पैमाने पर पौधारोपण कार्यक्रम शामिल हैं. 

उन्होंने कहा, “अब तक हम 10 करोड़ से अधिक पेड़ लगा चुके हैं और यह अभियान पूरी रफ़्तार से जारी है. दूसरा कार्यक्रम, जिस पर हमें विशेष गर्व है, वह है मैंग्रोव पहल, जोकि तमिलनाडु का मैंग्रोव मिशन है.”

“हमने, स्थानीय समुदायों के सहयोग से, लगभग 4 हज़ार 300 हैक्टेयर क्षेत्र में नए मैंग्रोव लगाए हैं और लगभग 2 हज़ार 200 हैक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव बहाली का कार्य किया है.”

सुप्रिया साहू बताती हैं कि यह उपलब्धि केवल हमारी योजना और टीम के प्रयासों से ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को शामिल करने, उनसे सुझाव लेने और नर्सरी तैयार करने में, उनकी सक्रिय भागेदारी के कारण सम्भव हो सकी है.

प्रशान्त द्वीप का छात्र समूह

सिंथिया हूनुहु सहित चार लोग पोर्ट विला, वानुअतू में एक रास्ते पर चलते हुए बात कर रहे हैं।
© UNEP

प्रशान्त द्वीप के छात्र समूह को नीति नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया है. 

इस समूह की युवा नेता सिंथिया होनियूही ने, वर्ष 2024 में, हेग स्थित अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में अपनी आवाज़ बुलन्द की थी. 

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि जलवायु परिवर्तन उनके अपने देश, सोलोमन आइलैंड्स जैसे अन्य प्रशान्त द्वीप देशों को, विनाश की ओर धकेल रहा है.

सिंथिया होनियूही ने अपने गै़र-सरकारी संगठन (NGO) के माध्यम से, अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय से यह ऐतिहासिक राय प्राप्त की: देश, जलवायु नुक़सान को रोकने और मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए क़ानूनी रूप से ज़िम्मेदार हैं.

वह वैश्विक जलवायु क़ानून को नया आकार देने और संवेदनशील देशों को सशक्त बनाने में मदद कर रही हैं.

मैरियम इस्सोफ़ोउ - निजेर/फ़्रांस

मरियम इसुफू, एक महिला वास्तुकार, अपने स्टूडियो में एक भौतिक वास्तु मॉडल पर काम करती हैं।
© UNEP/Duncan Moore

मैरियम इस्सोफ़ोउ को उद्यमशील दृष्टिकोण के लिए सम्मानित किया गया है.  प्रिंसिपल और संस्थापक, मैरियम स्थानीय सामग्रियों और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित वास्तुकला के माध्यम से, साहेल क्षेत्र में, सतत और जलवायु-सहनशील इमारतों की परिभाषा बदल रही हैं.

वह अफ़्रीका के निर्माण वातावरण को, आकार देने वाले नए डिज़ाइनरों की पीढ़ी को प्रेरित कर रही है.

मैरियम इस्सोफ़ोउ ने निजेर में, ‘Hikma Community Complex’ जैसी परियोजना का एक नमूना पेश किया. इसमें शीतलन की तकनीकों का प्रयोग हुआ है, जो इमारतों को एयर कंडीशनिंग के बिना ही, क़रीब 10 डिग्री तक ठंडा रखती हैं.

इमाज़ोन - ब्राज़ील

रीतामारिया पेरेरा अमेज़ॅन वर्षावन में खड़ी है और ऊपर की ओर, छत की तरह फैले पेड़ों की पत्तियों की ओर देख रही है।
© UNEP/Thomas Mendel

ब्राज़ील की इमाज़ोन को विज्ञान और नवाचार के लिए पुरस्कार से नवाज़ा गया है.

उन्होंने, AI आधारित वनों की कटाई का पूर्वानुमान लगाने वाले मॉडल विकसित किए हैं, जो नीतियों को दिशा देते हैं और ऐमेज़ॉन वर्षावन की सुरक्षा में, क़ानून लागू करने में मदद करते हैं. 

साथ ही, यह मॉडल टिकाऊ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देते हैं.

विज्ञान और AI-संचालित भौगोलिक उपकरणों का इस्तेमाल करके, वनों की कटाई रोकने के प्रयासों में, इमाज़ोन का यह ग़ैर-लाभकारी अनुसंधान संस्थान, वन प्रशासन को मज़बूती देता है.

साथ ही, यह हज़ारों क़ानूनी मामलों का समर्थन करने और अवैध वनों की कटाई के असली पैमाने को उजागर करने में सफल रहा है, जिससे ऐमेज़ॉन घाटी में स्थाई और प्रणालीगत बदलाव आया है.

मैनफ़्रेडी कैलटागिरोन (मरणोपरान्त)

मैनेफ्रेडी काल्टाजीरोंे एक बादल भरे आसमान के नीचे बाढ़ से प्रभावित चावल के खेतों के बीच एक मिट्टी के रास्ते पर खड़ा है।
© UNEP

मैनफ़्रेडी कैलटागिरोन को जीवनकाल उपलब्धि (Lifetime Achievement) सम्मान दिया गया है. 

उन्होंने अपना पूरा पेशेवर जीवन, इस समय की सबसे गम्भीर चुनौतियों में से एक, जलवायु परिवर्तन, को समर्पित किया.

मैनफ़्रेडी कैलटागिरोन ने सभी के लिए उपलब्ध, विश्वसनीय और कारगर डेटा के माध्यम से, मौजूदा ज्ञान को प्रभावी जलवायु कार्रवाई में बदलने के प्रयासों का नेतृत्व किया.

उन्होंने, UNEP की अन्तरराष्ट्रीय मीथेन उत्सर्जन अनुसन्धान केन्द्र के पूर्व प्रमुख के रूप में, मीथेन उत्सर्जन में पारदर्शिता और विज्ञान-आधारित नीतियों को आगे बढ़ाया, जिससे मीथेन गैस के उत्सर्जन पर योरोपीय संघ के प्रथम नियमों और वैश्विक ऊर्जा नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.