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अफ़ग़ानिस्तान: जल्द सहायता नहीं मिली तो, संकट और गहराने की आशंका

इस्लाम क़ला सीमा के नज़दीक, वापिस लौट रहे लोग अफ़ग़ानिस्तान में प्रवेश कर रहे हैं.
© UN Women/Sayed Habib Bidell
इस्लाम क़ला सीमा के नज़दीक, वापिस लौट रहे लोग अफ़ग़ानिस्तान में प्रवेश कर रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान: जल्द सहायता नहीं मिली तो, संकट और गहराने की आशंका

शान्ति और सुरक्षा

अफ़ग़ानिस्तान में यूएन महासचिव की विशेष उप प्रतिनिधि ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश, एक साथ मानवीय, आर्थिक, राजनैतिक व मानवाधिकार संकट का सामना कर रहा है और वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनज़र यह ज़रूरी है कि स्थानीय समुदायों के लिए आवश्यक सहायता व अन्तरराष्ट्रीय समर्थन सुनिश्चित किया जाए.

विशेष उप प्रतिनिधि जॉर्जेट गैगनॉन ने सदस्य देशों को बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में महिलाएँ व लड़कियाँ लगभग पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से बाहर हैं. माध्यमिक व कॉलेज स्तर की शिक्षा में उनकी हिस्सेदारी पर पाबन्दी है और यह प्रतिबन्ध अब अपने चौथे वर्ष में है.

इससे अफ़ग़ानिस्तान की भावी पीढ़ियाँ, महिला डॉक्टर, शिक्षक, उद्यमियों और देश के विकास के लिए ज़रूरी नेतृत्व से वंचित हो रही हैं.

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मीडिया की आज़ादी पर भी अंकुश थोपे गए हैं, पत्रकारों को डराया धमकाया जा रहा है, उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है, सेंसरशिप लगाई जा रही है और सार्वजनिक विमर्श व भागेदारी के लिए स्थान सिकुड़ा है.

उप प्रतिनिधि के साथ, आपात राहत मामलों के लिए प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने भी सुरक्षा परिषद को अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि वर्ष 2026 में देश की आधी आबादी, 2.2 करोड़ लोगों को संरक्षण व मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी.

दबाव में सहायता अभियान

यूएन मानवतावादी कार्यालय के अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर के अनुसार, 4 वर्षों में यह पहली बार है जब भूख का सामना कर रहे लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है. 1.74 करोड़ अफ़ग़ान नागरिक अब खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं, जबकि सहायता धनराशि में कटौती के कारण उन्हें पर्याप्त राहत नहीं मिल पा रही है.

300 से अधिक पोषण सहायता केन्द्र बन्द हो चुके हैं, जिससे 11 लाख बच्चों के पास पोषण सुविधा नहीं बची हैं. स्वास्थ्य प्रणाली भी दरक रही है. 2025 में 422 स्वास्थ्य केन्द्रों को बन्द कर दिया गया था, जिससे 30 लाख से अधिक लोग जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं से दूर हो गए हैं.

पहले से ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियो को झेल रहे अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष, ईरान और पाकिस्तान से 26 लाख शरणार्थियों की भी वापसी हुई है, जिससे सीमित संसाधनों पर बोझ बढ़ा है. दो वर्ष में 40 लाख से अफ़ग़ान अपने देश वापसी कर चुके हैं. 

अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने कहा कि 2025 में वापसी करने वाले लोगों में 60 फ़ीसदी महिलाएँ व बच्चे हैं. वे एक ऐसे देश में लौट रहे हैं जहाँ महिलाओं को शिक्षा, कामकाज और कुछ मामलों में स्वास्थ्य देखभाल से दूर रखा जाता है.

अर्थव्यवस्था में कुछ वृद्धि दर्ज किए जाने के बावजूद, देश में चुनौतीपूर्ण आर्थिक हालात हैं. जॉर्जेट गैगनॉन ने विश्व बैन्क के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सकल घरेलू उत्पाद के 4.5 फ़ीसदी बढ़ने की सम्भावना है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय में 4 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है.

अफ़ीम पोस्त की खेती पर पाबन्दी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविकाएँ बर्बाद हो गई हैं. इस प्रतिबन्ध का अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर स्वागत किया गया है लेकिन ग्रामीण आय में 48 प्रतिशत की गिरावट आई है. साथ ही, वैकल्पिक आजीविका के लिए समर्थन का आग्रह किया गया है.

राहत अभियान पर असर

पिछले कुछ दशकों की तुलना में अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा हालात पहले से बेहतर हैं, लेकिन चरमपंथी गतिविधियों की वजह से, पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ रहा है. पिछले दो महीनों के दौरान सीमा चौकियों के बन्द होने क वजह से व्यापार और आम जनजीवन पर गहरा असर हुआ है.

मानवीय सहायता कार्यों में महिलाओं की भागेदारी के लिए भी चुनौतियाँ हैं. सितम्बर महीने से, यूएन की स्थानीय महिला कर्मचारियों को यूएन परिसर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है. टॉम फ़्लैचर ने इसे अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि इससे सहायता प्रयास पंगु हो सकते हैं.

“महिलाओं के बिना कोई भी कारगर मानवतावादी प्रयास नहीं किए जा सकते हैं...अफ़ग़ानिस्तान को उनकी ज़रूरत है.”

अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों को माध्यमिक स्तर की शिक्षा से दूर कर दिया गया है.
© UNICEF/Osman Khayyam

अन्तरराष्ट्रीय समर्थन की अपील

मौजूदा कठिनाइयों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ अफ़ग़ानिस्तान में ज़रूरतमन्द समुदायों तक राहत पहुँचाने में जुटी है. भूकम्प, सूखे और बड़े पैमाने पर शरणार्थियों की वापसी से उपजे हालात से निपटने के लिए 4 करोड़ डॉलर की आपात धनराशि आवंटित की गई है.

लेकिन सहायता अभियान के लिए धन कटौती होने से जिन्दगियों पर असर हो रहा है.

अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने कहा कि 2026 में, एक ऐसे समय में जीवनरक्षक सहायता में कमी आने का जोखिम है, जब खाद्य असुरक्षा, स्वास्थ्य व संरक्षण ज़रूरतों की मांग बढ़ रही है.

इसके मद्देनज़र, यूएन अवर महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से तुरन्त समर्थन का आग्रह करते हुए आगाह किया है कि यदि जल्द सहायता नहीं मिली तो यह संकट और बदतरीन रूप धारण कर सकता है.