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ग़ाज़ा: नवजात शिशुओं पर जन्म के साथ ही, युद्ध के विनाश का जानलेवा साया

गाजा में संयुक्त राष्ट्र सशस्त्र बलों के एक स्वास्थ्य केंद्र में एक कुपोषित फिलिस्तीनी बच्चे को कंबल में लपेटा गया है।
© UNRWA/Hussein Owda ग़ाज़ा में युद्ध में हो रही भारी तबाही के बीच, बड़ी संख्या में बच्चे और वयस्क, कुपोषण के शिकार भी हो रहे हैं.

ग़ाज़ा: नवजात शिशुओं पर जन्म के साथ ही, युद्ध के विनाश का जानलेवा साया

स्वास्थ्य

ग़ाज़ा में, भूख से जूझ रही माताओं की हालत लगातार बिगड़ रही है. इन कमज़ोर हालात में वो अपने बच्चों को जन्म दे रही हैं जो या तो कम वज़न के साथ या समय से पहले ही पैदा हो रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि इन नवजातों में अनेक शिशु, गहन चिकित्सा इकाइयों (ICUs) में दम तोड़ रहे हैं, जबकि अन्य शिशु, गम्भीर कुपोषण से जूझ रहे हैं.

यूनीसेफ़ की संचार प्रबन्धक टेस इनग्राम ने बताया है कि इसराइल और हमास के बीच युद्ध के दौरान, लगभग 165 बच्चों की मौत कुपोषण की वजह से हुई, जबकि इन दर्दनाक मौतों को टाला जा सकता था.

ग़ाज़ा में, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, गम्भीर भूख से जूझ रही हैं, जिसका विनाशकारी असर हज़ारों नवजात शिशुओं पर पड़ रहा है.

जीवित रहने के लिए संघर्ष

यूनीसेफ़ की टेस इनग्राम के अनुसार, कई नवजात शिशुओं का वज़न एक किलो से कम है, और वे जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

टेस इनग्राम ने कहा कि कम वज़न वाले नवजात शिशुओं की मौत की सम्भावना, सामान्य वज़न वाले शिशुओं की तुलना में लगभग 20 गुना अधिक होती है.

उन्होंने बताया कि ग़ाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2022 के युद्ध से पहले, हर महीने औसतन 250 बच्चों का जन्म, 2.5 किलो से कम वज़न के साथ हुआ.

जबकि, वर्ष 2025 की पहली छमाही में, ग़ाज़ा में कम वज़न वाले नवजात शिशुओं का अनुपात, 10 प्रतिशत तक बढ़ गया जोकि प्रतिमाह 300 शिशुओं के जन्म के बराबर था. 

एक नवजात शिशु सफेद कंबल में लिपटा हुआ रो रहा है। यह तस्वीर फिल्म निर्माता बिसान ओउदा की गाजा में प्रसव संबंधी चुनौतियों पर आधारित एक रिपोर्ट का हिस्सा है।
© UNFPA/Bisan Ouda

और युद्धविराम लागू होने के पहले तीन महीने में, कम वज़न के साथ पैदा होने वाले बच्चों की संख्या 460 प्रतिमाह तक पहुँच गई.

माताओं में पोषण की कमी...

टेस इनग्राम ने बताया कि कम वज़न वाले नवजात शिशुओं के जन्म के प्रमुख कारण, माताओं को ख़राब पोषण मिलना, तनाव में वृद्धि और प्रसव से पहले सीमित देखभाल हैं. 

ग़ाज़ा में, युद्ध के प्रभाव झेलते हुए, इन समस्याओं का समाधान पर्याप्त गति और पैमाने पर नहीं हो पा रहा है.

उन्होंने कहा कि केवल इस साल अक्टूबर में ही, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली 8 हज़ार 300 महिलाओं को, गम्भीर कुपोषण के उपचार के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों में भर्ती कराया गया. 

जबकि, ये वही स्थान है जहाँ अक्टूबर 2023 से पहले तक, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में, कुपोषण के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं पाए जाते थे.

संकट अभी समाप्त नहीं हुआ

उन्होंने कहा, "यह स्थिति एक गम्भीर चेतावनी है, जिसके कारण आने वाले महीनों में, ग़ाज़ा पट्टी में कम वज़न के साथ नवजात शिशुओं का जन्म होगा…यह संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है."

यूनीसेफ़ प्रवक्ता ने बताया कि उनकी संस्था, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में, कुपोषण रोकने के लिए सहायता उपलब्ध करवा रही है. 

साथ ही, यूनीसेफ़, छोटे बच्चों में गम्भीर कुपोषण के लिए जाँच और उपचार के लिए चिकित्सीय सहायता मुहैया करा रहा है.

गाजा पट्टी के अल-बुरेज कैंप में एक फिलिस्तीनी मां अपनी कुपोषण से ग्रस्त छोटी बेटी को तंबू में पकड़े हुए है।
© UNICEF/Eyad El Baba

टेस इनग्राम ने, रफ़ाह सीमा चौकी को खोल जाने की ज़रूरत पर बल दिया. ऐसा करने से, ग़ाज़ा में मानवीय सहायता का प्रवेश बढ़ेगा और ज़रूरतमन्दों तक राहत सामग्री पहुँच पाएगी.

उन्होंने सभी प्रकार की मदद, विशेषकर पोषणयुक्त भोजन, व्यवसायिक मार्गों से पहुँचाने और स्थानीय बाज़ारों में आपूर्ति बढ़ाने की आवश्यकता का ज़िक्र किया.

पीड़ा रोकी जा सकती थी...

उन्होंने आगाह किया कि इस जद्दोजहद का पीढ़ीगत प्रभाव, माताओं और नवजात शिशुओं पर, लगातार देखा जा रहा है. इस स्थिति को रोका जा सकता है.

टेस इनग्राम ने कहा कि कोई बच्चा अपने जन्म से पहले, युद्ध की तबाही से प्रभावित नहीं होना चाहिए. 

उनका कहना है कि इसराइल के सहायता प्रतिबन्धों ने अस्पतालों को ख़ाली कर दिया है, और माताओं को भूखा व तनावग्रस्त बना दिया है.

अगर अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का पालन किया जाता, तो इतनी पीड़ा को रोका जा सकती था.