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लेबनान: इसराइली हवाई कार्रवाई के बाद, यूएन शान्तिरक्षा मिशन ने किया आगाह

दक्षिण लेबनान में एक सड़क पर भारतीय UN शांति सैनिक लेबनानी सशस्त्र बलों के साथ पैदल गश्त कर रहे हैं।
Indian peacekeepers on deployment with the UN patrol along the Blue Line in southern Lebanon. (file) दक्षिणी लेबनान में ब्लू लाइन के नज़दीक UNIFIL मिशन के तहत भारतीय शान्तिरक्षक गश्त लगा रहे हैं.

लेबनान: इसराइली हवाई कार्रवाई के बाद, यूएन शान्तिरक्षा मिशन ने किया आगाह

शान्ति और सुरक्षा

लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा मिशन (UNIFIL) ने अपनी गतिविधि व संचालन क्षेत्र के दायरे में सिलसिलेवार ढंग से इसराइली हवाई हमलों को सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का स्पष्ट उल्लंघन बताया है.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब लेबनान के सशस्त्र बलों द्वारा दक्षिणी लेबनान में अनधिकृत हथियारों और अवैध ढाँचों पर नियंत्रण करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है.

यूएन मिशन ने शुक्रवार को जारी अपने एक वक्तव्य में सचेत किया है कि ये कार्रवाई, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का स्पष्ट उल्लंघन है.

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साथ ही, इसराइली सुरक्षा बलों से आग्रह किया है कि उन्हें समन्वय व सम्पर्क के लिए उपलब्ध व्यवस्था का इस्तेमाल करना होगा. “हम लेबनानी पक्ष को ऐसी किसी प्रतिक्रिया के विरुद्ध सतर्क करते हैं, जिससे हालात और अधिक बिगड़ सकते हों.”

यूएन मिशन ने बताया है कि बीती रात, तीन मोपेड पर सवार छह लोग गश्त लगा रहे शान्तिरक्षकों के पास पहुँचे और एक व्यक्ति ने उनके वाहन पर गोलियाँ चलाईं. इस घटना में किसी के घायल होने की ख़बर नहीं है.

UNIFIL ने ज़ोर देकर कहा कि शान्तिरक्षकों पर हमले अस्वीकार्य हैं और प्रस्ताव 1701 का गम्भीर उल्लंघन हैं, जिसके तहत वर्ष 2006 में इसराइली सैन्य बलों और हिज़बुल्लाह के बीच हिंसक टकराव का अन्त हुआ था.

“हम लेबनानी प्रशासन को ध्यान दिलाते हैं कि उन्हें शान्तिरक्षकों की सुरक्षा व सलामती सुनिश्चित करने के लिए अपने दायित्वों को निभाना होगा.” साथ ही, दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए तुरन्त जाँच कराए जाने की मांग की गई है.

यूएन मिशन दक्षिणी लेबनान में हालात की निगरानी में जुटा है और शान्ति समझौते को लागू करने के लिए दोनों पक्षों को समर्थन प्रदान किया जा रहा है.

इसराइल और दक्षिणी लेबनान के बीच स्थित, ब्लू लाइन एक ऐसा तटस्थ क्षेत्र है, जिस पर UNIFIL शान्तिरक्षकों द्वारा गश्त लगाई जाती है.

सुरक्षा परिषद ने, लेबनान के दक्षिणी इलाक़े से इसराइली सैनिकों की वापसी की निगरानी करने के लिए वर्ष 1978 में UNIFIL मिशन स्थापित किया था. इस समय मिशन में लगभग 10 हज़ार से अधिक शान्तिरक्षक तैनात हैं.

यूएन मिशन का कार्यकाल, वर्ष 2006 में इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच लड़ाई के बाद बढ़ा दिया गया था. सुरक्षा परिषद ने 2006 के संकट व युद्ध के बाद, इस मिशन को नए सिरे से मज़बूती प्रदान की और उसके मूल अधिदेश के अलावा भी अन्य दायित्व सौंपे गए.

इस मिशन का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच टकराव में कमी लाना, दक्षिणी लेबनान से इसराइल की वापसी के बाद लेबनान के सशस्त्र बलों को समर्थन देना, और विस्थापितों की सुरक्षित वापसी को सुनिश्चति करना है.

ग़ाज़ा युद्ध की पृष्ठभूमि में, इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच नवम्बर 2024 में युद्धक गतिविधियाँ रुकने के बाद, UNIFIL ने, उन इलाक़ों में लेबनान की राष्ट्रीय सेना की फिर से तैनाती में समर्थन दिया है, जहाँ देश अपना अधिकार स्थापित करने के लिए प्रयासों में जुटा है. कुछ इलाक़ों में, इसराइल ने अपने सैन्य ठिकाने बनाए हुए हैं.