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क़ाबिज़ पश्चिमी तट: फ़लस्तीनी नागरिक समाज पर बढ़ते दबाव पर गहरी चिन्ता

फ़लस्तीन में ज़ैतून की खेतीबाड़ी, आजीविका और विरासत का हिस्सा है.
© Agricultural Development Association – PARC
फ़लस्तीन में ज़ैतून की खेतीबाड़ी, आजीविका और विरासत का हिस्सा है.

क़ाबिज़ पश्चिमी तट: फ़लस्तीनी नागरिक समाज पर बढ़ते दबाव पर गहरी चिन्ता

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइली सैन्य बलों द्वारा कृषि समिति संघ के कार्यालयों पर धावा बोलने और वहाँ तोड़ने की घटना की निन्दा की है. यूएन कार्यालय ने चिन्ता जताई है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इसराइल द्वारा फ़लस्तीनी नागरिक समाज और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने के मामलों में तेज़ी दर्ज की गई है. 

कृषि से जुड़े कामकाज के लिए समितियों का संघ (UAWC) एक फ़लस्तीनी, ग़ैर-सरकारी संगठन है जिसके कार्यालय रामल्लाह और हेब्रॉन में स्थित हैं. सोमवार, 1 दिसम्बर को हुई इसराइली कार्रवाई के दौरान वहाँ उपस्थित 8 लोगों को हिरासत में ले लिया गया.

यह संघ, UAWC उन छह फ़लस्तीनी नागरिक समाज संगठनों में हैं, जिन्हें इसराइल ने 2021 में आतंकवादी घोषित कर दिया था.

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यूएन मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, इमारत में उपस्थित लोगों की आँखों पर पट्टियाँ बांधी गईं, उन्हें हथकड़ियाँ लगाई गईं और कई घंटों तक ज़मीन पर लेटने के लिए मजबूर किया गया. 

UAWC को फ़लस्तीनी क़ानून के तहत लाइसेंस प्राप्त है और इसने कई दशकों से स्थानीय किसानों व ग्रामीण समुदायों को समर्थन दिया है. विशेष रूप से उन लोगों को जिन पर जबरन विस्थापन का ख़तरा है या फिर जिन्हें इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा हिंसा का सामना करना पड़ रहा है.

मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि जिस क़ानून के तहत इसराइल ने 2021 में इस संघ को आतंकवादी के रूप में चिन्हित किया था, उसकी व्यापक व्याख्या की गई और नागरिक समाज पर ऐसी पाबन्दियाँ थोपी गईं, जिन्हें न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता.

OHCHR ने ज़ोर देकर कहा कि इसराइल ने अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश नहीं किए हैं.

ज़ैतून की कटाई के लिए कठिन समय

पिछले कई सप्ताह से जारी उत्पीड़न और इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा उकसाए जाने के बाद सैन्य बलों द्वारा ये कार्रवाई की गई, जिसमें ज़ैतून की कटाई के दिनों में UWAC को निशाना बनाया गया.

इस वर्ष, ज़ैतून की खेती के लिए यह सबसे हिंसक साल दर्ज किया गया है: मध्य-नवम्बर तक, OHCHR ने 87 फ़लस्तीनी समुदायों पर इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा किए गए 167 हमलों पर जानकारी जुटाई थी.

मगर, हिंसा केवल किसानों तक ही सीमित नहीं है. यूएन कार्यालय ने 1 अक्टूबर के बाद से अब तक, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं और ग़ैर-सरकारी संगठनों के विरुद्ध 81 मानवाधिकार उल्लंघन मामलों को दर्ज किया गया है. 

इनमें 48 गिरफ़्तारियाँ या हिरासत में लेने की घटनाएँ हुई हैं और 22 में शारीरिक हमले हुए हैं.

मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने कहा कि, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइली सुरक्षा अभियान के दौरान अब भी अनावश्यक बल प्रयोग, मनमाने ढंग से हिरासत में रखे जाने और बुरे बर्ताव की घटनाएँ हुई हैं.

‘अवैध हरण’

यूएन कार्यालय ने कहा कि ऐसी कार्रवाई से, फ़लस्तीनियों के लिए जगह सिकुड़ती जा रही है, इसराइली बस्तियों का विस्तार हो रहा है और इसराइल द्वारा ग़ैरक़ानूनी ढंग से इस क्षेत्र को अपने क़ब्ज़े में लिया जाना जारी है.

क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े के लिए OHCHR प्रमुख अजीत सुंघाय ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनी रुख़ पूर्ण रूप से स्पष्ट है.

“इसराइल को क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में अपनी ग़ैरक़ानूनी उपस्थिति का अन्त करना होगा और अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के निष्कर्षों के अनुरूप, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े से सभी [इसराइली] बस्तियों के निवासियों को हटाना होगा.”

उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत, एक क़ाबिज़ शक्ति के तौर पर इसराइल के स्पष्ट दायित्व हैं. इनमें फ़लस्तीनियों द्वारा अपनी कमाई करने के अधिकार का सम्मान, उसकी रक्षा, अभिव्यक्ति की आज़ादी समेत अन्य अधिकारों को सुनिश्चित किया जाना होगा.