मध्य पूर्व मुद्दे पर गतिरोध का अन्त करने के लिए 'निर्णायक क़दम' उठाने का आग्रह
मध्य पूर्व क्षेत्र में शान्ति, न्याय व स्थिरता क़ायम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता है और साथ ही, हर सदस्य देश को अपनी कथनी को करनी में तब्दील करना होगा. शान्ति प्रक्रिया में हिस्सेदारी हो, यूएन चार्टर, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और आठ दशक पहले किए गए सभी वादों का पालन हो. यूएन महासभा की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने मंगलवार को फ़लस्तीन मुद्दे पर यूएन के दायित्व के विषय में एक बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.
जनरल असेम्बली प्रमुख बेयरबॉक ने कहा कि फ़लस्तीनी लोगों के अधिकारों और इसराइल के साथ दो-राष्ट्र समाधान को आकार देने के लिए बड़े स्तर पर क़दम उठाने की ज़रूरत है.
“78 वर्षों से फ़लस्तीनी लोगों को उनके अपरिहार्य अधिकारों से नकार दिया गया है, मुख्यत: आत्म-निर्धारण के उनके अधिकार को.”
“अब, यह सही समय है कि हम दशकों लम्बे इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए निर्णायक क़दम उठाएं.”
महासभा अध्यक्ष ने कहा कि इसराइल और फ़लस्तीन स्थाई शान्ति, सुरक्षा व गरिमा में तभी रह पाएंगे, जब वे एक दूसरे के साथ, दो सम्प्रभु व स्वतंत्र राष्ट्रों के रूप में रहें. पारस्परिक रूप से मान्यता प्राप्त सीमाओं व पूर्ण क्षेत्रीय एकीकरण के साथ.
ग़ाज़ा युद्ध, पश्चिमी तट में हिंसा
ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा कि हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों द्वारा इसराइल पर 7 अक्टूबर 2023 को किए गए हमलों से इस टकराव का सबसे अंधकारमय अध्याय शुरू हो गया था.
इसके बाद, ग़ाज़ा में इसराइली सैन्य कार्रवाई से अपार तबाही व पीड़ा हुई है. हज़ारों लोगों की जान गई है, बड़ी संख्या में लोग घायल हैं, समुदाय भूख का शिकार हैं, बुनियादी प्रतिष्ठान बर्बाद हो चुके हैं और लगभग पूरी आबादी विस्थापित हुए हैं.
महासभा प्रमुख ने कहा कि ग़ाज़ा की भयावहता समाचारों में छाई रही है, लेकिन पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों का विस्तार हुआ है, फ़लस्तीनी सम्पत्तियों को ध्वस्त किया गया है और स्थानीय इसराइली निवासियों द्वारा हिंसक घटनाओं में भी उछाल आया है.
ऐनालेना बेयरबॉक के अनुसार, पिछले दो वर्षों में जो कुछ हुआ है, उसने वही स्पष्ट किया है जिसे हम दशकों से जानते आए हैं. “इसराइली-फ़लस्तीनी टकराव को अवैध क़ब्ज़े के ज़रिए नहीं सुलटाया जा सकता है,” और न ही जबरन विस्थापन, जबरन हरण, बार-बार आतंकी [घटनाओं] या फिर युद्ध से.
महासभा प्रमुख ने कहा कि दुर्भाग्यवश, हम हर दिन देखते हैं कि यदि दो-राष्ट्र समाधान को साकार नहीं किया जाता है, तो फिर ये केवल काग़ज़ पर लिखे हुए शब्द भर ही हैं.
युद्धविराम, मानवीय सहायता
“हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि युद्धविराम को मज़बूती मिले और यह टकराव का एक स्थाई अन्त बन जाए.”
उन्होंने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि नाज़ुक परिस्थितियों में लागू हुए युद्धविराम के दौरान अब तक 67 बच्चों की जान जा चुकी है.
महासभा प्रमुख ने ग़ाज़ा में बिना किसी अवरोध के मानवीय सहायता आपूर्ति पर बल दिया, और कहा कि सहायता प्रयासों में फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) की महत्वपूर्ण भूमिका है.
ऐनालेना बेयरबॉक ने अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय की सलाहकार राय का उल्लेख करते हुए कहा कि यूएन एजेंसी को अपना दायित्व निभाने की अनुमति देना, केवल सदभावना का संकेत नहीं है, बल्कि यह एक क़ानूनी बाध्यता भी है.