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1.6 अरब डॉलर धनराशि बक़ाया, यूएन बजट पर गहरी कटौती का दबाव

न्यूयॉर्क सिटी में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय.
UN News/Vibhu Mishra
न्यूयॉर्क सिटी में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय.

1.6 अरब डॉलर धनराशि बक़ाया, यूएन बजट पर गहरी कटौती का दबाव

यूएन मामले

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि 1.6 अरब डॉलर की धनराशि बक़ाया होने और सदस्य देशों द्वारा उनके लिए तयशुदा योगदान के भुगतान में देरी की वजह से संगठन की कार्यक्षमता पर असर हो रहा है.

यूएन प्रमुख ने सोमवार को बजट मामलों के लिए जनरल ऐसेम्बली की पाँचवी समिति को बताया कि संयुक्त राष्ट्र एक बहुत नाज़ुक नक़दी स्थिति का सामना कर रहा है. 2026 के लिए बजट योजना में बड़ी कटौतियाँ करने के बावजूद ऐसा हो रहा है.

उन्होंने इस समिति को सम्बोधित करते हुए कहा कि नक़दी की स्थिति नाज़ुक है, और यह चुनौती बनी रहेगी, अन्तिम बजट स्वीकृत हो या नहीं. महासचिव ने ध्यान दिलाया कि सदस्य देशों पर इतनी अधिक मात्रा में धनराशि का बक़ाया होना अस्वीकार्य है.

वर्ष 2024 के अन्त में, संयुक्त राष्ट्र को सदस्य देशों से 76 करोड़ डॉलर की तयशुदा धनराशि का योगदान नहीं मिला था, और इसमें से अधिकाँश रक़म अब भी बक़ाया है.

वहीं, 2025 के लिए 87.7 करोड़ डॉलर का योगदान अब भी प्राप्त नहीं हुआ है, और इस वजह से कुल बक़ाया धनराशि अब 1.58 अरब डॉलर तक पहुँच गई है.

2025 के समाप्त होने में अब कुछ ही सप्ताह का समय बचा है. संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से केवल 145 ने, अपने लिए तयशुदा धनराशि का पूर्ण रूप से भुगतान किया है.

संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस ने अभी तक अपनी बक़ाया रक़म का भुगतान नहीं किया है. चीन ने 29 अक्टूबर को भुगतान कर दिया था.

महासचिव गुटेरेश ने बताया कि उन्होंने सदस्य देशों से अपना पूर्ण योगदान समय पर देने के लिए बार-बार अपील की है. नक़दी की कमी होने की वजह से स्वीकृत बजट से कम स्तर पर ही संगठन का कामकाज करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

ख़र्चों में गहरी कटौती

यूएन महासचिव की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब सदस्य देश, 2026 के लिए यूएन के नियमित बजट के संशोधित अनुमान पर विचार कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के आठ दशक पूरे होने पर, यूएन80 सुधार पहल के अन्तर्गत बजट में पहले से ही गहरी कटौतियाँ की गई हैं, जिसका उद्देश्य दक्षता को मज़बूती देना, कामकाज के तौर-तरीक़ों को आधुनिक बनाना और ख़र्चों में कमी लाना है.

संशोधित प्रस्ताव के तहत, 2026 के लिए यूएन का नियमित बजट 3.238 अरब डॉलर होगा, जोकि 2025 की तुलना में 57.7 करोड़ डॉलर, या 15.1 प्रतिशत की कटौती को दर्शाता है.

इसके लिए, 2,681 पदों की कटौती की गई है जोकि मौजूदा स्तर का 18.8 फ़ीसदी है.

विशेष राजनैतिक मिशन में भी 2025 के स्तर की तुलना में 21 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिसमें कुछ मिशन बन्द हुए हैं और अन्य स्थानों पर कर्मचारियों की बेहतर ढंग से तैनाती की जाएगी.

सुदृढ़ कार्यभार, स्थानान्तरित पद

बचत अभियान के तहत, संयुक्त राष्ट्र द्वारा वेतन-भुगतान का दायित्व एक इकलौती वैश्विक टीम को सौंपने की योजना है और साथ ही, साझा प्रशासनिक केन्द्र भी स्थापित किए जाएंगे, जिनकी शुरुआत न्यूयॉर्क और बैंकॉक में होगी.

इसके अलावा, कुछ पद ऐसे स्थानों पर भेजे जाने की समीक्षा की जा रही है, जहाँ ख़र्चा अपेक्षाकृत कम है. वर्ष 2017 के बाद से, न्यूयॉर्क में इमारतों की लीज़ समाप्ति के ज़रिए 12 करोड़ डॉलर से अधिक की धनराशि की बचत हुई है और 2028 में यह प्रति वर्ष 2.45 करोड़ डॉलर तक पहुँच सकती है.

प्रशासनिक एवं बजटीय सवालों पर परामर्शदाता समिति (ACABQ) द्वारा बजट के संशोधित अनुमान की समीक्षा किए जाने के बाद अब यह प्रस्ताव, पाँचवी समिति के ध्यानार्थ रखा गया है.

सदस्य देशों ने संशोधित अनुमानों को पेश करने के लिए महासचिव के प्रयासों की सराहना की है और उन्होंने नक़दी सम्बन्धी चुनौतियों को संज्ञान में लिया है. साथ ही, एक मज़बूत और स्फूर्त यूएन के लिए अपने समर्थन को व्यक्त किया है.

हालांकि कुछ प्रतिनिधिमंडल ने चिन्ता जताई है कि अहम दस्तावेज़ों को पाने में देरी हो रही है और समय बहुत कम है, जिससे पूरी समीक्षा पर असर हो रहा है.

कुछ राजनयिकों ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित कटौतियों से वरिष्ठ पदों की तुलना में, जूनियर और जनरल सर्विस के कर्मचारियों पर कहीं अधिक असर हुआ है, जिससे भौगोलिक सन्तुलन और कर्मचारियों के मनोबल पर असर होने का जोखिम है.

अन्य प्रतिनिधियों ने आगाह किया है कि कर्मचारियों में प्रस्तावित कटौती, यूएन के मुख्य तीन स्तम्भों (शान्ति व सुरक्षा, मानवाधिकार, विकास) में असमान प्रतीत होती है. मुख्य रूप से विकास-सम्बन्धी कार्यक्रमों में ज़्यादा कटौतियाँ हुई हैं.

महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि कुल मिलाकर, विकास क्षेत्र में आनुपातिक तौर पर सबसे कम कटौती की गई है, और अफ़्रीका-सम्बन्धी कार्यक्रमों की रक्षा की गई है और बड़ी कटौतियाँ समर्थन सेवाओं व ‘बैक-ऑफ़िस कार्यों’ में हैं, सहायता के अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय कार्यक्रमों में नहीं. 

बजट को अन्तिम स्वीकृति के लिए इस महीने के अन्त में, यूएन महासभा के पूर्ण समर्थन की आवश्यकता होगी. 

नक़दी संकट से कामकाज पर असर

यूएन महासचिव ने आगाह किया कि नक़दी उपलब्ध न होने की वजह से 2025 में आवश्यकता से कहीं कम ख़र्च करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

उन्होंने कहा कि रिक्त पद, किसी रणनैतिक प्राथमिकता से मेल नहीं खाती हैं, लेकिन यह सच्चाई है कि लोग, संगठन छोड़कर चले गए और उनकी जगह किसी और की नियुक्ति के लिए हमारे पास धन नहीं है.

नक़दी हालात की पृष्ठभूमि में, संयुक्त राष्ट्र ने सदस्य देशों को बजट क्रेडिट लौटने की प्रक्रिया पर अस्थाई रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है. यह तब तक स्थगित रखने की अपील की गई है जब तक नक़दी की स्थिति में सुधार नहीं हो जाता.

“धनराशि को लौटा पाना कठिन है, चूँकि हमें यह मिली ही नहीं है.”

उन्होंने कहा कि जब तक भुगतान की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तब तक यूएन के कामकाज पर दबाव जारी रहेगा, भले ही स्वीकृत बजट में कितनी ही कमी क्यों न लाई जाए.