SDG 9: मज़बूत ढाँचे, टिकाऊ उद्योग और नवाचार में छुपी है प्रगति की नींव
दुनिया भर में विकास, रोज़गार और बेहतर जीवन-स्तर की उम्मीदें तभी साकार हो सकती हैं, जब हमारे पास एक ऐसा बुनियादी ढाँचा हो, जो मज़बूत हो और समय के साथ बदलती ज़रूरतों के अनुरूप ढल सके. सतत विकास लक्ष्य 9 (SDG 9) इसी भविष्य की नींव तैयार करता है.
यह लक्ष्य एक ऐसे वैश्विक ढाँचे की कल्पना करता है जहाँ सहनशील और आधुनिक बुनियादी सुविधाएँ मौजूद हों, उद्योग समावेशी और टिकाऊ तरीक़े से आगे बढ़ें, और नवाचार (Innovation) आर्थिक प्रगति को गति देने वाला प्रमुख स्तम्भ बने.
यह तरीक़ा न केवल आर्थिक विकास को मज़बूती देता है, बल्कि समाजों को अधिक न्यायपूर्ण, स्थाई और अवसरों से भरपूर भविष्य की ओर भी ले जाता है.
महामारी और मन्दी…
तेज़ी से बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और बढ़ती असमानताओं के बीच, टिकाऊ विकास तभी सम्भव है जब औद्योगिकीकरण सभी लोगों के लिए अवसर सृजित करे और इसमें नवाचार तथा सहनशील बुनियादी ढाँचे को समाहित किया गया हो.
coronavirus">COVID-19 महामारी के फैलने से पहले ही, वैश्विक विनिर्माण (manufacturing) धीरे-धीरे घट रहा था. यह क्षेत्र, समग्र आर्थिक विकास का मुख्य इंजन माना जाता है, और इस गिरावट को महामारी ने दीगर तेज़ कर दिया, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गम्भीर प्रभाव पड़ा.
यह गिरावट मुख्य रूप से उच्च महंगाई, ऊर्जा क़ीमतों में उतार-चढ़ाव, कच्चे माल और उत्पादों की आपूर्ति में लगातार रुकावट और वैश्विक आर्थिक मन्दी के कारण हुई.
एक तरफ़ जहाँ, एशिया के कम विकसित देशों (LDCs) ने पर्याप्त प्रगति की है, वहीं अफ़्रीका के कम विकसित देशों को 2030 तक निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए, अपनी वर्तमान रणनीति में बदलाव और तेज़ प्रगति करने की आवश्यकता है.
हालाँकि, मध्यम-उच्च और उच्च-तकनीकी उद्योगों ने मज़बूती के साथ सकारात्मक विकास दर दिखाई है, जो इस क्षेत्र में सम्भावनाओं की ओर इशारा करती है.
कितनी प्रगति हुई?
वर्ष 2015 से लेकर अब तक, दुनिया ने बुनियादी ढाँचे के विकास, औद्योगिक वृद्धि और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति देखी है.
वैश्विक विनिर्माण का प्रति व्यक्ति मूल्य (MVA) 2015 और 2024 के बीच 17.3 प्रतिशत बढ़ा.
साथ ही, समुद्री माल परिवहन की मात्रा 2023 में 11.6 अरब मीट्रिक टन तक पहुँच गई, जिसमें विकासशील देशों की बढ़ती भागेदारी मुख्य भूमिका रही.
इसी दौरान, 5G मोबाइल ब्रॉडबैंड, अब दुनिया की 51 प्रतिशत आबादी तक अपनी पहुँच बना चुका है.
इसके बावजूद, क्षेत्रीय असमानताएँ गहरी बनी हुई हैं. बहुत से विकासशील देशों को समावेशी और टिकाऊ औद्योगिकीकरण प्राप्त करने में अब भी प्रणालीगत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
व्यापक इंटरनैट जुड़ाव के बावजूद, 2024 में दुनिया की 4 प्रतिशत आबादी, अब भी मोबाइल ब्रॉडबैंड नैटवर्क की पहुँच से वंचित थी.
कैसे बदलेगी तस्वीर?
सतत विकास को हासिल करने और कई देशों में समुदायों को सशक्त बनाने के लिए बुनियादी ढाँचे में निवेश बेहद ज़रूरी है. जैसे परिवहन, सिंचाई, ऊर्जा या सूचना और संचार प्रौद्योगिकी.
वर्ष 2030 तक लक्ष्य 9 को पूरा करने के लिए कम विकसित देशों (LDCs) का समर्थन करना, उन्नत तकनीकों में निवेश करना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और मोबाइल ब्रॉडबैंड की पहुँच बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
नई उद्योगों का विकास हमारे जीवन स्तर में सुधार का संकेत देता है. यदि उद्योग टिकाऊ मार्ग अपनाते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव, न केवल आर्थिक प्रगति पर, बल्कि पर्यावरण पर भी पड़ेगा.