UNIDO: रियाद घोषणा-पत्र स्वीकृत, न्यायसंगत व हरित आर्थिक वृद्धि की ओर बढ़त
दुनिया ने, औद्योगिक विकास को, मानवता और पृथ्वी, दोनों की भलाई की ख़ातिर सकारात्मक दिशा में, एक महत्वपूर्ण क़दम आगे बढ़ाया है. सऊदी अरब में आयोजित, वैश्विक उद्योग सम्मेलन में ‘रियाद घोषणा-पत्र’ को औपचारिक रूप से अपना लिया गया है.
दुनिया, औद्योगीकरण की ओर निरन्तर बढ़ रही है, जिससे विश्व भर के सबसे निर्धन समुदायों के लिए, बेहतर रोज़गार और आजीविका के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं.
मगर, वैश्विक आबादी और पूरे ग्रह को, सही मायनों में लाभ तभी मिल सकता है, जब अन्तरराष्ट्रीय व्यापार और उद्योग के विस्तार के साथ, स्वस्थ समुदाय, कम कार्बन उत्सर्जन और स्वच्छ हवा भी सुनिश्चित की जाए.
इसे वास्तविकता में बदलने के लिए, संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) प्रतिबद्ध है.
UNIDO के कैबिनेट प्रमुख मैनुएल मैट्टीयट ने, एक सप्ताह तक चले इस सम्मेलन में कहा, ‘हम चुनौतियों और समस्याओं से भली-भाँति अवगत हैं, लेकिन हम यहाँ समाधान पेश करने के लिए मौजूद हैं… हमारे पास मौजूद ज्ञान, उपलब्ध तकनीकें और वैश्विक वित्तीय संसाधनों के साथ कुछ भी हासिल करना सम्भव है.”
वैश्विक दक्षिण में निवेश
इस सम्मेलन में, वैश्विक दक्षिण में औद्योगिक विकास और युवा उद्यमियों की भूमिका से लेकर, महिला उद्यमियों के नेतृत्व को सशक्त बनाने के मुद्दों पर चर्चा हुई.
ऐसे दौर में, जब संयुक्त राष्ट्र के अस्तित्व तक पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तब रियाद सम्मेलन एक अवसर के रूप में उभरा है.
इस सम्मेलन के ज़रिए, दुनिया के इस प्रमुख बहुपक्षीय संगठन की विशेषज्ञता और ज्ञान को, निवेशकों और उद्योग जगत के साथ साझा किया जा रहा है.
साथ ही, यह सम्मेलन, उन व्यावहारिक समाधानों की श्रृंखला को भी दर्शा रहा है, जिनका उद्देश्य दुनिया भर में, सबसे कमज़ोर लोगों को, निर्धनता के कुचक्र से बाहर निकालना है.
मैनुएल मैट्टीयट ने कहा कि यूएन का उद्देश्य विभिन्न पक्षों के बीच, सेतु का निर्माण करना है.
“संसाधनों और विकास की दृष्टि से समृद्ध अनेक विकसित और औद्योगीकृत देश निवेश करने के इच्छुक तो हैं, लेकिन उन्हें अभी तक उपयुक्त अवसर नहीं मिल पाए हैं… रियाद सम्मेलन का उद्देश्य यही है कि सबसे कम विकसित देशों के लिए निवेश को जुटाया जा सके.”
लोगों को प्राथमिकता
UNIDO के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने, गुरुवार को, ‘रियाद घोषणा-पत्र’ अपनाया. इन सदस्य देशों में, विकसित और विकासशील, दोनों ही शामिल हैं.
यह घोषणा-पत्र, देशों की सरकारों, उद्योग जगत और नागरिक समाज के बीच मज़बूत सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर देता है, ताकि औद्योगिकीकरण, पर्यावरण-अनुकूल अर्थव्यवस्थाएँ, समान अवसरों और बेहतर आजीविका की दिशा में आगे बढ़े.
यह घोषणा-पत्र, युवा और महिलाओं पर ख़ास ध्यान देते हुए, कौशल और रोज़गार तक पहुँच बढ़ाने का प्रयास करता है.
साथ ही, यह नवाचार तथा डिजिटल परिवर्तन के महत्व को भी उजागर करता है, ताकि विकासशील देश नई तकनीकों का लाभ उठा सकें, और वैश्विक बाज़ारों में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकें.
इस घोषणा-पत्र का अपनाया जाना, वैश्विक औद्योगिक नीति में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जो देशों की सरकारों और अन्तरराष्ट्रीय साझीदारों के लिए संसाधन जुटाने और दुनिया भर के समुदायों तक ठोस लाभ पहुँचाने का एक ढाँचा उपलब्ध कराएगा.