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अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता दिवस पर फ़लस्तीनी जन के लिए अधिक समर्थन की अपील

अक्टूबर 2025 में गाजा के दीर अल बलाह में एक सामुदायिक रसोई में विस्थापित बच्चे और एक व्यक्ति कतार में खड़े हैं।
UNOCHA/ Olga Cherevko युद्धविराम लागू होने से पहले, ग़ाज़ा में एक सामुदायिक रसोई के बाहर भोजन के लिए कतार में खड़े बच्चे.

अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता दिवस पर फ़लस्तीनी जन के लिए अधिक समर्थन की अपील

मानवाधिकार

ग़ाज़ा में पिछले दो वर्षों में हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है. यह इलाक़ा अपने इतिहास के सबसे गम्भीर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है, और नाज़ुक युद्धविराम के बावजूद बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने, फ़लस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता के अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, “युद्धविराम लागू होने के बाद भी लगभग 67 बच्चों की मौत हो चुकी है.”

वहीं यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश के कैबिनेट प्रमुख कोर्टने रैट्रे ने महासचिव की ओर से ज़ोर देकर कहा, “पूर्वी येरूशलम समेत, क़ब्ज़े वाले पश्चिम तट के लोगों ने, इसराइली सैन्य कार्रवाइयों, बस्तियों में बढ़ती हिंसा, नई बस्तियों के विस्तार, बेदख़ली और घरों को ढहाए जाने के बीच अकल्पनीय मुश्किलों का सामना किया है.”

यह अन्तरराष्ट्रीय दिवस हर साल 29 नवम्बर को मनाया जाता है. इसी दिन 1947 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने फ़लस्तीन, को दो स्वतंत्र राष्ट्रों - एक अरब और एक यहूदी - में विभाजित करने का प्रस्ताव पारित किया था.

कोर्टने रैट्रे ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र एक सरल सच के साथ खड़ा है: फ़लस्तीनी जन को गरिमा, न्याय और आत्मनिर्णय का अधिकार है.

जीवनरक्षक मानवीय सहायता अब भी ज़रूरी

उन्होंने कहा कि लाखों फ़लस्तीनियों के लिए फ़लस्तीनी शरणार्थियों की मदद करने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी UNRWA अब भी “जीवनरेखा बनी हुई है.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को UNRWA का समर्थन जारी रखना होगा, ताकि संयुक्त राष्ट्र, इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्रों के लिए की गई आपात अपील के तहत तय 4 अरब डॉलर की राशि जुटाने के लक्ष्य तक पहुँच सके.

अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) और संयुक्त राष्ट्र महासभा, दोनों ने ही फ़लस्तीनी क्षेत्रों पर लम्बे समय से जारी इसराइली क़ब्ज़े को अवैध ठहराया है.

ग़ाज़ा अब खंडहरों में तब्दील हो चुका है, जहाँ मारे गए और घायल लोगों में बच्चों और महिलाओं के साथ-साथ, मानवीय सहायता कर्मी व पत्रकार भी हैं. 

वहीं पश्चिमी तट पर फ़लस्तीनी किसानों पर हमले बढ़ रहे हैं, ख़ासतौर ऐसे समय में, जब वे ज़ैतून की अपनी फ़सल काटने की कोशिश कर रहे हैं.

कोर्टने रैट्रे ने कहा, “उम्मीद हक़ीक़त बन सकती है - यह उम्मीद कि इतिहास, भूगोल और इंसानियत से जुड़े दो लोग एक-दूसरे के साथ शान्ति से रह सकेंगे.”

उन्होंने आगे कहा, “आइए, इस अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता दिवस पर, उस उम्मीद को कार्रवाई में बदलें और ज़ैतून के उस पेड़ को फिर से बढ़ने का मौक़ा दें.”