सूडान संकट: यूएन एजेंसियों की ख़ारतूम में चरणबद्ध वापसी, 'एक महत्वपूर्ण क़दम'
सूडान में संयुक्त राष्ट्र की देशीय टीम (Country Team) ने पिछले क़रीब ढाई वर्षों में पहली बार राजधानी ख़ारतूम में बैठक की है. अप्रैल 2023 में देश में परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच हिंसक टकराव भड़कने के बाद यूएन की 28 एजेंसियों व कार्यक्रमों ने तटीय शहर, पोर्ट सूडान में अपनी उपस्थिति के ज़रिए मानवीय सहायता प्रयासों को जारी रखा है.
सोमवार को ख़ारतूम में यह बैठक, मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए सूडान में यूएन की शीर्ष अधिकारी डेनिज़ ब्राउन की अध्यक्षता में हुई.
यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों को बताया कि यूएन एजेंसियों की चरणबद्ध ढंग से ख़ारतूम वापसी होना एक महत्वपूर्ण क़दम है, जिससे ज़मीनी स्तर पर समन्वय और सम्पर्क व बातचीत में सहायता मिलेगी.
सूडान में नागरिक शासन की बहाली के मुद्दे पर व्याप्त मतभेदों की वजह से सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में भीषण लड़ाई भड़क उठी थी, जिसमें बड़े पैमाने पर समुदाय तबाह हुए हैं, लाखों लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हैं और देश एक गहरे मानवीय संकट का सामना कर रहा है.
हिंसा के कारण विस्थापित हुई आबादी के लिए परिस्थितियाँ गम्भीर हैं. यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर, दारफ़ूर के अल फ़शर और कोर्दोफ़ान में सहायता प्रयासों में जुटी है.
नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त के तवीला और दब्बाह में, आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए टीम, व्यक्तियों से निजी तौर पर मुलाक़ात कर रही हैं और यौन हिंसा, परिवार से अलग हुए बच्चों और अन्य मामलों में विशेषीकृत सहायता मुहैया कराने के प्रयास हो रहे हैं.
अल फ़शर पर RSF द्वारा नियंत्रण स्थापित कर लिए जाने के बाद वहाँ बड़े पैमाने बर्बर हिंसा व अत्याचारों को अंजाम दिए जाने के आरोप सामने आए, जिसके बाद हज़ारों लोगों ने भागकर तवीला में शरण ली थी.
बताया गया है कि तात्कालिक ज़रूरतों में मनोसामाजिक समर्थन, परिवारों का पता लगाना, बिछुड़े हुए सदस्यों को मिलाना, खाद्य सहायता, पहचान पत्रों की व्यवस्था समेत अन्य आवश्यकताएँ हैं.
टकराव का अन्त करना होगा
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, सूडान की सीमा पार करके अन्य देशों में शरण लेने वाले लोगों को भी मदद प्रदान कर रही हैं.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि आश्रय स्थलों, विस्थापितों के लिए बनाए गए केन्द्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएँ की जा रही हैं, लेकिन अब भी शौचालयों समेत शरण केन्द्रों की क़िल्लत है.
इस वजह से, विस्थापितों को ऐसी परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है, जिसमें उनके लिए गरिमा का अभाव है.
यूएन प्रवक्ता ने कहा कि विस्थापन शिविरों में रह रहे लोगों के लिए पर्याप्त सुविधाओं और उन्हें मौसमी मार से बचाने का प्रबन्ध करना होगा. साथ ही, उन्होंने सूडान में सभी पक्षों से हिंसक टकराव का अन्त करने का आग्रह किया है ताकि आम लोगों को कुछ राहत व संरक्षण हासिल हो सके.