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रोज़ाना सैकड़ों महिलाएँ होती हैं, अपनों के ही हाथों मौत की शिकार

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लंदन में प्रदर्शन कर रही महिलाओं की भीड़, पुरुषों द्वारा की जाने वाली हिंसा के खिलाफ तख्तियां लिए हुए है।
© Unsplash/Ehimetalor Akhere Unuabona दुनिया भर में महिलाओं व लड़कियों को, डिजिटल हिंसा का भी निशाना बनाया जा रहा है.

रोज़ाना सैकड़ों महिलाएँ होती हैं, अपनों के ही हाथों मौत की शिकार

महिलाएँ

महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा अब भी एक बेहद गम्भीर मुद्दा बना हुआ है. संयुक्त राष्ट्र की एक नवीन रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में, लड़कियों और महिलाओं की हत्या जैसे अपराधों के स्तर में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है. हर साल हज़ारों लड़कियों और महिलाओं को, उनके अपने अंतरंग साथियों और परिवार के सदस्यों के हाथों ही, मौत के मुँह में धकेल दिया जाता है.

संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC) और महिला सशक्तिकरण के लिए संस्था (UN Women) ने एक साझा रिपार्ट प्रकाशित की है, जो बताती है कि वर्ष 2024 में, 50 हज़ार लड़कियों और महिलाओं को, उन्हीं के अंतरंग साथी या परिवार के सदस्यों के हाथों मार डाला गया. 

रिपोर्ट के अनुसार, हर 10 मिनट में 1 लड़की या महिला की हत्या होना यह दर्शाता है कि वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बावजूद, आज भी कुछ विशेष परिवर्तन नहीं आया है.

हर दिन औसतन 137 लड़कियों और महिलाओं की हत्या कर दी जाती है. 

83 हज़ार इरादतन हत्या के मामले

महिलाओं की हत्या - 2025 नामक यह रिपोर्ट, महिलाओं के प्रति हिंसा उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर प्रकाशित की गई है.

2024 में, 83 हज़ार लड़कियों और महिलाओं की इरादतन हत्या कर दी गई, जिनमें से 50 हज़ार यानि 60 प्रतिशत हत्याएँ अंतरंग साथी या परिवार के किसी सदस्य के हाथों की गई. 

रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, इस तरह की हत्याएँ सबसे अधिक अफ़्रीका में - हर 1 लाख में से 3 लड़की या महिला, और योरोप में सबसे कम दर्ज की गई हैं.

जबकि, इसके उलट अपने किसी अंतरंग साथी या पारिवारिक सदस्य के हाथों हत्या के शिकार होने वाले पुरुषों का आँकड़ा 11 प्रतिशत है.

भारत में कई महिलाएं एक कार्यशाला में भाग ले रही हैं, जिसमें वे समुद्री कचरे को बुनकर वस्त्र उत्पाद बना रही हैं।
© UNDP India

सुरक्षित रहने का अधिकार

यूएन वीमैन की नीति विभाग की निदेशक सारा हैंड्रिक्स का कहना है कि महिलाओं की हत्या, किसी एकाकी घटना का परिणाम नहीं होती. यह अक्सर हिंसा की निरन्तर श्रृंखला का हिस्सा होती है, जो नियंत्रण करने वाले व्यवहार, धमकियों और उत्पीड़न से भी शुरू हो सकती है.

उन्होंने कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र का 16 दिनों तक चला अभियान, यह उजागर करता है कि डिजिटल हिंसा, सिर्फ़ ऑनलाइन ही सीमित नहीं है. 

यह ऑनलाइन मंचों से हटकर वास्तविकता में भी गम्भीर रूप ले सकती है, और ये हिंसा, अत्यंत भयावह मामलों में हत्या का रूप भी ले सकती है.

निदेशक सारा हैंड्रिक्स ने कहा कि हर लड़की और महिला को अपने जीवन के हर पहलू में, सुरक्षित रहने का अधिकार है. 

इन हत्याओं से बचने के लिए ज़रूरत है ऐसे क़ानूनों को कड़ाई से लागू किए जाने की, जो महिलाओं और लड़कियों के जीवन में हिंसा के ऑनलाइन और ऑफ़लाइन रूपों को समझें और अपराधियों की कठोर जवाबदेही तय करें.

ताविला, सूडान में यूएनएफपीए क्लिनिक की यात्रा के दौरान एक महिला एक बच्चे को पकड़े हुए है, जबकि एक छोटी लड़की उसके बगल में बैठी है।
© UNFPA

UNODC के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो ने कहा कि दुनिया भर में बहुत-सी महिलाओं और लड़कियों के लिए घर, आज भी एक ख़तरनाक और कई बार जानलेवा जगह बने हुए हैं. 

महिलाओं की हत्याएँ घर के बाहर भी होती हैं, पर इनके आँकड़े बेहद सीमित हैं. 

इन कमियों को दूर करने के लिए यूएन वीमैन और UNODC, वर्ष 2022 के सांख्यिकीय ढाँचे के ज़रिए, बेहतर पहचान और आलेखन पर काम कर रहे हैं.

सटीक डेटा बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि समस्या की वास्तविक गम्भीरता समझी जा सके, प्रभावी क़दम उठाए जा सकें और पीड़ितों को न्याय मिल सके.