सुरक्षा परिषद: ग़ाज़ा के लिए नई 'आशा का क्षण', बेहतर भविष्य का अवसर थामने का आग्रह
भीषण युद्ध से तबाह हुए ग़ाजा में. मोटे तौर पर युद्धविराम लागू तो है, मगर इसराइली हवाई हमलों और फ़लस्तीनी चरमपंथियों द्वारा इसराइली सैनिकों पर किए गए हमलों से इस पर ख़तरा भी मंडरा रहा है. मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने, सोमवार को सुरक्षा परिषद की एक बैठक में यह जानकारी देते हुए, आग्रह किया कि पूरे क्षेत्र में एक बेहतर भविष्य की दिशा में क़दम उठाने के लिए यह एक अहम क्षण है और इस अवसर का लाभ उठाना होगा.
ग़ाज़ा में हिंसा और मानवीय सहायता आवश्यकताओं के बीच वहाँ नाज़ुक परिस्थितियों में लागू युद्धविराम के विषय पर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई.
पिछले महीने, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित योजना पर इसराइल और हमास के बीच पहले चरण के लिए युद्धविराम पर सहमति बनी थी.
विशेष उप समन्वयक ने बताया कि “ग़ाज़ा में मोटे तौर पर युद्धविराम बरक़रार है.” मगर, आबादी वाले इलाक़ों में हाल के दिनों में इसराइली हवाई हमलों और फ़लस्तीनी चरमपंथियों द्वारा इसराइली सैनिकों पर किए गए हमलों से इस पर ख़तरा है.
इसके मद्देनज़र, रमीज़ अलकबरोव ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि समझौते के अन्तर्गत अपने सभी तयशुदा दायित्वों को निभाया जाना होगा.
आशा का संचार
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए यूएन के विशेष उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने वीडियो लिंक के ज़रिए बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह बैठक, एक ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में नए सिरे से आशा जागी है.
उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनियों, इसराइलियों और वृहद क्षेत्र के लिए एक बेहतर भविष्य को तैयार करने के लिए, परिषद को इस अवसर का लाभ उठाना होगा.
बीते दिनों, सुरक्षा परिषद ने ग़ाज़ा में युद्धविराम को मज़बूती देने के इरादे से प्रस्ताव 2803 (2025) पारित किया, जिसमें वहाँ अन्तरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती का समर्थन किया गया है.
विशेष उप समन्वयक के अनुसार, ग़ाज़ा में आम लोग अब भी असहनीय परिस्थितियों और अपार विध्वंस का सामना कर रहे हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से जारी निरन्तर बमबारी के बाद कुछ राहत का एहसास भी हुआ है.
वहीं, इसराइल में परिवारों के लिए ग़ाज़ा में बन्धक बना कर रखे गए अपने परिजन से मिल पाना सम्भव हुआ है, जबकि अन्य मृतक बन्धकों के शव के अवशेष भी मिले हैं. हालांकि कुछ बन्धकों के शवों को अब भी लौटाया जाना बाक़ी है.
विस्थापन व विध्वंस
संयुक्त राष्ट्र ने ग़ाज़ा में ज़रूरतमन्द आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने और उसका स्तर बढ़ाने के लिए दोगुने प्रयास किए हैं, लेकिन फिर वहाँ हालात गम्भीर हैं.
उप समन्वयक रमीज़ अलकबरोव ने कहा कि ग़ाज़ा में शारीरिक, आर्थिक व सामाजिक रूप से भयावह तबाही हुई है. इसलिए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा न केवल तात्कालिक भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करना होगा, बल्कि मनोसामाजिक ज़रूरों, न्याय व सामाजिक जुड़ाव से जुड़ें मुद्दों का भी ध्यान रखना होगा.
उन्होंने कहा कि 17 लाख से अधिक फ़लस्तीनी अब भी विस्थापित हैं और 80 प्रतिशत से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या ध्वस्त हुई हैं.
यूएन के वरिष्ठ अधिकारी ने पिछले सप्ताह ग़ाज़ा का दौरा किया, जहाँ परिस्थितियाँ अब भी विकट हैं. इसके मद्देनज़र, उन्होंने कहा कि अब वहाँ आपात मानवीय सहायता से आगे बढ़कर फ़लस्तीनी समुदायों को अपना जीवन फिर से पटरी पर लाने में समर्थ बनाने की ज़रूरत है. साथ ही, अति-आवश्यक सेवाओं को बहाल किया जाना होगा.
इस बीच, क़ाबिज़ पश्चिमी तट और दक्षिणी लेबनान में भी तनाव बढ़ रहा है, और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए आवश्यक क़दमों पर चर्चा हो सकती है.
साथ ही, फ़लस्तीनियों के आत्म-निर्णय के अधिकार की दिशा में एक विश्वसनीय मार्ग तैयार करने की दिशा के बारे में भी बातचीत होने की सम्भावना है.
पश्चिमी तट में चिन्ताजनक हिंसा
रमीज़ अलकबरोव ने पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा की जाने वाली हिंसा, विस्थापन, फ़लस्तीनी आबादी की जबरन बेदख़ली पर क्षोभ व्यक्त किया.
उन्होंने बताया कि उत्तरी इलाक़े में इसराइली सेना की कार्रवाई की वजह से मौतें, बर्बादी हुई है और शरणार्थी शिविरों से हज़ारों फ़लस्तीनियों का विस्थापित होना जारी है.
“बस्तियों के निवासियों द्वारा हिंसा आपात स्तर पर पहुँच गई है... अक्टूबर में, ज़ैतून की पैदावार के मौसम में, यूएन ने अपनी निगरानी शुरू करने के बाद से अब तक फ़लस्तीनियों पर सबसे अधिक संख्या में हमलों को दर्ज किया, प्रति दिन औसतन आठ हमले.”
इसके अलावा, चरम तनाव के बीच आगज़नी और पवित्र स्थलों को नुक़सान पहुँचाने की भी ख़बरें हैं. वहीं, फ़लस्तीनियों द्वारा आतंकी घटनाओं को अंजाम दिए जाने की घटनाएँ हुई हैं. विशेष उप समन्वयक ने कहा कि हिंसा के सभी दोषियों की जवाबदेही तय किए जाने की ज़रूरत है.
लेबनान व सीरिया पर चिन्ता
विशेष उप समन्वयक ने महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की उस अपील को दोहराया, जिसमें लेबनान में सभी पक्षों से टकराव पर विराम देने के लिए अपने संकल्पों को निभाने की बात कही गई है.
इसराइल और लेबनान में हिज़बुल्लाह चरमपंथियों के बीच एक साल तक चले टकराव के बाद नवम्बर 2024 में इस पर सहमति हुई थी. यह हिंसा ग़ाज़ा युद्ध की पृष्ठभूमि में हुईं थी.
साथ ही, सीरिया की सम्प्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का हनन करने वाली सभी घटनाओं को तुरन्त रोके जाने पर भी बल दिया गया है.