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पाकिस्तान: बलात्कार-विरोधी केन्द्र, भुक्तभोगियों का नया सहारा

पाकिस्तान के मुल्तान में स्थित निश्तर अस्पताल में बलात्कार विरोधी संकट प्रकोष्ठ के चिन्ह के सामने सफेद रंग से सिर ढके दो व्यक्ति खड़े हैं।
© UN Women बलात्कार-विरोधी संकट केन्द्र सरकारी अस्पतालों के भीतर काम करते हैं और पुलिस रिपोर्टिंग केन्द्रों से जुड़े होते हैं.

पाकिस्तान: बलात्कार-विरोधी केन्द्र, भुक्तभोगियों का नया सहारा

महिलाएँ

पाकिस्तान में यौन हिंसा से उबरने की कोशिश कर रहे भुक्तभोगियों को, अब ऐसे संकट राहत केन्द्रों में उम्मीद और सहारा मिल रहे हैं, जहाँ एक ही जगह पर चिकित्सीय, क़ानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है.

कराची की एक युवा शिक्षिका नादिया*(बदला हुआ नाम) कभी नहीं सोच सकती थीं कि मोबाइल फ़ोन पर आया एक साधारण सन्देश उनकी ज़िन्दगी बदल देगा. 

शुरू में तो सब सामान्य लगा - वर्षों की जान-पहचान वाले, भरोसेमन्द पड़ोसी का भेजा हुआ सन्देश. मगर धीरे-धीरे वही सन्देश निजी, दख़ल देने वाले और परेशान करने वाले बनते गए. नादिया समझ नहीं पा रही थीं कि मदद के लिए कहाँ जाएँ या इस उत्पीड़न की शिकायत कैसे करें.

डिजिटल हिंसा वास्तविक

वही पड़ोसी, एक दिन दोपहर में, ज़बरदस्ती नादिया के घर में घुस आया और उस पर हमला कर दिया. नादिया याद करती हैं, “उसने मुझे क़ाबू में कर लिया. मैं डर से जड़ हो गई और बेहोश हो गई.”

पिछले पाँच वर्षों में पाकिस्तान की लगभग 18 लाख महिलाओं ने ऑनलाइन उत्पीड़न और ब्लैकमेल जैसे साइबर अपराधों का सामना किया है. लेकिन केवल 3.5 प्रतिशत अभियुक्तों को ही सज़ा मिली है. 

वर्ष 2023 में डिजिटल अधिकार संस्थान की हैल्पलाइन को 2,473 शिकायतें मिलीं - जिनमें 59 प्रतिशत शिकायतें महिलाओं की थीं - और अधिकतर मामलों में उत्पीड़न व्हाट्सऐप या फ़ेसबुक के ज़रिए हुआ.

पाकिस्तान का इलैक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम 2016 (PECA) साइबर माध्यमों पर पीछा करने, ब्लैकमेल और निजी जानकारी को बिना अनुमति सार्वजनिक करने को अपराध मानता है. इस अपराध की सज़ा तीन साल तक की क़ैद और दस लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है. 

लेकिन अब भी बहुत-सी महिलाएँ, क़ानूनों पर कमज़ोर अमल, सीमित जागरूकता और सामाजिक कलंक के कारण, न्याय की राह पर आगे बढ़ ही नहीं पातीं.

पाकिस्तान के मुल्तान स्थित निश्तर अस्पताल में बलात्कार विरोधी संकट प्रकोष्ठ का एक बाहरी दृश्य, जिसमें अग्रभूमि में एक सफेद कार खड़ी है।
© UN News/Mansoor Abbas

भुक्तभोगियों की ज़रूरतें

नादिया को, हमले वाले दिन जब होश आया, तो उन्होंने ख़ुद को अस्पताल में पाया. उनकी माँ, डॉक्टरों, नर्सों और पुलिसकर्मियों ने जिस सहानुभूति और समझ के साथ उनका साथ दिया, वही उनके सम्भलने की पहली सीढ़ी बनी.

इसके बाद उनके माता-पिता उन्हें पाकिस्तान के पहले बलात्कार-विरोधी संकट राहत केन्द्र में लेकर गए. यह केन्द्र, 2023 में कराची में संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन (UN Women) और अमरीकी दूतावास के अन्तरराष्ट्रीय नारकोटिक्स एवं क़ानून प्रवर्तन कार्यालय के सहयोग से स्थापित किया गया था. 

यहाँ एक ही जगह पर 24 घंटे चिकित्सीय उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श, क़ानूनी सहायता और फॉरेंसिक सहयोग दिया जाता है.

सहायता और परामर्श ने नादिया को यह समझने में मदद की कि यह हमला उनकी ग़लती नहीं थी. उनका आत्मविश्वास और सुरक्षा का अहसास, धीरे-धीरे लौटने लगा.

नादिया कहती हैं, “हमले के बाद पहली बार मुझे लगा कि मैं अकेली नहीं हूँ. बलात्कार-विरोधी संकट राहत केन्द्र ने मुझे मेरा आत्मविश्वास वापस दिया. अब मुझमें न्याय की माँग करने की ताक़त है - सिर्फ़ अपने लिए नहीं, हर उस महिला के लिए जिसे चुप करा दिया गया है.”

कैसे बने बलात्कार-विरोधी संकट राहत केन्द्र

पाकिस्तान में यौन हिंसा का दायरा बहुत व्यापक है. पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के अनुसार, 2023 में देशभर में बलात्कार के 6,624 मामले दर्ज हुए - यानि औसतन हर 45 मिनट में एक मामला दर्ज हुआ. 

इसके बावजूद दोषियों को सज़ा बहुत कम मिलती है, क्योंकि गहरा सामाजिक कलंक, कमज़ोर पुलिस व फॉरेंसिक जाँच, अदालतों में देरी और अपराधियों के बच निकलने की संस्कृति, सब मिलकर न्याय की राह रोकते हैं.

साल 2020 में हुए मोटरवे गैंग-रेप के बाद, पीड़िता पर दोष मढ़ने वाली सरकारी टिप्पणियों से भारी जन आक्रोश फैला. इसी माहौल में बलात्कार-विरोधी अधिनियम 2021 पारित हुआ, जिसमें पीड़ितों के लिए मज़बूत सुरक्षा, मानकीकृत चिकित्सीय और कानूनी प्रक्रियाएँ, तथा बलात्कार-विरोधी संकट राहत केन्द्रों की स्थापना का प्रावधान किया गया.

पाकिस्तान में बलात्कार विरोधी संकट प्रकोष्ठ के कार्यालय में दो पुरुष डेस्क पर बैठे हैं, जो यौन हिंसा से बचे लोगों को सहायता प्रदान कर रहे हैं और उनके दस्तावेजों को संसाधित कर रहे हैं।
© UN News/Mansoor Abbas

लेकिन क़ानून तभी असर दिखाते हैं, जब उन्हें सही ढंग से लागू किया जाए और उनके लिए बजट भी हो. UN Women ने अन्तरराष्ट्रीय नारकोटिक्स एवं क़ानून प्रवर्तन कार्यालय के सहयोग से, सरकार के साथ मिलकर इन संकट राहत केन्द्रों के लिए व्यावहारिक क्रियान्वयन प्रक्रिया तैयार की.

अब सरकारी अस्पतालों में बलात्कार-विरोधी संकट राहत केन्द्रों की स्थापना अनिवार्य कर दी गई है. ये केन्द्र भुक्तभोगियों को एक ही स्थान पर समन्वित सहायता देते हैं - इलाज, मनोवैज्ञानिक परामर्श, क़ानूनी मार्गदर्शन तथा फॉरेंसिक सहयोग.

कराची की एक पुलिस सर्जन डॉक्टर सुमैया सईद कहती हैं, “इन वर्षों में हमने पाकिस्तान में यौन हिंसा के अनगिनत मामले देखे हैं. संकट राहत केन्द्र का विचार सचमुच परिवर्तनकारी है, क्योंकि यहाँ सभी ज़रूरी सेवाएँ एक ही जगह मिलती हैं - चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक सहायता, सबूतों का एकत्रीकरण व संरक्षण, फॉरेंसिक जाँच, प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराने में मदद एवं क़ानूनी सहायता. इस तरह भुक्तभोगियों को गरिमा के साथ न्याय पाने का अवसर मिलता है.”

कराची में शुरू हुआ यह एक केन्द्र अब पूरे पाकिस्तान में सैकड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा बन चुका है. 

लोक अभियोजकों के व्यावसायिक विकास केन्द्र के महानिदेशक चौधरी मुहम्मद जहाँगीर बताते हैं, “कई मामलों में चिकित्सीय या क़ानूनी अधिकारी, ठीक से रिपोर्ट लिखने के लिए प्रशिक्षित नहीं होते, जिससे अभियुक्त के ख़िलाफ़ मामला कमज़ोर पड़ जाता है.” 

...वे अकेली नहीं हैं

प्रशिक्षित क़ानूनी और चिकित्सा अधिकारियों से युक्त ये संकट राहत केन्द्र, अब इसी कमी को दूर करने में मदद कर रहे हैं.

पाकिस्तान में UN Women के प्रतिनिधि जमशेद एम काज़ी का कहना है, “बलात्कार-विरोधी संकट राहत केन्द्र, आशा और संबल का प्रतीक हैं.”

नादिया पर हमला करने वाले व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया और उस पर बलात्कार-विरोधी क़ानून के तहत मुक़दमा दर्ज हुआ. 

कार्यवाही अभी जारी है, लेकिन नादिया अब ख़ुद को कहीं अधिक मज़बूत व अपने जीवन पर फिर से नियंत्रण पाती हुई महसूस करती हैं. 

वह फिर से शिक्षण में लौट आई हैं और अब अन्य भुक्तभोगियों के लिए आवाज़ उठाती हैं, उन्हें सहायता और न्याय की राह दिखाती हैं.

नादिया कहती हैं, “किसी भी महिला को वह सब नहीं सहना चाहिए जो मैंने सहन किया. लेकिन अगर किसी के साथ ऐसा हो भी जाए, तो मैं चाहती हूँ कि उन्हें मालूम हो कि वे अकेली नहीं हैं.”

बलात्कार-विरोधी संकट राहत केन्द्रों का विस्तार, बीजिंग+30 प्रतिबद्धताओं के तहत, पाकिस्तान की प्रगति का एक महत्वपूर्ण चरण है. 

16 दिन के महिला समर्थक अभियान के दौरान प्रयासों को तेज़ करते हुए लक्ष्य साफ़ है: ऐसे तंत्र बनाना जो हर यौन हिंसा भुक्तभोगी के लिए सुरक्षा, सशक्तिकरण और न्याय सुनिश्चित कर सकें.

पीड़िता की पहचान गुप्त रखने के लिए नाम बदल दिया गया है.

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.