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कॉप30 का अन्तिम दौर: तात्कालिकता, उच्च महत्वाकांक्षा और आम लोगों की आवाज़ें

COP30 में वैश्विक स्वदेशी जन मार्च के दौरान बेलेम में स्वदेशी लोग तख्तियां लिए हुए मार्च कर रहे हैं।
Agência Brasil/Bruno Peres कॉप30 के दौरान आयोजित: ‘विश्व आदिवासी जन मार्च – 'समाधान हम ही हैं.’

कॉप30 का अन्तिम दौर: तात्कालिकता, उच्च महत्वाकांक्षा और आम लोगों की आवाज़ें

बेलेम से, फ़ेलिपे द कार्वाल्हो
जलवायु और पर्यावरण

बेलेम में कॉप30 का अन्तिम सप्ताह, स्पष्ट तात्कालिकता के माहौल में शुरू हुआ. बातचीत अब तकनीकी स्तर से आगे बढ़कर राजनैतिक फ़ैसलों की तरफ़ जा रही हैऔर नज़र मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी है. दाव पर बहुत कुछ है - समय कम हैऔर दुनिया को जलवायु न्याय की एक भरोसेमन्द राह चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने सोमवार को सम्मेलन का माहौल तय कर दिया. उन्होंने कहा, “सबको अच्छी तरह समझ है कि दाव पर क्या लगा है, और इस बिखरी हुई दुनिया में, जलवायु सहयोग को मज़बूती से खड़ा रखना कितना ज़रूरी है.”

उनकी स्पष्ट चेतावनी थी: “देरी और रुकावटों में समय बर्बाद करने की कोई गुंजाइश नहीं है.”

अगले दो दिनों में मंत्री अपने-अपने रुख़ पेश करेंगे. यह आम तौर पर सम्मेलन का सबसे तनाव वाला चरण होता है. साइमन स्टील ने देशों से अपील की कि सबसे कठिन मुद्दों पर अभी समाधान निकालें, न कि आख़िरी पल की हड़बड़ी में.

उन्होंने कहा, “रणनैतिक देरी या टालमटोल करने में समय गँवाने का समय नहीं है. केवल दिखावे वाली कूटनीति का समय अब ख़त्म हो चुका है.”

UN जलवायु परिवर्तन के कार्यकारी सचिव, साइमन स्टिल, बेलेम में COP30 शिखर सम्मेलन के दौरान एक मंच पर भाषण दे रहे हैं।
© UNFCCC/Diego Herculano

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने भी यही तात्कालिकता दोहराई. उन्होंने वार्ताकारों को याद दिलाया कि तमाम चुनौतियों और जलवायु वार्ताओं के उतार-चढ़ाव के बावजूद, वे ठहरने का जोखिम नहीं उठा सकते - क्योंकि लोगों का भरोसा उन्हीं पर टिका है.

महासभा अध्यक्ष ने इसमें उम्मीद का स्वर भी जोड़ा. उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार में तेज़ वृद्धि का ज़िक्र करते हुए कहा, “धन मौजूद है, बस उसे सही दिशा में ले जाने की ज़रूरत है.”

उन्होंने एक कड़ा तथ्य भी सामने रखा: पिछले साल विकासशील देशों ने, 1.4 ट्रिलियन डॉलर का बाहरी क़र्ज़ चुकाया. उनका कहना है कि अगर यही धनराशि स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु सहनसक्षमता बढ़ाने पर लगाई जाए, तो जलवायु कार्रवाई की तस्वीर बदल सकती है.

ऐनालेना बेयरबॉक ने, पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि रविवार को उन्होंने बेलेम से नाव से लगभग 30 मिनट की यात्रा करके, कोम्बु द्वीप का दौरा किया. वहाँ, ऐमेज़ॉन वर्षावन के किनारे, उन्होंने स्थानीय आदिवासी समुदायों से मुलाक़ात की “जो दिखा रहे हैं कि किस तरह एक साथ सतत विकास, आर्थिक वृद्धि और जंगल की रक्षा की जा सकती है.”

उन्होंने कहा, “इससे पुष्टि होती है कि जलवायु कार्रवाई कोई ‘सजावटी’ चीज़ नहीं है. यह दान भी नहीं है. जलवायु कार्रवाई हमारी सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए ज़रूरी है.”

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन का 30वाँ संस्करण पिछले सोमवार, 10 नवम्बर को शुरू हुआ था और शुक्रवार (21 नवम्बर) को समाप्त होने वाला है.

कथनी से हटकर करनी का समय

ब्राज़ील के उपराष्ट्रपति जेराल्डो आल्कमिन ने कहा कि COP30 एक अहम मोड़ साबित होना चाहिए. “दुनिया को अब लक्ष्यों पर बहस करना बन्द करके, उन्हें उन्हें हासिल करना शुरू करना होगा.” यानि, अब केवल बातचीत नहीं, असली अमल की ज़रूरत है.

उपराष्ट्रपति ने ‘बेलेम प्रतिबद्धता’ का ज़िक्र किया, जिसका लक्ष्य 2035 तक सतत ईंधनों के इस्तेमाल को चार गुना बढ़ाना है, और जिसे 25 देश पहले ही समर्थन दे चुके हैं. 

उन्होंने जैव-अर्थव्यवस्था और कार्बन उत्सर्जन कम करने जैसे क्षेत्रों में नई, रचनात्मक सोच की अपील की और ब्राज़ील की “स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार एवं समावेशन” के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई.

आधिकारिक गलियारों से परे

एक तरफ़ जहाँ, सभाओं में मंत्री बहस करने में जुटे थे, वहीं बाहर बेलेम के रास्तों पर लोगों में ऊर्जावान माहौल नज़र आ रहा था. 12 से 16 नवम्बर तक चले ‘जन सम्मेलन’ (People’s Summit) में 25 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया - यह अब तक की सबसे बड़ी जन भागेदारी थी. 

समापन 70 हज़ार लोगों की जलवायु न्याय रैली के साथ हुआ, जो अपनी तरह का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है.

रविवार को नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने अपने सुझावों का एक पैकेज COP30 के अध्यक्ष आंद्रे कोर्रिया द लागो, मुख्य कार्यकारी अना तोनी और मंत्रियों मरीना सिल्वा व सोनिया ग्वाजाजारा को सौंपा.

राजनैतिक समिति की सदस्य मॉरीन सैंटोस ने कहा, “मुझे लगता है कि यह COP केवल संयुक्त राष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए लोकतंत्र की मिसाल बन गया है. असली बहुपक्षवाद वही है, जब बातचीत सिर्फ़ देशों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उन लोगों की आवाज़ भी सामने आती है जो संकट का असर झेल रहे हैं और उसके समाधान के रास्ते भी बता रहे हैं.”

सामाजिक आंदोलनों ने जलवायु वित्त पर कड़ा रुख़ अपनाया है. वे “पारिस्थितिक ऋणों” के ख़तरे की ओर ध्यान दिला रहे हैं और न्यायपूर्ण बदलाव की एक व्यापक सोच की मांग कर रहे हैं - जिसमें सिर्फ़ नवीकरणीय ऊर्जा ही नहीं, बल्कि रोज़गार, खाद्य सम्प्रभुता और भू-अधिकार भी शामिल हों.

COP30 के अध्यक्ष, लागो के राजदूत आंद्रे कोरेआ, बेलेम में कपुला डॉस पोवोस के एन्सेरेमेंटो के दौरान चर्चा, कोई पारा नहीं।
Agência Brasil/Tânia Rêgo

एकजुटता की मिसाल

‘जन सम्मेलन’ केवल भाषणों तक सीमित नहीं था, वह एकजुटता की जीती-जागती मिसाल भी था. भूमिहीन मज़दूर आंदोलन जैसे समूहों ने एक बड़ी “एकजुटता रसोई” चलाई. ऐसी रसोई चलाने का अनुभव उन्हें पिछले साल रियो ग्रांदे द सुल में आई बाढ़ के दौरान मिला था.

इस रसोई में जांबू, आसाई और पिरारुकू जैसे ऐमेज़ॉन के पारम्परिक खाद्य पदार्थों के साथ 3 लाख से अधिक निशुल्क भोजन ख़ुराकें परोसी गईं.

अभियान का नेतृत्व करने वालों में शामिल रूडी रफ़ाएल ने बताया, “हमारे पास 500 लीटर के 21 बड़े बर्तन थे, और हम सिर्फ़ 26 सेकंड में एक भोजन का डिब्बा तैयार कर लेते थे.”

कई लोगों के लिए यह रसोई उम्मीद का प्रतीक थी, विशेषकर उन समुदायों के लिए जो अपनी ज़मीन, परम्पराओं और संस्कृति की रक्षा कर रहे हैं. 

सन्देश स्पष्ट है कि जलवायु न्याय सिर्फ़ नीतियों का सवाल नहीं, बल्कि गरिमा और समुदाय का भी प्रश्न है.