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सूडान: दारफ़ूर, 'मानव पीड़ा का केन्द्र बिन्दु', बेरोकटोक सहायता मार्ग का आग्रह

UN के एक अधिकारी, टॉम फ्लेचर, सूडान के ताविला में विस्थापित लोगों के एक स्थल पर यौन हिंसा की शिकार एक महिला से बात कर रहे हैं।
© UNOCHA/Mohamed Galal यूएन आपात राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने दारफ़ूर के तवीला में विस्थापित महिलाओं से मुलाक़ात की.

सूडान: दारफ़ूर, 'मानव पीड़ा का केन्द्र बिन्दु', बेरोकटोक सहायता मार्ग का आग्रह

मानवीय सहायता

आपात राहत मामलों के लिए यूएन अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने अपनी सूडान यात्रा से लौटने के बाद अल फ़शर में परिस्थितियों को बयाँ करते हुए कहा कि वो शहर एक अपराध स्थल बन चुका है. उन्होंने बताया कि देश पर नियंत्रण हासिल करने के लिए युद्धरत पक्षों के साथ ‘उपयोगी’ व ‘सख़्त बातचीत हुई है, और हिंसक टकराव में फँसे हताश लोगों तक सहायता पहुँचाने के लिए आग्रह किया गया है.  

यूएन मानवतावादी समन्वयक ने पिछले कुछ दिनों में युद्ध से जूझ रहे सूडान के विभिन्न हिस्सों में जाकर परिस्थितियों का जायज़ा लिया और वहाँ नेताओं, अग्रिम पंक्ति में खड़े राहतकर्मियों और इस संकट के भुक्तभोगियों से मुलाक़ात की.

अवर महासचिव ने सूडान के पड़ोसी देश चाड से न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि दारफ़ूर क्षेत्र, मानव पीड़ा का केन्द्र बिन्दु बन गया है और हमें ज़मीन पर अधिक संख्या में संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों की आवश्यकता है.

“यूएन एक ऐसा जहाज़ है, जोकि बन्दरगाह में रुके रहने के लिए नहीं बना है. और यह यात्रा उन विशाल प्रयासों को सुनिश्चित करने का ही एक हिस्सा है, ताकि हम जिनके लिए सेवारत हैं, उनके नज़दीक ही लामबन्द रहें.”

वार्ता में प्रगति

आपात राहत प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने बताया कि सूडानी सशस्त्र सेना के प्रमुख जनरल बुरहान से उनकी उपयोगी मुलाक़ात हुई, जिसमें मानवीय सहायता की प्रतीक्षा कर रहे लोगों तक असीमित व बेरोकटोक मदद पहुँचाने पर ध्यान केन्द्रित किया गया.

उन्होंने अर्द्धसैनिक बल (RSF) के प्रतिनिधियों से भी मुलाक़ात की, जोकि उनके अनुसार एक सख़्त बातचीत साबित हुई, जहाँ उन्होंने बिना लागलपेट यह स्पष्ट कर दिया कि संयुक्त राष्ट्र, आम नागरिकों की रक्षा किए जाने और जवाबदेही तय किए जाने की अपेक्षा रखता है.

अवर महासचिव ने जान बचाने की कोशिश कर रहे आम नागरिकों और मानवीय सहायता क़ाफ़िलों को सुरक्षित मार्ग मुहैया कराए जाने पर बल दिया.

टॉम फ़्लैचर ने कहा कि उनके विचार में सहायता क़ाफ़िलों को प्रवेश के लिए पूर्ण रूप से, सुरक्षित रास्ता दिए जाने और आम नागरिकों को बाहर निकलने देने के लिए पोर्ट सूडान में सशस्त्र सैन्य बलों और RSF मिलिशिया से ठोस सहमति हुई है.

“अब यह देखना होगा कि आगे क्या होता है.”

अल फ़शर, एक अपराध स्थल

सूडान के नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त के अल फ़शर शहर में यूएन की शर्तों पर मानवीय सहायताकर्मियों को भेजने के प्रयासों में भी प्रगति हुई है. अवर महासचिव फ़्लैचर ने ज़ोर देकर कहा कि हम किसी के हित साधने का साधन बनने नहीं जा रहे हैं.

“यह एक सम्भावित अपराध स्थल है, और हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे पास वहाँ भेजने के लिए सही व्यक्ति हों, और सहायता वास्तव में तटस्थ व निष्पक्ष रूप से प्रदान की जाए.”

सूडान की सशस्त्र सेना और अर्द्धसैनिक बल, RSF के बीच अप्रैल 2023 में देश पर नियंत्रण के लिए हिंसक टकराव भड़क उठा था, जिससे एक विशाल मानवीय संकट उपजा है.

अल फ़शर इस टकराव का केन्द्र बिन्दु है, जहाँ RSF लड़ाकों ने 500 से अधिक दिन की घेराबन्दी के बाद अपना नियंत्रण स्थापित किया, मगर उसके बाद से ही वहाँ बड़े पैमाने पर अत्याचारों को अंजाम दिए जाने की रिपोर्टें आई हैं.

अक्टूबर महीने के अन्त से अब तक 90 हज़ार लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हैं. जब अवर महासचिव फ़्लैचर से मृतक आँकड़े के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि अभी इस बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं है.

हज़ारों लोगों ने अल फ़शर से जान बचाने के लिए तवीला में शरण ली है, लेकिन यह स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में लोग अल फ़शर से बाहर निकल पाने में असमर्थ हैं.

“हम वहाँ जाकर यह देखना चाहते हैं कि ऐसा क्यों है, उन्हें किन परिस्थितियों में रखा जा रहा है.”