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ग़ाज़ा में नए बल (ISF) की तैनाती के बारे में कुछ अहम जानकारी

ग़ाज़ा पट्टी का अधिकांश हिस्सा हिंसक टकराव की वजह से बर्बाद हो चुका है.
© WFP/Maxime Le Lijour
ग़ाज़ा पट्टी का अधिकांश हिस्सा हिंसक टकराव की वजह से बर्बाद हो चुका है.

ग़ाज़ा में नए बल (ISF) की तैनाती के बारे में कुछ अहम जानकारी

शान्ति और सुरक्षा

पिछले दो वर्ष से भीषण युद्ध से जूझ रहे ग़ाज़ा पट्टी में फ़िलहाल नाज़ुक स्थिति में युद्धविराम लागू है. अब वहाँ अन्तरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की तैनाती के लिए अमेरिका द्वारा तैयार किए गए एक प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद में पारित कर दिया गया है जिससे इस बल के गठन का रास्ता खुल गया है.

इस प्रस्ताव को संयुक्त राज्य अमेरिका की 20-सूत्री शान्ति योजना की बुनियाद पर तैयार किया गया है, जोकि ग़ाज़ा में सुरक्षा क़ायम करने, मानवीय सहायता मार्ग मुहैया कराने और पुनर्निर्माण प्रक्रिया को शुरू करने पर लक्षित थी.

इस योजना की घोषणा के बाद ही, इसराइल और हमास के बीच, पिछले दो वर्षों से जारी हिंसक युद्ध का अन्त करने के लिए युद्धविराम समझौते पर सहमति हुई थी.

अमेरिकी प्रस्ताव में क्या है

इस मसौदे में दो वर्ष के शासनादेश के साथ, एक अन्तरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की स्थापना की बात कही गई है, जिसके लिए इसराइल व मिस्र के साथ मिलकर प्रयास किए जाएंगे.

इस बल, ISF का दायित्व ग़ाज़ा में सीमाओं को सुरक्षित बनाना, आम नागरिकों की रक्षा करना, मानवीय सहायता प्रयासों को समर्थन देना, फ़लस्तीनी पुलिस बल के नए सिरे से गठन, उनकी ट्रेनिंग व तैनाती में मदद करना, और हमास व अन्य चरमपंथी गुटों के हथियारों को स्थाई तौर पर हटाना है.

मध्य पूर्व में स्थिति पर सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों की बैठक. (फ़ाइल)
UN Photo/Manuel Elias
मध्य पूर्व में स्थिति पर सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों की बैठक. (फ़ाइल)

मसौदे के अनुसार, स्थिरीकरण बल द्वारा ग़ाज़ा में सुरक्षा व अभियान संचालन सम्बन्धी नियंत्रण के बाद, इसराइली सैन्य बलों की वापसी हो जाएगी.

शान्ति बोर्ड (Board of Peace) नामक एक संक्रमणकालीन तंत्र का भी सुझाव दिया गया है, जिसकी अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्र डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा की जाएगी. 8 अक्टूबर को जिस शान्ति योजना के आधार पर युद्धविराम पर सहमति हुई थी, उसमें इसका उल्लेख था.

यह बोर्ड सुरक्षा, मानवतावादी और पुनर्निर्माण योजना में समन्वय सुनिश्चित करने पर केन्द्रित होगा. यह फ़लस्तीनी प्राधिकरण और शासन व्यवस्था तंत्र में सुधार का मार्ग भी प्रशस्त करेगा.

इस प्रस्ताव में फ़लस्तीनियों के लिए आत्म-निर्णय और स्वतंत्र देश को साकार करने की दिशा में बढ़ने का मार्ग पेश किया गया है, जोकि जवाबदेह तंत्र व पुनर्निर्माण में प्रगति से जुड़ा है.

यह क्यों अहम है

ग़ाज़ा में युद्धविराम लागू होने के बाद, बहुत से लोग अपने घरों को वापिस लौटकर, अपने रहने का ठिकाना बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं.
© WFP/Maxime Le Lijour

अब इस प्रस्ताव के पारित होने से, बहुराष्ट्रीय सुरक्षा मिशन के लिए, एक अन्तरराष्ट्रीय विधि प्राधिकरण को स्वीकृति मिल मिल गई है. सैन्य टुकड़ियों का योगदान देने वाले देशों और दानदाताओं के लिए यह अहम है.

संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा मिशन पर विचार नहीं किया गया है.

इसके साथ ही, यह एक संकेत होगा कि अब ग़ाज़ा में सक्रिय हिंसक टकराव से स्थिरता व पुनर्निर्माण की ओर क़दम बढ़ाए जा रहे हैं, और सुरक्षा गारंटी के साथ शासन तंत्र व सेवाओं में सुधार लागू किए जाएंगे.

यह मुद्दा, ग़ाज़ा में हिंसक टकराव के पश्चात फ़्रेमवर्क पर सुरक्षा परिषद के सदस्यों के बीच सहमति बनाने की योग्यता की भी एक परीक्षा है. एक ऐसे समय में जब वहाँ विशाल स्तर पर मानवीय सहायता आवश्यकताएँ उपजी हैं और क्षेत्रीय तनाव चरम पर है.

अमेरिका ने कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि यदि सुरक्षा परिषद ने क़दम नहीं उठाया तो फिर लड़ाई नए सिरे से भड़कने और नाज़ुक युद्धविराम के दरक जाने का ख़तरा है.