वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

COP30: धन के मुक्त प्रवाह से जलवायु कार्रवाई को मिलते हैं मज़बूत पंख

बांग्लादेश में महिला बकरी पालकों को नवीकरणीय ऊर्जा से मिला सहारा. स्वच्छ ऊर्जा में धन निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है.
© UNEP/Reza Shahriar Rahman
बांग्लादेश में महिला बकरी पालकों को नवीकरणीय ऊर्जा से मिला सहारा. स्वच्छ ऊर्जा में धन निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है.

COP30: धन के मुक्त प्रवाह से जलवायु कार्रवाई को मिलते हैं मज़बूत पंख

जलवायु और पर्यावरण

जब धन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है तो महत्वाकांक्षाएँ परवान चढ़ती हैं, ऐसी योजनाएँ लागू करना आसान होता है जिनसे रोज़गार उत्पन्न होते हैं, जीवन यापन की लागत कम होती है, स्वास्थ्य बेहतर होते हैं, समुदायों की हिफ़ाज़त होती है और हर किसी के लिए, एक अधिक शक्तिशाली व समृद्ध पृथ्वी की सम्भावना प्रबल होती है.

कुछ ऐसे ही विचार, यूएन जलवायु शिखर सम्मेलन (COP30) में उभरे हैं जो ब्राज़ील के बेलेम शहर में पिछले एक सप्ताल से चल रहा है. शनिवार को एक सवाल ने प्रमुखता पाई: क्या जलवायु कार्रवाई के लिए धन की उपलब्धता का मुद्दा, केवल संकल्प से आगे बढ़कर मूर्त रूप ले सकता है यानि, क्या पर्याप्त मात्रा में धन उपलब्ध हो सकता है.

हर एक वार्ता मेज़ और हर एक कूटनैतिक वक्तव्य में, जलवायु संकट के सबसे अधिक विनाश का सामना करने वाले देशों द्वारा साझा किया गया ये स्पष्ट सत्य छुपा होता है, और वो कि पर्याप्त धन उपलब्धता के बिना, सुरक्षा, न्याय और अस्तित्व के लिए कोई मार्ग नहीं है.

ये चर्चा कॉप30 में भी बुलन्द हुई है कि पृथ्वी को स्वस्थ बनाने और करोड़ों लोगों की ज़िन्दगियों की हिफ़ाज़त करने के लिए, वैसे तो बहुत से उपायों की आवश्यकता है, मगर वो सभी उपाय, सभी क़दम केवल एक बुनियाद पर टिके हैं, और वो है: धन का मुक्त प्रवाह.

संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु शिखर सम्मेलन में शनिवार को जलवायु वित्त पर, तीसरा उच्चस्तरीय – मंत्रिस्तरीय संवाद आयोजित किया गया जिसमें ऐसे देशों के प्रतिनिधियों की बात सुनी गई, जो जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित हैं. कुछ देशों ने तो, पर्याप्त वित्तीय संसाधनों तक पहुँच को, “स्वयं के लिए अस्तित्व का मुद्दा” बताया.

जलवायु कार्रवाई की ‘रक्त रेखा’

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन मामलों के प्रमुख साइमन स्टील ने इस बैठक को सम्बोधित करते हुए, जलवायु वित्त की रूपान्तरकारी शक्ति पर ज़ोर दिया.

उन्होंने वित्त उपलब्धता को, ‘जलवायु कार्रवाई की रक्त रेखा’ क़रार दिया, जिसमें “योजनाओं को प्रगति में परिवर्तित करने” और “महत्वाकांक्षा को अमल में तब्दील करने” की क्षमता है.

साइमन स्टील ने ज़ोरक देकर कहा कि जलवायु संकट से सर्वाधिक प्रभावित देशों के लिए, वो धन मिलने में बड़ी चुनौतियाँ बनी रहेंगी, जो धन उन्हें मुहैया कराने के लिए बहुत पहले संकल्प व्यक्त किए गए थे.

माली में सौर ऊर्जा पैनल के ज़रिए स्थानीय समुदायों को बिजली की आपूर्ति की जा रही है. सौर ऊर्जा इतिहास में सबसे सस्ती बिजली बन गई है.
© CIF Action

धन के मुक्त प्रवाह से कार्रवाई को मिलती ऊर्जा

यूएन जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा कि दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु सहनशीलता और न्यायसंगत परिवर्तन के उपायों में अलबत्ता, अरबों डॉलर की रक़म का निवेश किया गया है, मगर कुल संसाधन निवेश और धन उपलब्धता, ना तो पर्याप्त है और ना ही उसके बारे में पर्याप्त पूर्वानुमान लगाया जा सकता है, साथ ही ये संसाधन समान रूप से वितरित हैं.

कॉप30 में दुनिया, जलवायु सहयोग के ठोस परिणाम सामने आने के सबूत की तलाश कर रही है.

उन्होंने कहा, “इस सबूत के लिए, धन की ठोस उपलब्धता, धन का मुक्त व न्यायसंगत प्रवाह अनिवार्य है.”

साइमन स्टील ने प्रतिनिधियों से यह दिखाने का आग्रह किया कि जलवायु सहयोग ना केवल कारगर हो, बल्कि इस समय किए गए संसाधन निवेश से, “21वीं सदी की प्रगति दास्तान” को आकार मिले.

उन्होंने कहा, “जब धन का मुक्त प्रवाह होता है तो महत्वाकांक्षाओं को नए और मज़बूत पंख मिलते हैं”, रोज़गार बढ़ते हैं, लोगों का रहन-सहन किफ़ायती व आसान होता है, लोगों का स्वास्थ्य अच्छा होता है, समुदायों को सुरक्षा मिलती है और इससे एक कहीं अधिक मज़बूत व समृद्ध पृथ्वी बनेगी.

मानवीय अस्तित्व के मुद्दे

यूएन महासभा अध्यक्ष ऐनालेना बेयरबॉक ने इस बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि कॉप30 को, $1.3 ट्रिलियन का वार्षिक जलवायु वित्त मुहैया कराने के वादों पर अमल करने की शुरुआत का स्थल बनाना होगा. यह धन वितरण सबसे अधिक ज़रूरमन्दों तक, बहुत तेज़ी, पारदर्शिता और न्यायसंगत रूप में पहुँचना चाहिए.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जलवायु कार्रवाई और सामाजिक न्याय, एक दूसरे में गहराई से गुथे हुए मुद्दे हैं: जलवायु असुरक्षा से भूख और निर्धनता उत्पन्न होते हैं, निर्धनता से प्रवासन और टकराव बढ़ते हैं; और अन्ततः टकरावों से, ग़रीबी गहराती है और फिर निवेश की सम्भावनाएँ कम होती हैं.

ऐनालेना बेयरबॉक ने कहा कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ठोस परिणाम हासिल करने के लिए, इस कुचक्र को तोड़ना बहुत आवश्यक है.

यूएन महासभा अध्यक्ष ने पेरिस जलवायु समझौते के 10 वर्ष पूरे होने की तरफ़ ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जब वर्ष 2015 में, क़ानूनी रूप से बाध्यकारी यह प्रथम वैश्विक जलवायु सन्धि वजूद में आई थी, तो बहुत से प्रतिनिधियों की आँखों में आँसू आ गए थे और आज इसमें 190 से अधिक देश शामिल हो चुके हैं.

उन्होंने कहा कि उस समय, नवीकरणीय ऊर्जा के प्रयोग को बड़े पैमाने पर, यथार्थ से दूर समझा गया था. मगर आज, स्वच्छ ऊर्जा ही, पृथ्वी पर सबसे तेज़ गति से विकसित हो रही है.

ऐनालेना बेयरबॉक ने बताया कि वर्ष 2024 में, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में दुनिया भर में 2 ट्रिलियन डॉलर की रक़म का निवेश किया गया था, जोकि कोयला, गैस, पैट्रोल, डीज़ल जैसे जीवाश्म ईंधन की तुलना में, 800 अरब डॉलर अधिक था.

सौर ऊर्जा, इतिहास में सबसे सस्ती या किफ़ायती बिजली बन गई है.