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नीली वर्दी और रंगीन हेडस्कार्फ पहने भारतीय महिलाओं का एक समूह घर के अंदर बैठा है, और उन्होंने अपने स्मार्टफोन पकड़े हुए हैं जिन पर एक मोबाइल एप्लिकेशन का इंटरफेस प्रदर्शित हो रहा है।

भारत: राजस्थान में डिजिटल बदलाव ने अनेक काम किए आसान और तेज़

© WHO India/श्री राम डिजिटल भुगतान के प्रशिक्षण सत्र में भाग लेतीं, आशा कार्यकर्ता.

भारत: राजस्थान में डिजिटल बदलाव ने अनेक काम किए आसान और तेज़

स्वास्थ्य

भारत में भी डिजिटल क्रान्ति की बदौलत, राजस्थान प्रदेश के गाँवों में रिकॉर्ड सहेजने के परम्परागत तरीक़े अब गुज़रे ज़माने की बात नज़र आने लगे हैं. काग़ज़ी रजिस्टर सम्भालने और रिकॉर्ड बनाए रखने की मुश्किलों को दूर करने के लिए, ASHA Soft नामक ऑनलाइन प्रणाली शुरू की गई है. इससे आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान की प्रक्रिया और उनके काम की निगरानीदोनों को आसान व तेज़ बना दिया है. 

एक समय था जब राजस्थान की ASHA कार्यकर्ताओं को हर घर-भ्रमण, हर जाँच और हर परामर्श सत्र को दर्ज करने के लिए जटिल काग़ज़ी कार्यवाही से गुजरना पड़ता था. 

पारिश्रमिक का भुगतान अक्सर देर से मिलता था, रजिस्टर हाथ से भरने पड़ते थे, और जितना समय वे मरीज़ों की मदद करने में लगातीं, लगभग उतना ही समय दस्तख़त करने और काग़ज़ पूरे करने में चला जाता था.

यह स्थिति तब बदली जब प्रदेश ने ASHA Soft नाम का ऑनलाइन मंच शुरू किया. इससे ASHA कार्यकर्ताओं के काम की निगरानी व भुगतान, दोनों अधिक तेज़ और सुगम हो गए.

इसके बाद 2022 में गर्भावस्था, शिशु देखभाल एवं निगरानी तथा स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन (PCTS) ऐप जोड़ा गया, जिससे सेवा-आधारित प्रोत्साहनों का प्रबंधन भी आसान हो गया.

एक प्रशिक्षण सत्र में भारतीय महिलाओं का एक समूह, जिनमें से प्रत्येक ने एक स्मार्टफोन पकड़ रखा है जिस पर एक ऐप का इंटरफेस प्रदर्शित हो रहा है।
© WHO India/ मंजू कुमावत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के भुगतान के डिजिटल एकीकरण के लिए नीतियाँ और रणनीतियाँ तैयार करने में WHO ने राज्य अधिकारियों व अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम किया.

और अधिक बदलाव तब आया जब प्रदेश के NCD विभाग ने ग़ैर-संक्रामक रोगों से जुड़े जाँच, निरन्तर निगरानी व कार्रवाई (follow-up) और मरीज़ सहायता जैसे प्रोत्साहनों को भी इसी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ दिया.

ASHA Soft और PCTS को एक साथ मिला दिए जाने के साथ, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (ABHA) - यानि 14 अंकों की डिजिटल स्वास्थ्य पहचान (ID) - जुड़ने से, ASHA कार्यकर्ता अब सेवाएँ आसानी से ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं व पर्यवेक्षक मरीज़ों की स्थिति वास्तविक समय में देख सकते हैं.

कार्यकर्ताओं व मरीज़ों दोनों के लिए बेहतर

2024 तक, WHO और अन्य साझीदारों की मदद से सफल पायलट परियोजनाओं के बाद, यह प्रणाली पूरे राजस्थान में लागू हो गई. जिन भुगतानों में पहले सप्ताहों का समय लग जाता था, अब वे तेज़ी से, स्वतः और पारदर्शिता के साथ ASHA कार्यकर्ताओं तक पहुँच रहे हैं.

राजस्थान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉक्टर अमित कुमार यादव कहते हैं, “ASHA Soft को NCD प्रोत्साहनों से जोड़कर राजस्थान ने दक्षता और सशक्तिकरण का एक नया मानक स्थापित किया है. इस पहल ने समय पर भुगतान सुनिश्चित किए हैं, जवाबदेही बढ़ाई है और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में मदद की है.”

एक अहम फ़ैसला यह था कि नई व्यवस्था शुरू होने पर पिछले 12 महीनों की जाँच और निरन्तर निगरानी व कार्रवाई का डेटा भी दर्ज किया गया. 

इससे ASHA कार्यकर्ताओं के, अतीत में किए गए काम को मान्यता मिली और रिपोर्टिंग की सटीकता में बड़ा सुधार आया. अधिकारियों का मानना है कि इसी क़दम ने इस प्रयास को सचमुच रूपान्तरकारी बना दिया है.

भारत में WHO की कार्यकारी प्रतिनिधि पेयडन के अनुसार, राजस्थान में डिजिटल मंच के एकीकरण ने स्वास्थ्य व्यवस्था की काम करने की क्षमता को काफ़ी बढ़ाया है. इससे निरन्तर निगरानी व कार्रवाई तेज़ हुई है, निगरानी बेहतर हुई है और स्वास्थ्य नतीजों को मापना आसान हुआ है.

इस बदलाव के नतीजे भी बहुत जल्दी सामने आए.

भारत में महिलाओं का एक समूह घर के अंदर बैठा है, और प्रत्येक महिला के हाथ में एक स्मार्टफोन है जिस पर डेटा एंट्री एप्लिकेशन प्रदर्शित हो रहा है।
© WHO India/श्री राम भारत में स्वास्थ्यकर्मियों के भुगतान की डिजिटल व्यवस्था ने ग़ैर-संचारी रोगों के प्रबंधन को गति दी है.

भुगतान प्रणाली हुई त्वरित

ASHA कार्यकर्ताओं के लिए यह बदलाव सिर्फ़ आँकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे उनके जीवन और काम से जुड़ा है. 

राजस्थान के राज्य NCD नोडल अधिकारी डॉक्टर सुनील सिंह बताते हैं, “ASHA Soft ने हमारी भुगतान प्रणाली में क्रान्ति ला दी है. स्वचालन ने समय पर भुगतान सुनिश्चित किए हैं, जिससे पहले होने वाली देरी दूर हो गई है.

WHO ने नीतियाँ सुधारने, प्रशिक्षण मॉड्यूल बनाने और स्थानीय भाषा में आसान वीडियो शिक्षण सामग्री तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इससे डिजिटल प्रणाली सीखना ASHA कार्यकर्ताओं के लिए कहीं ज़्यादा सरल हो गया. 

पहले ज़िला स्तर पर ASHA समन्वयकों को प्रशिक्षित किया गया, और फिर उन्होंने ब्लॉक और गाँव स्तर पर अन्य ASHA कार्यकर्ताओं को सिखाया और उनका मार्गदर्शन किया.

आज राजस्थान की यह डिजिटल व्यवस्था सिर्फ़ भुगतान तेज़ करने तक सीमित नहीं है. यह ग़ैर-संक्रामक रोगों की देखभाल को मज़बूत कर रही है, मरीज़ों के लिए निरन्तर निगरानी व समय पर कार्रवाई (follow-up) सुनिश्चित कर रही है, और ASHA कार्यकर्ताओं को उनके काम के अनुरूप सम्मान और स्थिरता दे रही है.

जो पहल कभी एक तकनीकी सुधार के रूप में शुरू हुई थी, वह अब इस बात का बड़ा उदाहरण बन गई है कि डिजिटल नवाचार किस तरह सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है, अग्रिम पंक्ति में काम करने वाली महिलाओं को सशक्त बना सकता है, और ज़रूरी सेवाओं में तेज़ी के साथ-साथ गरिमा भी ला सकता है.

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.