सूडान: अल फ़शर से भागते समय भी लोगों पर हृदयविदारक अत्याचार
सूडान में जारी युद्ध में हाल के क्रूर दौर में लोगों को भीषण अत्याचारों का निशाना बनाए जाने की आपबीतियाँ सामने आ रही हैं. अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन – IOM की प्रमुख एमी पोप ने देश के उत्तरी दारफ़ूर प्रान्त के अल फ़शर में, युद्ध के अत्याचारों से बचने के लिए भागने वालों की आपबीतियाँ सुनी हैं, जिनमें दिल दहला देने वाली घटनाएँ बयान की गईं.
एमी पोप ने बुधवार को सूडान से न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि अल फ़शर पर त्वरित समर्थन बल - RSF का नियंत्रण होने के बाद से, लगभग 90 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं. साथ ही कोर्दोफ़ान क्षेत्र में भी हिंसा के कारण दीगर 50 हज़ार लोगों को भागना पड़ा है.
उन्होंने बताया कि जब लोग सुरक्षा के लिए अन्यत्र स्थानों की तरफ़ भाग रहे थे तो उन्हें उसी दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा, यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है. कुछ ऐसे मामले भी हुए हैं जिनमें आम लोगों को देखते ही गोली मार दी गई.
एमी पोप ने बताया कि उन्होंने कुछ ऐसी महिलाएँ और बच्चे भी देखे जिन्हें कई दिनों तक पैदल चलना पड़ा और लोगों ने रास्ते में देखी गई भयावहता का भी ज़िक्र किया, “इलाक़ा छोड़कर जाने वाले बहुत से लोगों ने रास्ते में शव पड़े देखे."
"बहुत से लोगों को आसमान में उड़ रहे ड्रोन विमानों से बचना पड़ा. कुछ लोग किसी तरह से केवल अपने बच्चों को लेकर भाग सके.”
सूडान में युद्ध के भुक्तभोगियों की ये आपबीतियाँ ऐसे समय में सामने आ रही हैं जब क्षेत्रीय राजधानी अल फ़शर पर RSF का क़ब्ज़ा होने के बाद, युद्ध की हिंसा का पैमाना व दायरा बहुत बढ़ गया है.
एमी पोप ने कहा कि युद्ध की ये भीषणता ऐसे समय में बढ़ रही है जब दुनिया भर में मानवीय सहायता कार्यों के लिए धन कटौती, असाधारण स्तर पर बढ़ रही है.
धन की भारी कमी के बीच
यूएन प्रवासन एजेंसी – (IOM), ज़रूरतम्द लोगों को सहायता सामग्री मुहैया करा रही है जिसमें आश्रय, गरिमा किटें और भोजन पकाने का सामान शामिल हैं.
मगर एमी पोप ने आगाह भी किया कि इस समय ज़रूरतों के स्तर की तुलना में बहुत कम धन उपलब्ध है, जिसका स्तर केवल लगभग 8 प्रतिशत है.
IOM, संसाधन जुटाने के लिए, यूएन राहत समन्वय एजेंसी – OCHA और विश्व खाद्य कार्यक्रम – WFP के साथ मिलकर प्रयास कर रहा है.
OCHA के मुखिया टॉम फ़्लैचर ने भी इस सप्ताह सूडान में मौजूद रहकर हालात का जायज़ा लिया है.
एमी पोप ने कहा है कि IOM के सहायता ट्रक, अल फ़शर से लगभग 60 किलोमीटर दूर तवीला शहर में पहुँच रहे हैं मगर वहाँ लोगों तक पहुँच पाना कठिन साबित हो रहा है.
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान, बहुत से सहायता कर्मियों को भी हिंसा का निशाना बनाया गया है, कुछ सहायताकर्मी तो हताहत भी हुए हैं.
कोर्दोफ़ान में बढ़ रही है तबाही
इस बीच यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने बुधवार को आगाह किया कि सूडान में आम लोगों को निशाना बनाए जाने के मामलों में कोई कमी नहीं देखी गई है.
उन्होंने फ़्रांस की सीनेट को सम्बोधित करते हुए कहा कि उनके कार्यालय – OHCHR को लगातार ऐसी चिन्ताजनक ख़बरें मिल रही हैं कि RSF लगातार अत्याचारों को अंजाम दे रहा है, जिसमें बहुत तेज़ी से लोगों की हत्याएँ, यौन हिंसा और अन्य तरह के मानवाधिकार उल्लंघन मामले शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि कोर्दोफ़ान क्षेत्र में, गहन युद्ध की तैयारियाँ देखी गई हैं क्योंकि लोगों की हत्याएँ और तबाही बढ़ी है.
वोल्कर टर्क ने देशों से, दारफ़ूर में हथियारों की आपूर्ति पर, सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबन्ध पर अमल करने का आग्रह किया.
उन्होंने साथ ही ज़ोर देकर ये भी कहा कि आम लोगों को संरक्षण, मानवीय सहायता के लिए पहुँच और शान्तिपूर्ण शासन की बहाली, प्राथमिकताएँ हैं.