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भूख संकट के 16 ‘हॉटस्पॉट्स’, सहायता के लिए बीता जा रहा है समय

5 अक्टूबर, 2025 को गाजा के दीर अल-बलाह में, लोग डब्ल्यूएफपी समर्थित वितरण से रोटी के बंडल प्राप्त करने के लिए अपने हाथ बढ़ाते हैं।
© WFP/Maxime Le Lijour ग़ाज़ा के डेयर अल बलाह में, ताज़ा तैयार ब्रैड, ज़रूरमन्द लोगों में बाँटे जाते हुए.

भूख संकट के 16 ‘हॉटस्पॉट्स’, सहायता के लिए बीता जा रहा है समय

मानवीय सहायता

विश्व के 16 देशों व क्षेत्रों में एक विशाल आबादी के पास पेट भरने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है और उनके अकाल के गर्त में धँसने का जोखिम गहराता जा रहा है. हिंसक टकराव, आर्थिक उथलपुथल, चरम मौसम घटनाओं – बाढ़, सूखे, तूफ़ान – और सहायता धनराशि की क़िल्लत से, खाद्य असुरक्षा संकट और गम्भीर रूप धारण कर रहा है. जबकि व्यापक स्तर पर भुखमरी को टालने के लिए समय हाथ से फिसला जा रहा है.

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बुधवार को अपनी एक संयुक्त रिपोर्ट में यह चेतावनी जारी की है, जिसमें खाद्य असुरक्षा से सर्वाधिक प्रभावित इलाक़ों (हॉटस्पॉट्स) के बारे में जानकारी दी गई है. 

हेती, माली, फ़लस्तीन, दक्षिण सूडान, सूडान, और यमन, इन छह देशों व क्षेत्रों में विशेष रूप से चिन्ताजनक हालात हैं, जहाँ स्थानीय आबादी के लिए विनाशकारी भूख का आसन्न संकट है.

वहीं छह अन्य देशों – अफ़ग़ानिस्तान, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, म्याँमार, नाइजीरिया, सोमालिया, सीरियाई अरब गणराज्य – में अत्यधिक चिन्ताजनक स्थिति है.

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खाद्य असुरक्षा के अन्य हॉटस्पॉट्स में बुरकीना फ़ासो, चाड, केनया और बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों की आबादी को शामिल किया गया है.

यूएन खाद्य कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक सिंडी मैक्केन ने कहा कि माताएँ अपने बच्चों का पेट भरने के लिए स्वयं भोजन छोड़ने के लिए मजबूर हैं और परिवार अपनी गुज़र-बसर के लिए संघर्ष करते हुए बुरी तरह हताश हो चुके हैं.

“हमें नई धनराशि और बेरोकटोक मार्ग की आवश्यकता है, जिसमें विफलता हाथ लगने से अस्थिरता, प्रवासन और हिंसक टकराव में और वृद्धि होगी.”

यूएन एजेंसियों की यह रिपोर्ट नवम्बर 2025 से मई 2026 के पूर्वानुमान पर आधारित है, जहाँ 16 में से 14 हॉटस्पॉट्स में टकराव और हिंसा को भूख की सबसे बड़ी वजह बताया गया है.

विशेषज्ञों के अनुसार, हिंसा के अलावा आर्थिक झटकों, चरम मौसम घटनाओं और मानवीय सहायता कार्यों के लिए धनराशि के अभाव की वजह से यह संकट और गहन होता जा रहा है.

जीवनरक्षक सहायता को बड़े स्तर पर ज़रूरतमन्दों तक पहुँचाने की आवश्यकता है, लेकिन राहत कार्यों के लिए रक़म बहुत सीमित है, जिससे सहायता अभियान का दायरा सीमित हो गया है.

धनराशि का अभाव

भूख संकट से सर्वाधिक प्रभावित इलाक़ों में विनाशकारी परिस्थितियाँ उपजने की आशंका है, मगर इसे टालने के लिए ज़रूरी वित्तीय संसाधनों का अभाव है.

खाद्य असुरक्षा की स्थिति से निपटने के लिए लगभग 29 अरब डॉलर की आवश्यकता थी, मगर अक्टूबर 2025 तक केवल 10.5 अरब डॉलर की रक़म ही प्राप्त हो पाई है.

इस वजह से आपात राहत प्रयासों पर भी असर हुआ है और अधिकाँश हॉटस्पॉट्स में यह देखा जा सकता है. खाद्य रसद में गहरी कटौती की गई है, सबसे निर्बल समूहों के लिए भोजन कम पहुँच रहा है और शरणार्थियों व विस्थापितों के लिए सहायता पर भी असर हुआ है.

कुछ देशों में महत्वपूर्ण पोषण व स्कूली आहार कार्यक्रमों को स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिससे बच्चों, शरणार्थियों व विस्थापित परिवारों पर जोखिम है.

खाद्य एवं कृषि संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल वित्तीय सहायता नहीं दी गई तो आजीविका के लिए समर्थन, जैसेकि बीज, मवेशियों के लिए स्वास्थ्य सेवा, ज़रूरतमन्द समुदायों को प्राप्त नहीं होगी और इससे नई समस्याएँ खड़ी हो सकती है.

जल्द सहायता की अपील

भूख संकट से प्रभावित देशों में घर-परिवारों का खाद्य उत्पादन और उनकी आय, बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. इसलिए, ऐसे कार्यक्रमों की विशेष रूप से पैरवी की गई है, जिनसे स्थानीय आबादी के पास आजीविका के साधन हों और आपात राहत पर उनकी निर्भरता घटे.

यूएन एजेंसियों ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अकाल की रोकथाम, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं उपायों में जल्द से जल्द निवेश का आग्रह किया है.

FAO और WFP ने कहा है कि अकाल को टाला जा सकता है, लेकिन इसके लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति, नेतृत्व, पर्याप्त सहायता धनराशि और जवाबदेही की ज़रूरत है, जिस पर लाखों लोगों का जीवन निर्भर है.