दक्षिण सूडान में क्या हो रहा है और क्यों है अहम?
दुनिया के सबसे नवगठित देश दक्षिण सूडान में शान्ति प्रक्रिया में, बिखराव के संकेत स्पष्ट नज़र आने लगे हैं. यह देश अब अस्थिरता के एक ऐसे दौर में दाख़िल हो रहा है जिसमें राजनैतिक ध्रुवीकरण, नए सिरे से सशस्त्र झड़पें, और मानवीय सुविधाओं पर भारी दबाव देखने को मिल रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद में कहा कि अगर यही स्थिति जारी रही तो वर्ष 2018 के शान्ति समझौते में व्यक्त किए गए संकल्प या तो ठप हो जाएंगे या उनके ज़रिए हुई प्रगति उलट जाएगी.
वर्ष 2018 में हुआ शान्ति समझौता, गृह युद्ध फिर से भड़कने के ख़िलाफ़ एक पक्की दीवार था, मगर सत्ता बँटवारे और सुरक्षा के बारे में इस समझौते के प्रावधान, अब कमज़ोर पड़ रहे हैं.
दक्षिण सूडान में दिसम्बर 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं, जिनके लिए राजनैतिक प्रतिस्पर्धा ने, शान्ति को मज़बूत करने के बजाय, हिंसा भड़कने का जोखिम बढ़ा दिया है.
इस बीच, पड़ोसी देश सूडान में युद्ध ने हालात को और भी बदतर व गम्भीर बना दिया है. वहाँ अप्रैल 2023 में युद्ध भड़कने के बाद से, लगभग सवा करोड़ लोग, दक्षिण सूडान में पहुँच गए हैं, जिससे देश के पहले से ही सीमित संसाधनों और प्रणालियों पर अत्यधिक बोझ पड़ गया है.
गहराते राजनैतिक तनाव
- राजनैतिक पुनर्गठन ने, समावेशी सरकार के ढाँचे को कमज़ोर कर दिया है, जोकि शान्ति समझौते का एक केन्द्रीय पहलू है.
- विपक्षी नेताओं को बन्दी बनाए जाने और उन पर मुक़दमा चलाए जाने से, राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ गया है और वो विस्फोटक नज़र आने लगी है.
- सुरक्षा क्षेत्र में सुधार, संविधान निर्माण और चुनाव के बारे में योजनाएँ, ठप हैं, जबकि क्षेत्रीय प्रणालियाँ, स्थानीय तनावों को कम नहीं कर पा रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र के शान्ति अभियानों के मुखिया जियाँ पियर लैक्रोआ ने, सुरक्षा परिषद में कहा, “समझौते में समावेशिता के जिस सिद्धान्त को केन्द्रीय पहलू बनाया गया है, उसे अब ठंडे बस्ते में डाल दिया गया लगता है.”
जियाँ पियर लैक्रोआ का सुरक्षा परिषद को सम्बोधन यहाँ देखा जा सकता है.
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पूरा देश हिंसा की चपेट में
- जोंगलेई, यूनिटी, और ऊपरी नाइल प्रान्तों में, सरकारी बलों और विपक्षी धड़ों के बीच युद्धविराम के उल्लंघन और झड़पें गहरा गई हैं.
- हवाई बमबारी, छापामारी और बदले की कार्रवाई के तहत हमले भी दर्ज किए गए हैं.
- हाल की घटनाओं में आम लोग हताहत हुए हैं, विस्थापन हुआ है और लोगों की आजीविकाएँ ख़त्म हो गई हैं.
महिलाओं व लड़कियों पर अधिक जोखिम
- पूरे दक्षिण सूडान में लगभग 75 लाख लोग, अत्यन्त गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जबकि बाढ़, विस्थापन और हिंसा के कारण, मानवीय आवश्यकताएँ बढ़ रही हैं.
- बड़े पैमाने पर लिंग आधारित यौन हिंसा की ख़बरें मिल रही हैं जिसमें बलात्कार, अपहरण, और जबरन विवाह शामिल हैं. गत वर्ष युद्ध सम्बन्धी 260 मामले दर्ज किए गए.
- स्थानीय शान्तिनिर्माण प्रयासों की अगुवाई करने के बावजूद, महिलाओं को आमतौर पर राष्ट्रीय राजनैतिक प्रक्रियाओं से बाहर रखा गया है; महिलाओं के 35 प्रतिशत प्रतिनिधित्व कोटा पर जो सहमति हुई थी उसे पूरा नहीं किया गया है.
यूएन वीमैन की कार्यकारी निदेशक सीमा बहाउस का कहना है, “समर्थन का हाथ खींचने के लिए, इससे बुरा समय कोई और नहीं हो सकता.”
सीमा बहाउस का वक्तव्य यहाँ पढ़ा जा सकता है.
यूएन अधिकारियों ने युद्धक गतिविधियों को तुरन्त बन्द किए जाने, राजनैतिक संवाद फिर शुरू किए जाने, आम लोगों का संरक्षण सुनिश्चित किए जेन और यूएन शान्ति मिशन – UNMISS को सतत समर्थन दिए जाने की पुकार लगाई है.
उन्होंने आगाह भी किया है कि ठोस कार्रवाई के बिना, दक्षिण सूडान के, एक नए युद्ध के गर्त में चले जाने का जोखिम है, जबकि आम लोगों को फिर से बहुत गम्भीर नुक़सान उठाना पड़ेगा.