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सूडान: अपनी जान बचाने के लिए, अल फ़शर से 89 हज़ार लोग भागने को विवश

सूडान के अल फ़शर से जान बचाकर भागने वाले लोगों को तवीला में सहायता मुहैया कराई जा रही है.
© UNOCHA/Mohamed Elgoni
सूडान के अल फ़शर से जान बचाकर भागने वाले लोगों को तवीला में सहायता मुहैया कराई जा रही है.

सूडान: अपनी जान बचाने के लिए, अल फ़शर से 89 हज़ार लोग भागने को विवश

शान्ति और सुरक्षा

हिंसक युद्ध की आँच में झुलस रहे सूडान के नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त में संकट गहरा रहा है, और हिंसा अब अल फ़शर शहर से अन्य इलाक़ों में फैल रही है. मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन एजेंसी (OCHA) ने बिगड़ते हालात के बारे में चेतावनी जारी की है.

सूडान में अप्रैल 2023 में देश पर नियंत्रण के लिए सशस्त्र सेना, और अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच लड़ाई भड़क उठी थी, जिससे वहाँ एक विशाल मानवीय संकट उपजा है. 

RSF ने 500 से अधिक दिनों की घेराबन्दी के बाद नॉर्थ दारफ़ूर प्रान्त के अल फ़शर शहर पर अन्तत: अपना नियंत्रण स्थापित किया, जिसके बाद उसके लड़ाकों द्वारा वहाँ जघन्य अत्याचारों को अंजाम दिए जाने के आरोप सामने आए हैं.

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26 अक्टूबर को अल फ़शर पर क़ब्ज़ा होने के बाद से अब तक, लगभग 89 हज़ार लोग अपनी जान बचाने के लिए अल फ़शर व उसके नज़दीकी गाँवों को छोड़कर भाग चुके हैं.

बहुत से लोगों ने तवीला, मेलित, सराफ़ ओमरा समेत अन्य स्थानों पर शरण ली है, बकि अन्य ने नॉर्दर्न स्टेट में डबाह का रुख़ किया है.

ज़रूरतमन्दों के लिए सहायता

यूएन मानवीय सहायताकर्मी अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर तवीला और डबाह में ज़रूरतमन्दों को भोजन, स्वच्छ जल, साफ़-सफ़ाई, स्वास्थ्य देखभाल समेत अन्य प्रकार की सेवाएँ मुहैया करा रहे हैं. हालांकि आवश्यकताओं की तुलना में संसाधनों की उपलब्धता कम है.

यूएन उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने सोमवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को बताया कि अल फ़शर से कुछ परिवारों ने सूडान-चाड की सीमा पर स्थिति टीना नामक जगह में भी शरण ली है, जहाँ तीन हज़ार विस्थापितों को तत्काल भोजन, आश्रय व स्वास्थ्य देखभाल की ज़रूरत है.

उधर, सीमा पार चाड के पूर्वी हिस्से में शरणार्थियों के मेज़बान समुदाय नए लोगों के आने की तैयारी कर रहे हैं, चूँकि सुरक्षा व सहायता की तलाश में आम लोग अब भी परेशान हैं.

उधर कोर्दोफ़ान क्षेत्र में भी हिंसा बढ़ रही है, हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या बढ़ी है और लोग विस्थापित हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने टकराव पर तुरन्त विराम लगाए जाने और सहायताकर्मियों व आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने का आग्रह किया है. 

साथ ही, अस्पतालों और बुनियादी प्रतिष्ठानों पर ताबड़तोड़ हमले रोके जाने होंगे और बेरोकटोक सहायता मार्ग मुहैया कराए जाने होंगे.

युद्ध को शान्त करने के प्रयास

इस बीच, सूडान के लिए यूएन महासचिव के विशेष दूत रामतने लमामरा ने युद्धरत पक्षों को संयुक्त राष्ट्र के साथ बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, ताकि टकराव में कमी लाना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सम्भव हो सके.

यूएन दूत ने अफ़्रीकी संघ, मिस्र, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों के साथ इस विषय में विचार-विमर्श किया है.

उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने बताया कि पिछले ढाई साल से धधक रहे इस बर्बर युद्ध पर विराम लगाने और युद्धविराम पर सहमति के लिए साझेदारों के साथ मिलकर प्रयास किए जा रहे हैं, मगर फ़िलहाल प्रगति के कोई संकेत नहीं हैं.